क्षेत्रीय समाचारचुनाव

निकाय चुनाव में टिकट वितरण : अनुशासित पार्टी की रीति नीति पर भी उठे सवाल

– प्रकाश कपरुवाण –

स्थानीय निकायों के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों ने अपने अपने अधिकृत प्रत्याशियों का नामांकन करा दिया है, पर क्या राजनैतिक दल वास्तव मे जमीनी सर्वे, आतंरिक सर्वे, पर्यवेक्षकों के सम्मुख राय सुमारी के मिश्रण के बाद ही टिकट फाइनल करते होंगें? इस पर आम मतदाताओं मे भी संशय है।इस बार तो अनुशासित कही जाने वाली पार्टी भी सवालों के घेरे मे है।

दरसअल भारतीय जनता पार्टी जनता के बीच गोपनीय सर्वे, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट व सत्ताधीश पार्टी को इंटेलिजेंस इनपुट के अध्ययन के बाद ही टिकट फाइनल करती रही है, कई स्थानों पर ऐसा हुआ भी है जहाँ नहीं हो सका वहाँ कभी कभी खामियाजा भी भुगतान पड़ा है, हालांकि टिकट वितरण का मामला पार्टियों का आतंरिक मामला है।

स्थानीय निकाय चुनाव मे पार्टियां रीती -नीती, नए -पुराने, व जिताऊ कैंडिडेट सहित सभी विषयों पर मंथन करती होंगीं, लेकिन जब कहीं दोहरे मापदंड सामने आते है तो नई नई शंकाओं का होना भी स्वाभाविक हो जाता है। पार्टियों के कार्यकर्त्ताओं द्वारा टिकट के दावेदार किसी ब्यक्ति का विरोध करना, पार्टियों के प्रदेश नेतृत्व द्वारा विरोध के स्वर को देखते हुए कदम पीछे खींच लेना और आरक्षण की स्थितियों का बदल जाना इसे मात्र संयोग नहीं कहा जा सकता।

टिकटों के वितरण मे यह भी देखने सुनने को मिला कि टिकट के दावेदार फंला फंला ब्यक्ति पार्टी मे नए हैं जबकि देखा गया कि दो दिन पहले ही पार्टियों मे शामिल हुए लोगों को भी टिकट दिया गया। यदि कुछ निकायों मे नए पुराने को लेकर विरोध के स्वर उभरे हैं तो इस पर मंथन तो किया ही जाना चाहिए।

पार्टी के प्रति समर्पण क्या होता है इसका ताजा उदाहरण देहरादून नगर निगम मे देखने को मिला। देहरादून नगर निगम मे मेयर प्रत्याशी के लिए अन्य दावेदारों के साथ भाजपा के बरिष्ठ नेता व पूर्व सीएम जनरल बी सी खंडूरी के पर्यटन सलाहकार रहे प्रकाश सुमन ध्यानी ने भी टिकट की दावेदारी की थी।

टिकट वितरण से पूर्व श्री ध्यानी ने नगर निगम देहरादून मे एक सौ वार्डों मे लगभग 160से अधिक बैठकें भी कर ली थी और उन्हें समर्थन भी मिल रहा था, उन्होंने टिकट मिलने की उम्मीद यह कहते हुए नामांकन भी कर लिया था कि नामांकन के अंतिम दिन 31दिसंबर को आमावश्या होने के कारण ही उन्होंने नामांकन किया है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मेयर प्रत्याशी के पद पर सौरभ थपलियाल के नाम को फाइनल किया गया, और टिकट फाइनल होते ही श्री ध्यानी ने तत्काल एक पोस्ट लिखकर अपने सभी समर्थकों व शुभचिंतिकों से भारतीय जनता पार्टी का सहयोग करने का आग्रह कर दिया, यही तो है अनुशासित पार्टी के समर्पित कार्यकर्त्ता की पहचान – “न टिकट वितरण से पूर्व बगावती सुर और ना ही टिकट कटने के बाद बगावती तेवर”। लेकिन ध्यानी जी का इतने सालों के बाद अचानक निकाय चुनाव से ठीक पहले सक्रिय हो जाना भी अपने आप में चर्चा का विषय रहा है। पार्टी जिताऊ प्रत्याशी को इसलिए टिकट  देती है क्योंकि वह जनता के सम्पर्क में भी रहता है। लेकिन ध्यानी जी अचानक  टिकट के लिए प्रकट हो गये।
इस निकाय चुनाव मे भी टिकट से वंचित रह गए कई निकायों मे पार्टियों के समर्पित व निष्ठावान कार्यकर्त्ताओं की पहचान अवश्य होगी।

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