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राष्ट्रीय पर्यटन दिवस 2025 : भारत के शाश्वत सौन्दर्य का उत्सव

Domestic tourism plays a vital role in the growth and development of India’s tourism sector. The Ministry of Tourism actively promotes domestic tourism through various initiatives aimed at raising awareness about the country’s diverse destinations and products. Domestic tourism remains a significant driver of the industry. According to data from State/UT Governments and other sources within the Ministry of Tourism, India saw 1,731.01 million domestic tourist visits in 2022. This number increased to 2,509 million in 2023, highlighting the growing trend of domestic travel.

 

हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर इसके प्राचीन समुद्र तटों के धूप से नहाए किनारों तक, भारत एक असाधारण संवेदनात्मक अनुभव प्रदान करता है। यह देश दृष्टि, ध्वनि, स्वाद, स्पर्श और गंध संबंधी इंद्रियों को मंत्रमुग्ध कर एक ऐसी यात्रा सृजित करता है जो एक स्थायी छाप छोड़ती है। जब ये इंद्रियाँ भारत की चहल-पहल भरी सड़कों और ऐतिहासिक शहरों का बोध करती है तो यह अनुभव इतिहास, संस्कृति और परंपरा का एक शक्तिशाली मिश्रण बन जाता है – जो इसे पूरी दुनिया के यात्रियों के लिए एक अद्वितीय गंतव्य बनाता है।

 

भारत में पर्यटन का भविष्य

 

जीवंत भारत के वास्तविक भाव का उत्सव मनाने के लिए प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। यह दिन “अतिथि देवो भव” के शाश्वत दर्शन से जुड़ा हुआ है और यात्रा की परिवर्तनकारी शक्ति पर जोर देता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि किस प्रकार पर्यटन न केवल आर्थिक विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देता है, बल्कि भारत को एक संपन्न वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में भी स्थापित करता है, जो अपनी अद्वितीय सुंदरता और संस्कृति से दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है।

 

 

अपनी इस लगातार बढ़ती क्षमता को दर्शाते हुए यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक (टीटीडीआई) 2024 में भारत 119 देशों में से 39वें स्थान पर पहुंच गया है। पर्यटन क्षेत्र में भविष्य और भी उज्ज्वल है और पर्यटन उद्योग का वर्ष 2028 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में 512 बिलियन डॉलर का योगदान करने का अनुमान है। वर्ष 2030 तक, भारत के 410 बिलियन डॉलर के अनुमानित व्यय के साथ इस क्षेत्र में भारत के चौथा सबसे बड़ा वैश्विक देश बनने की उम्मीद है।[2]

इसे देखते हुए सरकार इस क्षेत्र पर अधिक जोर दे रही है। केंद्रीय बजट 2023 में पर्यटन मंत्रालय को 2,400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त 2479.62 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जो पूंजीगत व्यय में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, पर्यटन क्षेत्र के लिए संशोधित बजट परिव्यय 1692.10 करोड़ रुपये रहा। ये नीतिगत निवेश पर्यटन उद्योग को मजबूत करने और आने वाले वर्षों में इसके निरंतर विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। [3] [4]

 

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भारत में घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करना

भारत के पर्यटन क्षेत्र की वृद्धि और विकास में घरेलू पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन मंत्रालय देश के विविध स्थलों और उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न पहलों के माध्यम से घरेलू पर्यटन को सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है। घरेलू पर्यटन इस उद्योग का एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक बना हुआ है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और पर्यटन मंत्रालय के अन्य स्रोतों के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2022 में 1,731.01 मिलियन घरेलू पर्यटकों ने विभिन्न स्थानों की यात्रा का लुत्फ उठाया। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर 2,509 मिलियन हो गई, जो घरेलू पर्यटक क्षेत्र के बारे में लोगों की बढ़ती उत्साहजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है।[5]

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घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं

घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। ये योजनाएं इस प्रकार है:

  • पूंजी निवेश के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को विशेष सहायता (एसएएससीआई): [6] भारत के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए, 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं को एसएएससीआई के तहत मंजूरी दी गई है, ताकि प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों को वैश्विक मानकों के अनुसार विकसित किया जा सके। लगभग 3,295.76 करोड़ रुपये लागत वाली ये परियोजनाएँ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देंगी और स्थायी पर्यटन के माध्यम से रोज़गार के अवसर सृजित करेंगी।
  • पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी: पर्यटन मंत्रालय ने 27 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार पर्यटन पहल, ‘पर्यटन मित्र और पर्यटन दीदी’ की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य पर्यटन का सामाजिक समावेश, रोजगार और आर्थिक विकास के साधन के रूप में उपयोग करते हुए समग्र पर्यटक अनुभव को बढ़ाना है। यह आगंतुकों को ‘पर्यटक-मित्र’ व्यक्तियों से जोड़ता है जो पर्यटकों के  गंतव्यों के लिए स्वाभिमानी और कहानीकार के रूप में काम करते हैं।
  • देखो अपना देश पीपुल्स च्वाइस अवार्ड: ‘देखो अपना देश पीपुल्स च्वाइस 2024’ – 5 श्रेणियों के तहत सबसे पसंदीदा पर्यटक आकर्षणों की पहचान करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण है। यह मिशन मोड में पर्यटन विकास के लिए आकर्षण और अन्य स्थलों की पहचान करने का भी एक प्रयास है।
  •  तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिकविरासत संवर्धन अभियान पर राष्ट्रीय मिशन (प्रसाद): [7] वर्ष 2014-2015 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य तीर्थ स्थलों को प्राथमिकता, योजनाबद्ध और टिकाऊ तरीके से एकीकृत करना है ताकि पूर्ण धार्मिक पर्यटन अनुभव प्रदान किया जा सके। घरेलू पर्यटन की वृद्धि काफी हद तक तीर्थ पर्यटन पर निर्भर करती है। प्रसाद योजना के शुभारंभ के बाद से, मंत्रालय ने देश भर में 1646.99 करोड़ रुपये की लागत से कुल 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
  • स्वदेश दर्शन 2.0: [8] देश भर में पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए संबंधित राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों के प्रयासों को सहायता देने के लिए 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना शुरू की गई और 76 परियोजनाओं के लिए 5287.90 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। पर्यटन मंत्रालय ने स्थायी और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को विकसित करने के उद्देश्य से स्वदेश दर्शन योजना को स्वदेश दर्शन 2.0 (एसडी 2.0) के रूप में नया रूप दिया है और सीमा क्षेत्र की परियोजनाओं सहित 793.20 करोड़ रुपये की लागत से 34 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
  • आतिथ्य सहित घरेलू संवर्धन एवं प्रचार (डीपीपीएच) योजना: [9] वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में संभावित पर्यटन स्थलों के बारे में घरेलू स्तर पर सामान्य जागरूकता पैदा करना है। पर्यटन मंत्रालय देश भर में स्थित अपने 20 घरेलू भारत पर्यटन कार्यालयों के माध्यम से भारत को समग्र रूप से बढ़ावा देने के लिए प्रचार गतिविधियाँ चलाता है।
  • जीवंत ग्राम कार्यक्रम: [10] 15 फरवरी 2023 को अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के 19 जिलों के 46 सीमावर्ती ब्लॉकों में चुनिंदा गांवों के व्यापक विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। इस कार्यक्रम के लिए स्वीकृत कुल वित्तीय परिव्यय 4,800 करोड़ रुपये है।
  • उत्सव पोर्टल: उत्सव पोर्टल पूरे देश में होने वाले कार्यक्रमों, त्यौहारों और लाइव दर्शनों को प्रदर्शित करता है ताकि देश को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा दिया जा सके। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के बारे में भी जानकारी प्रदान करता है और शानदार दृश्यों के माध्यम से डिजिटल अनुभव प्रदान करता है। इसके अलावा यह प्रमुख धार्मिक स्थलों के लाइव दृश्य भी प्रदान करता है। यह पोर्टल महाकुंभ, विशेष रूप से पवित्र स्नान के लिए वैश्विक हस्तियों को आकर्षित करने वाला केंद्र बिंदु बन गया है।
  • आरसीएस-उड़ान (क्षेत्रीय संपर्क योजना- उड़े देश का आम नागरिक): [11]  वर्ष 2016 में आरसीएस उड़ान योजना के तहत शुरू की गई इस योजना में पर्यटन मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ भागीदारी की है। इसके परिणामस्वरूप, लगभग 609  हवाई रूट शुरू हो गए हैं, जिनमें 53 पर्यटन रूट और 62 हेलीकॉप्टर रूट शामिल हैं।
  • यूनेस्को विरासत स्थल:  विश्व विरासत स्थल समिति की 46वीं बैठक में नई दिल्‍ली में 21 से 31 जुलाई तक आयोजित की गई थी। इस बैठक में मोइदम्स- अहोम राजवंश की टीला दफन प्रणाली, चराइदेव, असम” को भारत की 43वीं विश्व धरोहर संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया।

निष्कर्ष

ये सरकारी पहल और योजनाएं घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने, सतत विकास को बढ़ावा देने और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण हैं। देश में पर्यटन के बुनियादी ढांचे और अभिनव कार्यक्रमों में निवेश की प्रक्रिया जारी है, इसलिए भारत एक अग्रणी वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए बेहतर स्थिति में है।

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