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मस्तिष्क की सेहत और सुबह की चुस्की

उषा रावत

​सुबह की चाय या कॉफी केवल एक आदत नहीं, बल्कि आपके मस्तिष्क के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। हाल ही में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन’ (JAMA) में प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन, जिसे टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है, यह स्पष्ट करता है कि कैफीन का मध्यम सेवन मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाने और बुढ़ापे में होने वाली मानसिक बीमारियों को रोकने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह शोध विशेष रूप से उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी स्थितियों से बचना चाहते हैं।

​मस्तिष्क पर कैफीन के तात्कालिक प्रभाव को समझने के लिए हमें शरीर की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गौर करना होगा। जब हम जागते हैं, तो हमारा शरीर ‘एडेनोसाइन’ नामक एक रसायन बनाता है जो मस्तिष्क को थकान का अनुभव कराता है। चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन इस एडेनोसाइन के रिसेप्टर्स को ब्लॉक कर देता है, जिससे न केवल नींद गायब होती है बल्कि ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और संज्ञानात्मक सतर्कता में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। यह प्रक्रिया डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को भी सक्रिय करती है, जो हमारे मूड को बेहतर बनाने और तनाव के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं।

​रिपोर्ट के विस्तृत भाग में इस बात पर जोर दिया गया है कि कैफीन के लाभ केवल तात्कालिक ताजगी तक सीमित नहीं हैं। दीर्घकालिक आधार पर, प्रतिदिन दो से तीन कप कॉफी या उतनी ही मात्रा में चाय का सेवन करने वाले व्यक्तियों में डिमेंशिया का खतरा लगभग 18 प्रतिशत तक कम देखा गया है। विशेष रूप से 75 वर्ष से कम आयु के लोगों में यह प्रभाव और भी अधिक प्रभावी पाया गया है, जहाँ जोखिम में 35 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि कैफीन और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच होने वाले ‘सिनेप्टिक ट्रांसमिशन’ को सुरक्षित रखते हैं, जिससे याददाश्त लंबे समय तक बनी रहती है।

​अतिरिक्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, चाय और कॉफी में पाए जाने वाले ‘पॉलीफेनोल्स’ मस्तिष्क में होने वाली सूजन (Inflammation) को कम करते हैं। आधुनिक न्यूरोलॉजी के विशेषज्ञ बताते हैं कि कैफीन ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ की अखंडता को बनाए रखने में मदद करता है, जो मस्तिष्क को हानिकारक विषाक्त पदार्थों से बचाता है। हालांकि, शोध यह भी स्पष्ट करता है कि ‘डिकैफ़’ यानी कैफीन रहित पेय पदार्थों में ये लाभ नहीं देखे गए, जिससे यह सिद्ध होता है कि सुरक्षात्मक गुणों का मुख्य स्रोत कैफीन ही है।

​भारतीय संदर्भ में डॉक्टरों ने इस बात पर विशेष ध्यान दिया है कि चाय या कॉफी का लाभ तभी मिलता है जब उसका सेवन संयमित तरीके से और सही समय पर किया जाए। बहुत अधिक चीनी या अत्यधिक दूध के साथ चाय का सेवन इन लाभों को कम कर सकता है। साथ ही, दोपहर के बाद या देर शाम कैफीन का सेवन नींद के चक्र को बाधित कर सकता है, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए, विशेषज्ञों की राय है कि सुबह की पहली चुस्की से लेकर दोपहर के शुरुआती घंटों तक का समय कैफीन के सेवन के लिए सबसे उपयुक्त है, ताकि इसके न्यूरोलॉजिकल लाभों का पूर्ण दोहन किया जा सके और मानसिक तीक्ष्णता को बरकरार रखा जा सके।

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