काण्डई चन्द्रशिला में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
पोखरी, १० अप्रैल ( राणा). विकास खंड पोखरी के ग्राम पंचायत काण्डई चन्द्रशिला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। आसपास के गांवों के साथ ही दूर-दराज क्षेत्रों से पहुंचे भक्तजन पूरे श्रद्धाभाव से कथा श्रवण में लीन नजर आए। पूरा वातावरण भजन, कीर्तन और जयकारों से गुंजायमान रहा।
यह धार्मिक आयोजन कुंवरी देवी नेगी द्वारा अपने स्वर्गीय पति की स्मृति में तथा भरत सिंह नेगी, डॉ. शंकर सिंह नेगी और भूपेंद्र सिंह नेगी द्वारा अपने स्वर्गीय पिता सूबेदार ध्यान सिंह नेगी के पितृमोक्ष के निमित्त कराया जा रहा है। आयोजन में नेगी परिवार की सक्रिय भागीदारी के साथ ग्रामीणों का भी सराहनीय सहयोग मिल रहा है।
कथा वाचक विष्णु प्रसाद किमोठी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रास लीलाओं और भक्तों के प्रति उनके स्नेह का भावपूर्ण एवं रसपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान की शरणागति ही जीव के कल्याण का सबसे सरल और सर्वोत्तम मार्ग है। अहंकार त्यागकर श्रद्धा के साथ प्रभु के चरणों में समर्पण करने से ही जीवन का वास्तविक उद्धार संभव है।
उन्होंने कहा कि जन्म-जन्मांतर के पुण्यों के उदय से ही मनुष्य को सत्संग और श्रीमद्भागवत कथा सुनने का अवसर प्राप्त होता है। जिस स्थान पर कथा का आयोजन होता है, वहां सभी तीर्थों का वास माना जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर कथा श्रवण कर भगवान के नाम, गुण और कीर्ति का स्मरण करना चाहिए।
कथा के दौरान राजा परीक्षित और शुकदेव स्वामी का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि श्राप के उपरांत राजा परीक्षित ने सांसारिक मोह त्यागकर गंगा तट पर शरण ली, जहां शुकदेव स्वामी ने उन्हें सात दिनों तक श्रीमद्भागवत कथा सुनाई। कथा के प्रभाव से सातवें दिन उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि जीवन अनिश्चित और मृत्यु अटल सत्य है, इसलिए मनुष्य को धर्म, सत्संग और भक्ति के मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाना चाहिए।
इस दौरान कीर्तन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजन-कीर्तन ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास की अनुभूति हुई।
इस अवसर पर आचार्य रामेश्वर किमोठी, आचार्य ब्रह्मानंद किमोठी, आचार्य अनूप किमोठी, आचार्य संजय किमोठी, राजेंद्र सिंह नेगी, रघुवीर नेगी सहित नेगी परिवार के सदस्य, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, कीर्तन मंडली तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
