उत्तराखण्ड में विकास की कसौटी पर जिलों की रैंकिंग व्यवस्था शुरू

एसडीजी संकेतकों के आधार पर पहली बार जारी मासिक रैंकिंग में चंपावत जिला पहले स्थान पर
देहरादून, 19 दिसंबर। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्य में सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के तहत चिह्नित विकास लक्ष्यों के आधार पर जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर मासिक रैंकिंग करने की व्यवस्था शुरू की गई है। शुरुआती मासिक रैंकिंग में जिला चंपावत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री द्वारा विकास के मोर्चे पर जिलों के प्रदर्शन के आकलन हेतु एसडीजी संकेतकों की कसौटी पर रैंकिंग करने की हिदायत दी गई थी। इसके अनुपालन में नियोजन विभाग के सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एण्ड गुड गवर्नेंस (सीपीपीजीजी) द्वारा एसडीजी की अवधारणा के अनुसार मासिक रूप से अनुश्रवण योग्य चिह्नित संकेतकों की जनपदवार रैंकिंग शुरू की गई है। इसके लिए सीपीपीजीजी द्वारा इस वर्ष अप्रैल से अक्टूबर माह तक 11 सतत विकास लक्ष्यों के कुल 39 संकेतकों का डाटा प्राप्त करते हुए समसामयिक लक्ष्यों के आधार पर पहली बार जिलों की रैंकिंग जारी कर दी गई है।
मासिक रैंकिंग के आधार पर जिला चंपावत ने 96 अंक प्राप्त कर प्रथम, जिला बागेश्वर ने 94 अंक प्राप्त कर द्वितीय तथा जिला नैनीताल ने 92 अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान हासिल किया है। सीपीपीजीजी के विशेष कार्याधिकारी अमित पुनेठा ने कहा कि रैंकिंग में पिछड़े जिलों से वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में सभी एसडीजी में तय लक्ष्यों को प्राप्त करने की अपेक्षा की गई है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग के लिए चिह्नित 39 संकेतकों के अलावा आवश्यकतानुसार समसामयिक लक्ष्यों के सापेक्ष योजनाओं का अनुश्रवण करने के लिए भविष्य में अन्य संकेतकों को भी शामिल किया जा सकता है।
एसडीजी को लेकर उत्तराखंड में प्रतिबद्ध प्रयास, राष्ट्रीय स्तर पर बनी अलग पहचान
वर्ष 2030 तक गरीबी, भुखमरी, बीमारी और अभाव से मुक्त विश्व की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से सतत विकास लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों द्वारा सितंबर 2015 में स्वीकृत और अपनाए गए थे। एसडीजी के चार प्रमुख आयाम हैं—सामाजिक समानता, समावेशी आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा शांतिपूर्ण एवं समावेशी समाज।
इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उत्तराखंड राज्य में गंभीरता से प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। इसके फलस्वरूप उत्तराखंड विभिन्न विकास क्षेत्रों में अग्रणी बनकर उभरा है और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। नीति आयोग द्वारा जारी एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड ने प्रथम स्थान प्राप्त कर सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध प्रयासों की सार्थकता सिद्ध की है।
सतत विकास के चिह्नित लक्ष्य
एसडीजी सं. 1: गरीबी उन्मूलन
एसडीजी सं. 2: शून्य भुखमरी
एसडीजी सं. 3: उत्तम स्वास्थ्य
एसडीजी सं. 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
एसडीजी सं. 6: स्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छता
एसडीजी सं. 7: संवहनीय स्वच्छ ऊर्जा
एसडीजी सं. 8: उत्तम कार्य एवं आर्थिक उन्नति
एसडीजी सं. 9: उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना विकास
एसडीजी सं. 10: असमानता दूर करना
एसडीजी सं. 11: संवहनीय शहर एवं समुदाय
एसडीजी सं. 15: भूमि पर जीवन
प्रदेश में सतत विकास लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त करने के लिए योजनाओं के बेहतर निर्माण के साथ-साथ उनके सफल क्रियान्वयन के लिए प्रभावी एक्शन प्लान बनाया गया है। इससे आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार के साथ राज्य के समग्र विकास की संकल्पना को साकार करने में सफलता मिलेगी। इसी दृष्टिकोण से सभी विभागों एवं जिलाधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार एसडीजी के लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से प्राप्त करने हेतु कार्य करने की अपेक्षा की गई है।
