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उत्तराखंड यूनिट पर लगा आम आदमी पार्टी का झाड़ू : तत्काल प्रभाव से संगठन ही हुआ भंग

-By- Usha Rawat 

देहरादून, 22 अक्टूबर।  आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड संगठन को भंग कर दिया है। पार्टी ने इस निर्णय का कोई कारण नहीं बताया है। फिर भी इस निर्णय का असली कारण नए और पुराने नेताओं में तालमेल न होना माना जा रहा है ।  कुछ ही समय पहले देहरादून पहुंचे पार्टी के प्रदेश प्रभारी बड़े  उलटफेर का संकेत दे चुके थे।

पार्टी के महासचिव द्वारा आज दिल्ली से  जारी आदेश में कार्यकारिणी के स्थान पर संगठन को ही भंग करने  करने की बात कही गयी है।  जब संगठन ही भंग हो गया तो कांग्रेस छोड़ कर आप में शामिल हुए जोत  सिंह बिष्ट जैसे वरिष्ठ नेता भी फ़िलहाल पैदल कर दिये  गए हैं।  जोत सिंह बिष्ट अब तक प्रदेश संयोजक के तौर पर पार्टी के सबसे बड़े नेता थे । बिष्ट और डा० रतूड़ी वैसे भी प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता हैं ।

संगठन को भंग किये जाने के बारे में पूछने पर एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि प्रदेश कार्यकारिणी के साथ ही अनुसांगिक संगठनों की कार्यकारिणियां और   जिला तथा नगर कार्यकारिणियां भी भंग कर दी गयी हैं।  नए ढंग से कार्यकारिणी का गठन होना है, इसलिए पार्टी के महासचिव संदीप पाठक ने  आदेश में संगठन को भंग करने की बात लिखी है ।
गौर तलब है कि हाल ही में आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी वरिंदर कुमार गोयल एवं सह प्रभारी रोहित मेहरोलिया ने उत्तराखंड का दौरा किया था ।   उस समय पार्टी प्रभारी ने चेतावनी दी थी कि जो नेता घरों से नहीं निकलते उन्हें घर पर ही बिठा दिया जायेगा। इस चेतावनी का भी खूब प्रचार किया गया था।
सूत्रों के अनुसार जो लोग शुरू से पार्टी के साथ हैं उन्हें कांग्रेस से आप में शामिल नेता रास नहीं आते।  इसका कारण यह कि  कांग्रेस छोड़ कर पार्टी में आने वाले नेता अनुभवी और बड़े राजनीतिक कद के हैं जिनके होते पार्टी के पुराने नेता बौने हो गए। पार्टी में स्वयं को सीनियर मानने  वाले नेता राजनीति में नौसिखिया हैं इसलिए उनको लगता है कि कांग्रेस मूल के धुरंधर उनकी संभावनाओं को डकार लेंगे। प्रदेश संगठन की ओर  से जब नए कार्यालय का उद्घाटन किया गया तो उस मौके पर पुराने कार्यकर्त्ता और नेताओं का गायब रहना भी नये पुराने नेताओं की टस्सल का संकेत मिल चुका था । आज के पार्टी आदेश को लेकर भी पार्टी का पुराना गुट उत्साहित नज़र आ रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार पहले से पार्टी के साथ रहे नेता  प्रदेश संगठन  पर  कब्ज़ा जमाये हुए बड़े नेताओं के खिलाफ पार्टी नेतृत्व तक शिकायतें पहुंचाते रहते हैं।  हाल  ही में जब नए प्रदेश प्रभारी का देहरादून दौरा हुआ तो उस समय जारी प्रेस विज्ञप्ति  में भी पुराने आप पार्टी के लोगों का रंजो गम झलक रहा था।
 संगठन के भंग होने की घोषणा के बाद  गढ़वाल मीडिया प्रभारी की हैसियत से  रविंद्र सिंह आनंद द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार  जल्द ही नई कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी। आज ही से सभी प्रकल्पों एवं प्रकोष्ठों को भंग समझा जाए। जब संगठन ही भंग हो गया तो संगठन में कोई पदाधिकारी भी नहीं रहता ।  इस पर भी मीडिया प्रभारी का पद पर बने रहना राजनीतिक विश्लेषकों के दिमाग चकरा रहा है ।

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