हमारे बारे में

सन् 1780 में जब भारत में पहली बार ऑगस्टस हिक्की ने ‘‘हिक्कीज बंगाल गजट और द ऑरिजिनल कैलकटा जनरल एडवटाइजर’’ समाचार पत्र निकाला था तो उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि पत्रकारिता एक दिन छापेखाने से निकल कर रेडियो-टेलिविजन के जरिये सातवें आसमान तक पहुंच कर धरती पर उतरेगी और उसके बाद सूचना महाक्रांति के जरिये कोई भी खबर सेकेण्डों में लाखों किमी की दूरी तय कर धरती के कोने-कोने तक पहुंच जायेगी। एक जमाना था लोग देश दुनिया के हाल जानने के लिये दैनिक और साप्ताहिक अखबारों पर निर्भर होते थे। फिर रेडियो-टेलिविजन निरन्तर समाचार देने लगे और अब सोशियल मीडिया के युग में हर आदमी की जेब में रखा मोबाइल सारी दुनिया की खबरें दे रहा है, जिसे आप कही भी पढ़ और सुन सकते हैं। अब तो हर आदमी सिटिजन जर्नलिस्ट हो गया। किसी को भी जो कुछ सामने दिखाई देता है, उसे मोबाइल से रिकार्ड कर तत्काल वायरल कर देता है।

अखबारों और रेडियो-टेलिविजन से अधिक कारगर सोशियल मीडिया हो गया है। इस मीडिया से लोगों को तत्काल सूचनाएं तो मिल ही रही हैं। जेब में रखे मोबाइल और अन्य खुफिया उपकरणों से बेइमान, जुल्मी, शोषक और अनाचारी लोग बेनकाब भी हो रहे हैं। लेकिन दूसरा पक्ष यह भी है कि प्रोफेशनल, निष्पक्ष और व्यावसायिक नैतिकता से बंधे पत्रकारों के हाथ से सूचना तंत्र गैर पत्रकारों और स्वार्थी तत्वों के हाथों चले जाने के कारण सोशियल मीडिया की पत्रकारिता एक अप्रशिक्षित और अनाड़ी ड्राइवर द्वारा चलाई जा रही बस की तरह हो गयी है। बड़ी संख्या में लोग पैसे कमाने और स्वार्थ सिद्धि के लिये भी पोर्टल चला रहे हैं। व्यावसायिक नैतिकता तो अब कहने भर के लिये रह गयी है। चाटुकारिता अपनी पराकाष्टा पर पहुंच गयी है। विज्ञापनों के लालच में लोगों को सच नजर नहीं आता है।

ज्यादातर पोर्टल, अखबार और चैनल सरकार तथा सत्ताधारी दल के ’’माउथ पीस’’ बने हुये हैं। सरकार जिसकी भी आये ये सभी के चरणों में नतमस्तक रहते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल पत्रकारिता और समाज के लिये घातक है, अपितु जिनकी चाटुकारिता होती है उनके साथ भी धोखाधड़ी है। क्योंकि उनको सच्चाई से दूर रखा जाता है जिस कारण वे अपनी कमियों में सुधार करने के बजाय अपने बारे में गलतफहमियां पाले रहते हैं। हम न तो किसी की चाटुकारिता करेंगे और ना ही अनावश्यक आलोचना/निन्दा अभियान चलायेंगे। न तो किसी से डरेंगे और ना ही डरायेंगे। हम ’फ्रेंक, फेयर और फेयरलेस’ पत्रकारिता करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। हमारे साथ अनुभवी और समर्पित पत्रकारों की टीम है, जिनका ध्येय पत्रकारिता को स्वार्थसिद्धि का जरिया बनाना नहीं बल्कि समाज की सेवा करना है। हमारा लक्ष्य दुनिया के कोने-कोने में बसे प्रवासी उत्तराखण्डियों के साथ ही हिमालय प्रेमियों तक पहुंचना है।

समय के साथ कदमताल करते हुये हम आपके लिये ‘‘उत्तराखण्ड हिमालया’’ uttarakhandhimalaya.in के नाम से पोर्टल प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारा उद्ेश्य इस मंच के माध्यम से उत्तराखण्ड के ज्वलंत मुद्दों को उठाना तथा इस हिमालयी क्षेत्र के इतिहास, भूगोल, संस्कृति, पर्यावरण, राजनीति, अर्थव्यवस्था, शासन और प्रशासन आदि पहलुओं पर शोधपूर्ण सामग्री परोसना है। इसी पोर्टल में ब्लाग भी शामिल है जिसमें आपको शोधपूर्ण, निष्पक्ष और बेवाक आलेख पढ़ने को मिलेंगे। हम इसमें सामयिक विषयों पर देश विदेश के अखबारों की ज्ञानवर्धक और सामयिक आलेखों की कतरनें भी ‘क्लिपिंग‘ सेक्शन में रख रहे हैं। हम इस मंच पर शोधार्थियों के लिये शोधग्रन्थ और ऐतिहासिक दस्तावेज भी रखेंगे। सामयिक विषयों पर इंटरव्यू के लिये भी इसमें एक कोना है। इसके लिये सहयोग राशि की भी अपेक्षा है। हम इसे ’नो लॉस नो प्रोफिट’ पर चलायेंगे। विज्ञापन जरूर लेंगे, मगर विज्ञापनों के लिये अपनी आत्मा नहीं बेचेंगे। कृपया इस पोर्टल को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने में सहयोग करें।

उषा रावत इस पोर्टल की एडमिन तथा स्वामी श्रीमती उषा रावत हैं। श्रीमती रावत हिन्दी साहित्य से स्नातकोत्तर होने के साथ ही प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया की पीटीआइ-भाषा और दैनिक ट्रिब्यून में संवाददाता के तौर पर कार्य कर चुकी हैं। वह स्वतंत्र लेखन भी करती रही हैं। सैन्य परिवार से संबंधित हैं और अपने बच्चों को देश और समाज सेवा के संस्कार देती रही हैं।

जयसिंह रावतपोर्टल को पत्रकारिता के उच्च मानदण्डों के अनुरूप चलाने के लिये सम्पादन की जिम्मेदारी जयसिंह रावत उठा रहे हैं। उनकी सेवायंे विशुद्ध रूप से अवैतनिक होंगी। जयसिंह रावत आपका चिरपरिचित नाम है, जिन्हें आप टेलिविजन चैनलों में सुनते और देखते रहे हैं और चार दशकों से देश-विदेश के हिन्दी और अंग्रेजी अखबारों में पढ़ते रहे हैं। सन् 1978 से लेकर अब तक विभिन्न समाचार पत्रों में एक रिपोर्टर और उप संपादक से लेकर ब्यूरो हेड तथा सम्पादक के पद पर कार्य कर चुके हैं। एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में वह उत्तराखण्ड के मुद्दों को देश विदेश के अखबारों और इलैक्ट्रानिक माध्यमों में उजागर करते रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता की हर एक विधा में साधना की है और पत्रकारिता पर 3 शोध ग्रन्थ लिखे हैं और पत्रकारिता के छात्रों को पढ़ाया भी है। उनके उत्तराखण्ड संबंधी 7 शोधग्रन्थ प्रकाशित हो चुके हैं। दो पुस्तकें भारत सरकार के राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने भी प्रकाशित की हैं। प्रिण्ट जर्नलिज्म में राजस्थान पत्रिका के के.सी. कुलिस पुरस्कार सहित कई अन्य मंचों से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये पुरस्कृत हो चुके हैं। वह कभी न झुके और न बिके। इतिहास, संस्कृति, ग्राम स्वराज, भूमि, हिमालय और पर्यावरण उनके पसंदीदा विषय रहे हैं। उनका ईमेल- jaysinghrawat@gmail.com है।

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