सतपाल महाराज से धोखाधड़ी के आरोपी पूर्व शिष्य और शिष्या बरी, दोनों अब हंस फाउंडेशन के संस्थापकों के साथ

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देहरादून, 20 दिसम्बर (उहि) कैबिनेट मंत्री एवं अध्यात्मिक गुरू सतपाल महाराज की पूर्व शिष्या और शिष्य को तृतीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निहारिका मित्तल गुप्ता की कोर्ट ने बरी कर दिया है। इन दोनों ही अभियुक्तों पर महाराज के साथ धोखाधड़ी करने का केस थाना डालनवाला में दर्ज किया गया था। अब ये दोनों ही पति-पत्नी के रूप में परिवार की ही दूसरी संस्था में काम करते हैं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार सतपाल महाराज ने सांसद रहते वक्त दून में सर्कुलर रोड और दिल्ली में कार्यालय खोला था। वर्ष 2011 में उनके तत्कालीन राजनीतिक सचिव गुलाब सिंह ने दोनों के खिलिाफ डालनवाला थाने में केस दर्ज कराया। शालिनी वर्मा उनके देहरादून और भानू भाई दिल्ली स्थित कार्यालय में निजी सहायक का काम देख रहे थे। अभियोजन के अनुसार शालिनी को लोकसभा सचिवालय से 12 हजार रुपये वेतन मिलता था। इसके अलावा तीस हजार रुपये सांसद को हर महीने ऑफिस खर्च के रूप में मिलते थे। दून कार्यालय में जब भी सामान की जरूरत होती तो शालिनी को सामान लाने को रुपये देते थे। आरोप है कि पांच मई 2011 को वह कार्यालय से बाहर गए। इससे पहले शालिनी को 70 हजार रुपये स्टेशनरी का सामान मंगवाने के लिए दिए। आरोप लगाया कि शालिनी ऑफिस का सामान मंगवाने के बजाय वह रकम लेकर गायब हो गई। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। इस दौरान पता लगा इसी तरह उनके दिल्ली स्थित कार्यालय से निजी सहायक भानू भाई भी फरार हुआ है। दोनों के रकम लेकर साथ भागने को लेकर पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। पुलिस की यह चार्जशीट बचाव पक्ष के सामने नहीं टिक पाई। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए धोखाधड़ी के आरोप से बरी कर दिया। न्यायालय में बचाव पक्ष से प्रवीण सेठ और अभियोजन से हरजीत कौर ने पैरवी की।

बताया जाता है कि अभियुक्त बनाये गये भानु और शालिनी प्रख्यात आध्यात्मिक गुरू एवं राजनेता सतपाल महाराज के शिष्य भी थे। इनमें से शालिनी वकालत पढ़ी हुयी थी, इसलिये उनकी योग्यतानुसार उन्हें कार्यालय का कार्य सौंपा गया था, जबकि भानू भाई महाराज के निजी सहायक के रूप में साये की तरह हरदम उनके साथ रहते थे। एक ही गुरू की छत्रछाया में काम करते-करते भानू और शालिनी में प्रेम हो गया। चूंकि महाराज के सेकड़ों आश्रमों में, जहां सन्त महात्मा भी होते हैं, इसलिये वहां के सख्त अनुशासन के कारण शिष्य और शिष्याओं में इस तरह के प्रेम प्रसंगों की सख्त मनाही है। बताया जाता है कि प्रेम प्रसंगों में कठोर अनुशासन के आड़े आने के कारण भानू और शालिनी शादी करने के लिये भाग गये थे। बाद में दोनों ने शादी भी कर ली थी। वर्तमान में भानू और शालिनी पति पत्नी के रूप में हंस फाउंडेशन के संस्थापक भोले जी महाराज और मंगला जी की सेवा में हैं।

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