जोशीमठ आपदा के बाद पर्यटन को पटरी पर लाने की कोशिशें, लेकिन सरकारी उदासीनता बनी बाधा

— प्रकाश कपरुवाण —
औली-हिमालय, 14 फरवरी।
जोशीमठ भू-धंसाव के बाद क्षेत्र की जो नकारात्मक छवि देश-दुनिया के सामने बनी, उससे उबरने के लिए स्थानीय युवा, पर्यटन व्यवसायी तथा शीतकालीन व साहसिक गतिविधियों से जुड़े संगठन लगातार प्रयासरत हैं। जोशीमठ, औली और नीती-माणा घाटियों में विभिन्न साहसिक आयोजनों के माध्यम से पर्यटन और उससे जुड़े रोजगार को पुनर्जीवित करने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, विडंबना यह है कि कई बार सरकारी महकमे ही इन प्रयासों में अपेक्षित सहयोग नहीं कर पा रहे हैं।
उत्तराखंड को नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप की मेजबानी का अवसर मिलने और औली विंटर कार्निवाल के आयोजन पर सहमति बनने से क्षेत्र में उम्मीद जगी थी, लेकिन आयोजन में स्थानीय सहभागिता की कमी उद्घाटन समारोह में ही साफ दिखाई दी। नगर पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी साह को जोशीमठ व औली की समस्याओं पर संबोधन के लिए आमंत्रित न किया जाना तथा जोशीमठ के ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी को मंच पर स्थान न मिलना आयोजनकर्ता विभाग की लापरवाही के रूप में देखा गया। इसको लेकर न केवल विपक्ष, बल्कि सत्ता पक्ष के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई।
पर्यटन मंत्री के समक्ष औली को लेकर लंबे समय से सक्रिय रहे ख्यातिप्राप्त स्कीयर विवेक पंवार को भी अपनी बात रखने का समुचित अवसर नहीं मिल सका। उल्लेखनीय है कि उन्होंने हाल ही में औली की बदहाली और उपेक्षा के विरोध में कड़ाके की ठंड में आंदोलन और अनशन शुरू किया था। बावजूद इसके, वे चलते-चलते ही मंत्री को कुछ समस्याओं से अवगत करा सके।
शीतकालीन खेलों से जुड़े स्थानीय युवाओं ने नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप को किसी भी हाल में सफल बनाने का संकल्प लिया। मुख्य स्कीइंग स्लोप पर बर्फ की कमी के चलते मजदूरों की मदद से आसपास के क्षेत्रों से बर्फ एकत्र कर स्लोप को प्रतियोगिता योग्य बनाया गया, जिसे तकनीकी टीम ने भी स्वीकृति दी। उद्घाटन समारोह में स्कीयर्स द्वारा प्रस्तुत करतब आकर्षण का केंद्र रहे, लेकिन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के अनुरूप समग्र प्रबंधन में कई कमियां भी सामने आईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश के दौर में औली को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए पर्यटन विभाग द्वारा व्यापक प्रयास किए जाते थे। तब स्थानीय सहभागिता के साथ औली महोत्सव और स्कीइंग प्रतियोगिताएं बेहतर ढंग से आयोजित होती थीं। आयोजन से पूर्व एसडीएम स्तर से लेकर कमिश्नर और पर्यटन महानिदेशक तक औली में बैठकों का दौर चलता था, जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और खिलाड़ियों के सुझावों को महत्व दिया जाता था।
जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जीएमवीएन द्वारा जोशीमठ से औली तक निःशुल्क परिवहन की व्यवस्था की जाती थी और सांस्कृतिक कार्यक्रम जोशीमठ में आयोजित होते थे, जिनमें स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता मिलती थी। वर्तमान में इस तरह की व्यवस्थाओं का अभाव महसूस किया जा रहा है।
औली की उपेक्षा का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि करोड़ों की लागत से स्थापित स्नो मेकिंग सिस्टम और आइस स्केटिंग रिंग की मरम्मत व संचालन के लिए युवाओं को आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्की माउंटेनियरिंग एसोसिएशन उत्तराखंड के अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि औली की विश्वस्तरीय स्कीइंग स्लोप शीतकालीन पर्यटकों को स्वाभाविक रूप से आकर्षित करती है। जरूरत इस बात की है कि औली के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ यहां स्थापित उपकरणों का नियमित रखरखाव और मरम्मत सुनिश्चित की जाए, ताकि वर्षभर पर्यटकों का आवागमन बना रहे और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकें।
अब यह देखना अहम होगा कि नेशनल स्कीइंग चैंपियनशिप और औली विंटर कार्निवाल के दौरान सामने आई कमियों को राज्य का पर्यटन विभाग किस हद तक दूर करता है। इस पर देशभर के शीतकालीन खेल प्रेमियों की नजरें टिकी हुई हैं।
