ADR रिपोर्ट: 10 वर्षों में दोबारा चुने गए सांसदों की संपत्ति में 110% का बंपर उछाल; जानें किसके पास है सबसे ज्यादा धन
By- Usha Rawat-
नई दिल्ली। देश में लोकतंत्र के उत्सव के बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की एक ताजा रिपोर्ट ने जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि 2014 से 2024 के बीच दोबारा निर्वाचित हुए 102 सांसदों की संपत्ति में औसतन 110 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है।
10 साल: 15 करोड़ से 33 करोड़ तक का सफर
ADR द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, इन 102 सांसदों की औसत संपत्ति जो 2014 में 15.76 करोड़ रुपये थी, वह 2019 में बढ़कर 24.21 करोड़ रुपये और अब 2024 में 33.13 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है। यानी पिछले 10 वर्षों में एक सांसद की संपत्ति में औसतन 17.36 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।
संपत्ति बढ़ाने में ये सांसद रहे सबसे आगे (Top 3)
रुपये के लिहाज से सबसे अधिक संपत्ति बढ़ाने वाले शीर्ष तीन सांसद भाजपा और वाईएसआरसीपी से हैं:
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उदयनराजे भोसले (BJP, सतारा): इनकी संपत्ति में सबसे ज्यादा 162.51 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। 2014 में इनके पास 60.60 करोड़ की संपत्ति थी, जो 2024 में बढ़कर 223.12 करोड़ रुपये हो गई।
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पूनमबेन माडम (BJP, जामनगर): इनकी संपत्ति 17.43 करोड़ (2014) से बढ़कर 147.70 करोड़ (2024) हो गई। कुल 130.26 करोड़ रुपये का इजाफा।
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पी. वी. मिधुन रेड्डी (YSRCP, राजमपेट): इनकी संपत्ति में 124.25 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
पार्टीवार विश्लेषण: किसकी कितनी बढ़ी ताकत?
रिपोर्ट में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों की औसत संपत्ति वृद्धि का भी विवरण दिया गया है:
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भाजपा (65 सांसद): औसत संपत्ति में 108% की वृद्धि (करीब 16.90 करोड़ रुपये का इजाफा)।
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कांग्रेस (8 सांसद): औसत संपत्ति में 135% की वृद्धि (करीब 6.99 करोड़ रुपये का इजाफा)।
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TMC (11 सांसद): औसत संपत्ति में 86% की वृद्धि।
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AIMIM (1 सांसद): असदुद्दीन ओवैसी की संपत्ति में 488% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई।
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JMM (1 सांसद): झारखंड मुक्ति मोर्चा के सांसद की संपत्ति में प्रतिशत के लिहाज से सबसे अधिक 804% का उछाल देखा गया।
महत्वपूर्ण तथ्य
ADR ने अपनी इस रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की अकबरपुर सीट से भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह उर्फ भोले सिंह का डेटा शामिल नहीं किया है, क्योंकि उनका 2019 का शपथ पत्र उपलब्ध नहीं था।
यह रिपोर्ट चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा स्वयं घोषित शपथ पत्रों (Affidavits) पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में इस तरह का भारी इजाफा मतदाताओं के बीच चर्चा और पारदर्शिता का एक बड़ा विषय है।
