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उत्तर भारत में गहराते कोहरे का कारण: प्रदूषण और एरोसोल्स का ‘घातक गठजोड़

देहरादून/नई दिल्ली: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों (इंडो-गंगा के मैदान) में हर साल सर्दियों में छाने वाला घना कोहरा अब केवल मौसम की घटना नहीं रह गया है। IIT मद्रास के नेतृत्व में हुए एक हालिया अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि हवा में मौजूद प्रदूषणकारी कण यानी एरोसोल्स (Aerosols), कोहरे को न केवल घना बना रहे हैं, बल्कि उसे लंबे समय तक टिकाए रखने में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

​अध्ययन के मुख्य बिंदु और आंकड़े

​वैज्ञानिकों ने पिछले 15 वर्षों के सैटेलाइट डेटा (विशेषकर CALIPSO सैटेलाइट) और उन्नत मौसम सिमुलेशन का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला है:

  • कोहरे की मोटाई में वृद्धि: प्रदूषण के कारण कोहरे की परत 15% से 20% तक अधिक मोटी हो गई है। प्रदूषित स्थितियों में कोहरे की परत अक्सर 400 से 600 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती है।
  • एरोसोल्स की भूमिका: वाहनों, उद्योगों और कचरा जलाने से निकलने वाले एरोसोल्स ‘बीज’ (seeds) का काम करते हैं। जब नमी इन कणों पर जमती है, तो कोहरे की बूंदों की संख्या बढ़ जाती है।
  • उल्टा प्रभाव (Invigoration): आमतौर पर बादलों में प्रदूषण से बूंदें छोटी हो जाती हैं, लेकिन कोहरे के मामले में इसके विपरीत देखा गया। कोहरे की ऊपरी सतह पर बूंदें बड़ी और घनी हो जाती हैं, जिससे सूर्य की रोशनी जमीन तक नहीं पहुंच पाती और कोहरा छंटने में अधिक समय लगता है।

​कोहरा गहराने की वैज्ञानिक प्रक्रिया (The Mechanism)

​अध्ययन के अनुसार, जब वातावरण में एरोसोल्स की मात्रा बढ़ती है, तो कोहरे के भीतर ‘थर्मोडायनामिक अपलिफ्ट’ की स्थिति बनती है।

  1. अधिक संघनन (Condensation): एरोसोल्स के कारण जलवाष्प तेजी से बूंदों में बदलती है, जिससे गर्मी (Latent Heat) निकलती है।
  2. वर्टिकल मिक्सिंग: यह गर्मी कोहरे के भीतर हलचल पैदा करती है, जिससे कोहरा और ऊपर की ओर फैलता है और मोटा हो जाता है।
  3. विकिरण शीतलन (Radiative Cooling): कोहरे की मोटी परत रात के समय गर्मी को अंतरिक्ष में वापस भेजने में अधिक प्रभावी होती है, जिससे ऊपरी सतह और ठंडी हो जाती है और कोहरा और भी सघन हो जाता है।

​उत्तर भारत के लिए खतरे की घंटी

​यह अध्ययन उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • दृश्यता (Visibility): घने कोहरे के कारण दृश्यता शून्य तक पहुंच जाती है, जिससे रेल, हवाई और सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित होता है।
  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: कोहरे में फंसे ये जहरीले एरोसोल्स फेफड़ों के लिए और भी खतरनाक हो जाते हैं क्योंकि नमी के कारण ये कण हवा में नीचे ही टिके रहते हैं।

​समाधान: एरोसोल नियंत्रण ही एकमात्र रास्ता

​अध्ययन में स्पष्ट कहा गया है कि केवल तापमान बढ़ने का इंतजार करना काफी नहीं है। अगर हमें उत्तर भारत की हवा को साफ करना है और कोहरे की मार को कम करना है, तो एरोसोल उत्सर्जन (Aerosol Emission) को नियंत्रित करना होगा। इसमें प्लास्टिक कचरा जलाने पर रोक, वाहनों के धुएं को कम करना और औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त निगरानी शामिल है।

विशेषज्ञ की राय: “यह शोध साबित करता है कि प्रदूषण और मौसम एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। कोहरे को कम करने के लिए हमें कणीय प्रदूषण (PM 2.5) को कम करना ही होगा।”

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