आपदा/दुर्घटना

गंगा के मैदान में एरोसोल से हिमालय की तलहटी में तेज बारिश की घटनाओं में वृद्धि हुई है मैदान में एरोसोल से हिमालय की तलहटी में तेज बारिश की घटनाओं में वृद्धि हुई है

The Indo-Gangetic Plain is located South and upwind of the Himalayan foothills. The region is associated with high aerosol loading, much of which is black carbon and dust, and thus provides an opportunity for studying how aerosol affects extreme rainfall events, particularly when air mass is forced from a low elevation to a higher elevation as it moves over rising terrain technically called orographic forcing.

Map of Global Multi-resolution Terrain Elevation Data 2010 (GMTED2010) in kilometers, provided by the US Geological Survey. Thin black lines mark country borders. The black rectangle marks the domain on the foothills of the Himalayas that was used in this study.

By- Usha Rawat

वैज्ञानिकों ने पाया है कि ब्लैक कार्बन और धूल जैसे एयरोसोल्स के कारण हिमालय क्षेत्र की तलहटी में भारी वर्षा की घटनाओं में वृद्धि हुई है। जो भारत के गांगेय मैदान को दुनिया के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक बनाते हैं।

 

भारत का गांगेय मैदान हिमालय की तलहटी के दक्षिण और हवा की दिशा में स्थित है। यह क्षेत्र उच्च एयरोसोल लोडिंग के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका अधिकांश भाग ब्लैक कार्बन और धूल है, और इस प्रकार यह अध्ययन करने का अवसर प्रदान करता है कि एयरोसोल चरम वर्षा की घटनाओं को कैसे प्रभावित करता है, खासकर उस समय जब वायु कम ऊंचाई से अधिक ऊंचाई तक पूरे वेग के साथ उच्‍च क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है जिसे ओरोग्रैफिक फोर्सिंग कहा जाता है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला, लीपज़िग इंस्टीट्यूट फॉर मीटीअरालॉजी (लिम), यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीपज़िग, जर्मनी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के अनुसंधानकर्ताओं की एक टीम ने विज्ञान और  प्रौ‍द्योगिकी विभाग के जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित, हिमालय क्षेत्र में उच्च वर्षा की घटनाओं पर एरोसोल प्रत्यक्ष विकिरण प्रभाव की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला है।

 

इस अनुसंधान कार्य के निष्कर्षों को वैज्ञानिक पत्रिका ‘ऐटमोस्फिअरिक कैमिस्‍ट्री एंउ फिजिक्‍स’ में हाल ही में प्रकाशित करने के लिए स्वीकार किया गया है। उन्होंने दिखाया कि कण उत्सर्जन, मेघप्रणाली के भौतिक और गतिशील गुणों को बदल सकता है और बदले में, अत्यधिक प्रदूषित शहरी क्षेत्रों में हवा के साथ वर्षा की घटनाओं को बढ़ाता है।

 

हिमालय की तलहटी में अधिक बारिश होने की जांच करने के लिए अध्ययन में 17 वर्ष (2001-2017) के बारिश संबंधी आंकड़े, एरोसोल माप जिसे एरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ (ऐओडी) कहा जाता है, मौसम संबंधी पुन: विश्लेषण क्षेत्रों जैसे विभिन्न ऊंचाइयों पर दबाव, तापमान और नमी की मात्रा का उपयोग थर्मोडायनामिक वेरिएबल्‍स “नम स्थिर ऊर्जा” और भारतीय क्षेत्र से दीर्घ तरंग विकिरण की गणना के लिए किया गया। टीम को उच्च वर्षा की घटनाओं, उच्च एरोसोल लोडिंग और उच्च नम स्थैतिक ऊर्जा (एमएसई) मूल्यों के बीच स्पष्ट जुड़ाव मिला (वायु द्रव्यमान की स्थिर स्थैतिक ऊर्जा में जमीन के ऊपर इसकी ऊंचाई और इसकी नमी की वजह से अव्यक्त गर्मी के कारण संभावित ऊर्जा शामिल होती है)। निष्कर्ष हिमालय क्षेत्र में उच्च वर्षा की घटनाओं पर एरोसोल के विकिरण प्रभाव की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करते हैं।

 

अध्ययन के परिणामों से संकेत मिलता है कि मानसून के दौरान हिमालय पर उत्‍तेजक उच्च वर्षा (एचपी) की घटनाओं में एरोसोल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इस प्रकार, क्षेत्रीय मॉडलिंग अध्ययन में हिमालयी क्षेत्र में उच्च वर्षा की घटनाओं का पूर्वानुमान करते समय रसायन विज्ञान सहित एरोसोल पर विचार करना आवश्यक है।

 

 

(प्रकाशन लिंक:https://acp.copernicus.org/preprints/acp-2020-440/ अधिक जानकारी के लिए भीष्म त्यागी (bhishmatyagi[at]gmail[dot]com) और गौतम चौधरी (goutam3003@yahoo.com) से संपर्क किया जा सकता है।)

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