दिवाली के बाद 16 शहरों में जहरीली हवा: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर : दिवाली की रौनक भले ही चारों तरफ फैली हो, लेकिन त्योहार के बाद प्रदूषण का काला बादल देश के कई शहरों पर मंडरा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने मंगलवार को जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया है कि दिवाली के अगले दिन (21 अक्टूबर) देश के कम से कम 16 शहरों की औसत वायु गुणवत्ता बेहद खराब से लेकरगंभीर श्रेणी में पहुंच गई। इनमें दिल्ली-एनसीआर के साथ हरियाणा के 10, उत्तर प्रदेश के 3, राजस्थान के 1 और गुजरात के 1 शहर शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में पिछले चार वर्षों में दिवाली के बाद का यह सबसे खराब प्रदूषण स्तर दर्ज किया गया है, जबकि हरियाणा के जींद शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 421 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े: 16 प्रभावित शहरों की स्थिति
सीपीसीबी के रीयल-टाइम मॉनिटरिंग डेटा के आधार पर, यहां उन 16 शहरों की सूची दी गई है जहां AQI 301 से ऊपर (बहुत खराब या गंभीर) दर्ज किया गया। AQI की श्रेणियां: 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब, 401-500 गंभीर।
| शहर (राज्य) | AQI स्तर (21 अक्टूबर सुबह 8 बजे) | श्रेणी | प्रमुख प्रदूषक |
|---|---|---|---|
| दिल्ली (दिल्ली) | 350 | बहुत खराब | PM2.5 (488 µg/m³) |
| जींद (हरियाणा) | 421 | गंभीर | PM10 |
| गुरुग्राम (हरियाणा) | 402 | गंभीर | PM2.5 |
| फरीदाबाद (हरियाणा) | 385 | बहुत खराब | PM2.5 |
| अंबाला (हरियाणा) | 367 | बहुत खराब | PM10 |
| करनाल (हरियाणा) | 360 | बहुत खराब | PM2.5 |
| पानीपत (हरियाणा) | 355 | बहुत खराब | PM10 |
| यमुनानगर (हरियाणा) | 348 | बहुत खराब | PM2.5 |
| रोहतक (हरियाणा) | 342 | बहुत खराब | PM10 |
| हिसार (हरियाणा) | 338 | बहुत खराब | PM2.5 |
| भिवानी (हरियाणा) | 335 | बहुत खराब | PM10 |
| नोएडा (उत्तर प्रदेश) | 407 | गंभीर | PM2.5 |
| गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) | 380 | बहुत खराब | PM10 |
| मेरठ (उत्तर प्रदेश) | 365 | बहुत खराब | PM2.5 |
| जयपुर (राजस्थान) | 231 | खराब | PM10 |
| अहमदाबाद (गुजरात) | 320 | बहुत खराब | PM2.5 |
नोट: आंकड़े सीपीसीबी के SAMEER ऐप और दैनिक बुलेटिन से लिए गए हैं। कुछ शहरों में डेटा की कमी के कारण औसत मान उपयोग किए गए।
दिल्ली में सबसे बुरा हाल: 4 साल का रिकॉर्ड टूटा
दिल्ली में दिवाली की रात पटाखों की होली ने हवा को जहर में बदल दिया। सीपीसीबी के अनुसार, 20 अक्टूबर (दिवाली) की शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 345 था, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में था। रात 10 बजे तक यह 344 पर स्थिर रहा, लेकिन अगले दिन सुबह 8 बजे बढ़कर 350 हो गया। शहर के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 36 ‘रेड जोन’ (बहुत खराब से गंभीर) में थे। चार स्टेशन—द्वारका (417), आशोक विहार (404), वजीरपुर (423) और आनंद विहार (404)—’गंभीर’ श्रेणी में पहुंचे। PM2.5 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा (60 µg/m³) से 8 गुना अधिक है।
पिछले चार वर्षों की तुलना में यह सबसे खराब है: 2024 में 328, 2023 में 218, 2022 में 312। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के ‘ग्रीन पटाखों’ के आदेश (रात 8 से 10 बजे तक) का पालन नहीं हुआ। लोगों ने आधी रात तक पटाखे फोड़े, जिससे प्रदूषण रातभर बढ़ता रहा। इसके अलावा, वाहनों से 15.6% और उद्योगों से 23.3% योगदान रहा।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी चिंता
रिपोर्ट में हरियाणा के शहर सबसे प्रभावित दिखे। जींद का AQI 421 गंभीर स्तर पर था, जबकि गुरुग्राम और फरीदाबाद 400 के पार। उत्तर प्रदेश में नोएडा का AQI 407 रहा, जो दिल्ली से भी बदतर है। राजस्थान के जयपुर में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही, लेकिन गुजरात के अहमदाबाद में 320 का स्तर चिंताजनक है। पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं कम होने से कुछ राहत मिली, लेकिन दिवाली के पटाखों ने हालात बिगाड़ दिए।
GRAP-2 के उपाय: क्या होगा आगे?
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने 19 अक्टूबर से ही GRAP का दूसरा चरण लागू कर दिया था। इसमें डीजल जनरेटर पर प्रतिबंध, निर्माण कार्य सीमित करना, और हॉटस्पॉट्स पर अतिरिक्त निगरानी शामिल है। मंगलवार को प्रदूषण न घटने पर GRAP-3 (गंभीर स्तर) लागू होने की संभावना है, जिसमें स्कूल बंद और ऑड-ईवन लागू हो सकता है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुमान से, अगले कुछ दिनों तक हवा ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ के बीच रहेगी, क्योंकि हवा की गति कम है और नमी अधिक।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि PM2.5 के उच्च स्तर से सांस की बीमारियां, हृदय रोग और आंखों में जलन बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने मास्क पहनने, घर के अंदर रहने और एयर प्यूरीफायर उपयोग करने की सलाह दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “प्रदूषण से लड़ाई सामूहिक है। अगले साल से और सख्ती करेंगे।”
विशेषज्ञों की राय: पटाखों पर सवाल
क्लाइमेट ट्रेंड्स की प्रमुख आरती खोसला ने कहा, “ग्रीन पटाखे भी प्रदूषण फैलाते हैं। हमें स्थायी बदलाव की जरूरत है, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और पराली प्रबंधन।” हर साल दिवाली पर प्रदूषण चरम पर पहुंचता है, लेकिन 2025 में यह पिछले पांच वर्षों का सबसे बुरा रहा।
यह रिपोर्ट अमर उजाला, आज तक, हिंदुस्तान टाइम्स, एनडीटीवी और द हिंदू जैसे प्रमुख अखबारों में प्रमुखता से छपी है। सीपीसीबी की वेबसाइट पर पूर्ण डेटा उपलब्ध है। यदि प्रदूषण नहीं रोका गया, तो स्वास्थ्य संकट गहरा सकता है। त्योहार की खुशियां अब प्रदूषण के धुएं में घुल रही हैं—समय है जागने का।

