अंकिता को न्याय दिलाने की मांग पर ‘राजनीति’ का नैरेटिव गढ़ रही सरकार : मोहित डिमरी
देहरादून, 25 जनवरी।अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी ने आरोप लगाया है कि अंकिता हत्याकांड में न्याय की मांग को कमजोर करने के लिए सरकार जानबूझकर यह नैरेटिव गढ़ रही है कि इस मुद्दे पर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रचार के माध्यम से आम जनता के बीच भ्रम पैदा किया जा रहा है कि क्या इस मामले में आवाज उठाना गलत है।
मोहित डिमरी ने स्पष्ट किया कि अंकिता का मामला कोई निजी या व्यक्तिगत घटना नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य, सत्ता, व्यवस्था और सरकार से जुड़ा हुआ मामला है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता का उपयोग अपराधियों को बचाने के लिए किया जाए, जब पूरी सरकारी मशीनरी वीआईपी को संरक्षण देने में जुट जाए और जब साक्ष्यों को बुलडोजर चलाकर नष्ट किया जाए, तो ऐसा मामला अपने आप राजनीतिक बन जाता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि अंकिता प्रकरण में घटनास्थल को क्यों नष्ट किया गया और जांच एजेंसियों की प्राथमिकता न्याय दिलाने के बजाय प्रभावशाली लोगों को बचाने में क्यों दिखाई दी। उनके अनुसार, सरकार और प्रशासन की भूमिका ने पूरे प्रकरण को संदिग्ध बना दिया है।
डिमरी ने कहा कि आंदोलनकारियों पर “गलत राजनीति” करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उनका संघर्ष किसी खनन माफिया, शराब माफिया, भूमि घोटाले या भ्रष्टाचार की राजनीति से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति बहनों को न्याय दिलाने और दोषियों को जेल भेजने की राजनीति है।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि यह केवल सामाजिक या भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा है, क्योंकि पुलिस, प्रशासन और कानून-व्यवस्था सरकार के अधीन होती है। ऐसे में यदि महिलाएं असुरक्षित हैं और आरोपियों को संरक्षण मिल रहा है, तो सवाल सरकार से ही पूछे जाएंगे।
अंत में मोहित डिमरी ने कहा कि यदि अंकिता के लिए न्याय की मांग करना राजनीति है, तो वे ऐसी राजनीति खुले तौर पर करते रहेंगे, ताकि भविष्य में किसी और बेटी के साथ ऐसा अन्याय न हो।
