मानव को प्रतिदिन आते हैं 70 हजार विचार : विशेषज्ञ
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ फार्मेसी में स्ट्रेस मैनेजमेंट पर गेस्ट लेक्चर, मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एन.के. सिंह और कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रो. साधना सिंह ने छात्रों को दिए तनाव से उबरने के टिप्स

मुरादाबाद, 9 अप्रैल। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के प्रिंसिपल प्रो. एन.के. सिंह ने कहा कि सामान्य स्तर का स्ट्रेस व्यक्ति के लिए उपयोगी होता है, क्योंकि यह प्रेरित और उत्साहित करता है, जबकि डिस्ट्रेस सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। डिस्ट्रेस से चिंता और क्रोध पैदा होता है। उन्होंने बताया कि तनाव की स्थिति में शरीर में विभिन्न प्रकार के बायोकेमिकल रिएक्शंस होते हैं, जिससे हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर में बदलाव आता है।
प्रो. सिंह तीर्थंकर महावीर कॉलेज ऑफ फार्मेसी द्वारा आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट विषयक गेस्ट लेक्चर में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तनाव के विभिन्न स्रोतों—सामाजिक, जैविक और पर्यावरणीय तनाव—पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक के अधिक प्रयोग से रेजिस्टेंस बनने के कारण एक समय बाद एंटीबायोटिक का प्रभाव कम हो सकता है। साथ ही उन्होंने सिंपैथेटिक और पैरासिंपैथेटिक सिस्टम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये दोनों सिस्टम शरीर में महत्वपूर्ण बदलाव लाते हैं और तनाव प्रबंधन में इनका विशेष योगदान होता है।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि प्रो. एन.के. सिंह, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रो. साधना सिंह, फार्मेसी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आशु मित्तल तथा वाइस प्रिंसिपल प्रो. मयूर पोरवाल सहित अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
प्रो. सिंह ने झूले का उदाहरण देते हुए बताया कि झूलने की प्रक्रिया में तनाव का प्रबंधन और उसका अभिव्यक्ति विभिन्न रूपों में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन एक मनुष्य के मन में लगभग 70 हजार विचार आते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी को एक महत्वपूर्ण अवधारणा बताते हुए उन्होंने कहा कि सीखने और सकारात्मक सोच से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ध्यान (मेडिटेशन) करने से शरीर में मौजूद टीलोमर्स की लंबाई बढ़ने में सहायता मिलती है, जिससे शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है।
दूसरी ओर कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की एचओडी प्रो. साधना सिंह ने विद्यार्थियों और फैकल्टी सदस्यों को तनावमुक्त रहने के लिए विभिन्न व्यावहारिक विधियां सिखाईं। उन्होंने सांसों पर ध्यान केंद्रित करने और डीप ब्रीदिंग का अभ्यास कराया, जिससे प्रतिभागियों को तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिली।
इस अवसर पर आयोजित स्ट्रेस मैनेजमेंट कार्यक्रम में डॉ. फूलचंद, डॉ. आशीष सिंघई, डॉ. आदित्य विक्रम जैन, श्रीमती प्रीति यादव, श्री अपूर्व रस्तोगी सहित डी.फार्म, बी.फार्म, एम.फार्म और फार्म-डी के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
