एनिमेशन फिल्में समुदाय की आवाज को दर्शकों की बड़ी संख्या तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम

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एमआईएफएफ 2022 में यांगून फिल्म स्कूल पैकेज की क्यूरेटर देबजानी मुखर्जी ने कहा कि एनीमेशन फिल्में हालांकि एक विशिष्ट क्षेत्र हैं लेकिन यह समुदाय की आवाज को दर्शकों की बड़ी संख्या तक पहुंचाने का एक शानदार और सशक्त माध्यम हैं। वह मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 17वें संस्करण में आयोजित #एमआईएफएफ संवाद में बात कर रही थीं। ओपनिंग डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘मीराम- द फायरलाइन’ के निर्देशक जेम्स खंगेम्बम और हिंदी डॉक्यूमेंट्री ‘इन्वेस्टिंग लाइफ’ की निर्देशक वैशाली वसंत केंडल भी चर्चा में शामिल हुईं।

पुरस्कार विजेता स्वतंत्र एनीमेशन फिल्म निर्मात्री और लेखिका देबजानी मुखर्जी ने ‘लिंग आधारित हिंसा’ और ‘दोस्ती की कहानियां’ विषयों के तहत छात्र फिल्मों को सलाह देने में अपनाई गई प्रक्रिया पर भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि “हमने उन छात्रों को चुना जो विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें कला या फिल्म निर्माण में कोई पूर्व अनुभव या प्रशिक्षण नहीं है। हमने एनिमेटेड डॉक्युमेंट्री बनाने के लिए दो से तीन महीने एक साथ काम किया। छात्रों ने समुदाय से योगदानकर्ताओं के ऑडियो आख्यान रिकॉर्ड किए और उन्हें एनिमेशन फिल्मों में बदल दिया गया।” देबजानी ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि एमआईएफएफ जैसे मंच एनिमेशन फिल्मों के बेहतर विपणन और वितरण में मदद करेंगे।

एमआईएफएफ22 की ओपनिंग डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘मीराम- द फायरलाइन’ के निर्देशक जेम्स खंगेम्बम ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट के फिल्म निर्माता मुनाफे से ज्यादा फिल्मों के जुनून को लेकर चिंतित रहते हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि “चूंकि यह पर्यावरण पर डॉक्युमेंट्री फिल्म है, इसलिए मुझे इसे रिकॉर्ड करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इस फिल्म के निर्माण पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन मुझे इससे कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला है। मुझे बहुत दया और प्रशंसा मिल रही है, लेकिन पैसा नहीं मिल रहा है”।

 

 

अपनी फिल्म के नायक मोइरंगथेम लोइया के दिए गए संदेश को याद करते हुए जेम्स खंगेम्बम ने कहा कि प्रकृति से मानव की अपेक्षा कभी समाप्त नहीं होती है और इसे रोकना होगा। उन्होंने आगे उन घटनाओं का जिक्र किया जिनसे वो एक पत्रकार से एक फिल्म निर्माता के रूप में आज सबके सामने हैं।

हिंदी डॉक्युमेंट्री ‘इन्वेस्टिंग लाइफ’ की निर्देशक वैशाली वसंत केंडल ने कहा कि उनकी फिल्म मानव सहित सभी प्रजातियों के अस्तित्व के बारे में है। उन्होंने कहा कि “इस डॉक्यूमेंट्री का आइडिया कारणों के बारे में जांच-पड़ताल करने की बजाय अप्रत्याशित प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद किए जाने वाले कार्यों के बारे में बात करना है”। यह फिल्म महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों के तीन सामान्य लोगों के जीवन की कहानी है जो अकेले और दैनिक आधार पर साथी इंसानों, जानवरों और पर्यावरण के अस्तित्व और कल्याण के लिए काम करते हैं। इस मौके पर ‘इन्वेस्टिंग लाइफ’ के नायक माजिद और राघवेंद्र नंदे भी मौजूद थे।

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पीआईबी एमआईएफएफ टीम | बीएसएन/एए/डीआर/एमआईएफएफ-21

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