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अंकिता भंडारी प्रकरण: वीआईपी संलिप्तता को सरकार ने किया सिरे से खारिज : भाजपा नेताओं को दी क्लीन चिट

देहरादून, 3 जनवरी । अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर 4 जनवरी को प्रस्तावित विपक्ष के मुख्यमंत्री  आवास घेराव कार्यक्रम से ठीक पहले राज्य सरकार और उत्तराखण्ड पुलिस की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में किसी भी प्रकार की वीआईपी संलिप्तता नहीं पाई गई है और इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें पूरी तरह भ्रामक हैं।

उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि सोशल मीडिया एवं कुछ माध्यमों के जरिए आधे-अधूरे तथ्यों और निराधार आरोपों के आधार पर वीआईपी एंगल को हवा दी जा रही है, जबकि इस तथ्य को न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच निष्पक्ष, तथ्यपरक और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

हाल ही में पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर के बीच कथित वायरल फोन बातचीत को लेकर भी पुलिस ने स्थिति स्पष्ट की। पुलिस ने कहा कि वायरल ऑडियो को गंभीरता से लेते हुए अलग से SIT का गठन किया गया है, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। हालांकि, अब तक की जांच में अंकिता हत्याकांड में किसी भी वीआईपी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि वायरल बातचीत के आधार पर जिन नामों को उछाला गया, उनमें भाजपा के कुछ नेताओं को लेकर लगाए गए आरोप निराधार पाए गए हैं।

पुलिस ने बताया कि इस प्रकरण में तीनों अभियुक्तों को न्यायालय द्वारा दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा चुकी है। जांच के दौरान किसी भी प्रकार के साक्ष्य न तो नष्ट किए गए और न ही छिपाए गए। जिस कमरे को लेकर बार-बार साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाया गया, उसकी वीडियोग्राफी सहित सभी साक्ष्य न्यायालय में विधिवत प्रस्तुत किए गए हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि शुरुआती जांच के दौरान ही कुछ घंटों के भीतर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था और वे वर्तमान में न्यायिक अभिरक्षा में जेल में हैं। तथाकथित वीआईपी एंगल सामने आने के बाद भी रिसॉर्ट में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन जांच की गई, लेकिन किसी भी वीआईपी की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले।

उर्मिला सनावर द्वारा फेसबुक लाइव और ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से लगाए गए आरोपों को लेकर पुलिस ने अलग SIT गठित की है। पुलिस के अनुसार, उर्मिला सनावर को अभी गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किया गया है, जिसका अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने सुरक्षा की मांग की है, लेकिन उनके पत्र में स्पष्ट पता नहीं होने के कारण पुलिस उनसे संपर्क की अपील कर रही है।

पुलिस ने मीडिया और जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई ठोस साक्ष्य हो तो उसे पुलिस के समक्ष प्रस्तुत करें। उत्तराखण्ड पुलिस ने दोहराया कि अंकिता भंडारी प्रकरण में किसी को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है और जांच पूरी तरह निष्पक्ष रही है।

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