थराली क्षेत्र में बंदरों और कुत्तों का आतंक फिर भी अस्पताल में रेबीज के टीके नहीं
— हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 7 मार्च। पिंडर घाटी क्षेत्र में इन दिनों बंदर, लंगूर, कुत्ते अथवा अन्य जानवरों के काटने की घटनाओं के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) देवाल में रेबीज का टीका उपलब्ध न होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र की एक लाख से अधिक आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले इन अस्पतालों में पिछले कई दिनों से यह महत्वपूर्ण टीका उपलब्ध नहीं है, जिससे मरीजों को सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को इन दिनों किसी जानवर ने काट लिया तो सीएचसी थराली या पीएचसी देवाल में उसे रेबीज का टीका नहीं लग पा रहा है। ऐसी स्थिति में लोगों को या तो निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है या फिर दूर-दराज के अस्पतालों तक जाना पड़ रहा है।
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय सर्वोच्च सलाहकार समिति के सदस्य एवं राज्य आंदोलनकारी भूपाल सिंह गुसाईं ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से सीएचसी थराली और पीएचसी देवाल में रेबीज जैसा महत्वपूर्ण टीका उपलब्ध नहीं है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, क्षेत्र में कुत्तों के साथ-साथ जंगली जानवरों, विशेषकर बंदरों और लंगूरों का आतंक भी बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में अस्पतालों में रेबीज के टीके का न होना सरकार और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि पिंडर घाटी की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र के अस्पतालों में हर समय आवश्यक दवाइयों और टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। गुसाईं ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि सीएचसी थराली सहित क्षेत्र के सभी चिकित्सालयों में शीघ्र रेबीज के टीकों की आपूर्ति की जाए और भविष्य में इनकी नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
इधर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीकों की आपूर्ति के लिए मांग भेज दी गई है और जल्द ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मितेश मंजुल ने बताया कि लगभग दस दिन पहले अस्पताल में रेबीज के टीके समाप्त हो गए थे। उनकी आपूर्ति के लिए विभाग को मांग भेज दी गई है और संभावना है कि आने वाले मंगलवार तक टीकों की आपूर्ति हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल की ओर से भी मांग भेजी गई होगी तो वहां भी टीकों की आपूर्ति कर दी जाएगी।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले ही सीमित हैं। ऐसे में जीवन रक्षक टीकों की कमी से लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से शीघ्र व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है, ताकि किसी आपात स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
