डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट : हर 6 में से 1 भर्ती मरीज पर एंटीबायोटिक असर नहीं करता
मुंबई : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ग्लोबल एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस एंड यूज सर्विलांस सिस्टम (GLASS) की सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में हर 6 अस्पताल में भर्ती मरीजों में से 1 पर एंटीबायोटिक्स का कोई असर नहीं होता।
104 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि 2018 से 2023 के बीच मॉनिटर किए गए 40% एंटीबायोटिक्स पर जीवाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता (resistance) सालाना 5–15% तक बढ़ी। भारत के इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की रिपोर्टें भी इस खतरे की पुष्टि करती हैं। 2023 में भारत के ICU में E. coli संक्रमणों में सेफोटैक्सिम, सेफ्टाजिडाइम, सिप्रोफ्लॉक्सासिन और लेवोफ्लॉक्सासिन जैसी दवाओं पर “कम प्रभाव” देखा गया।
आईसीएमआर की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कमिनी वालिया ने बताया कि भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों में एंटीबायोटिक्स का अत्यधिक उपयोग इस समस्या को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे देश में एंटीबायोटिक्स का सेवन अधिक है, जो इस प्रतिरोध के फैलाव का एक बड़ा कारण है।”
डॉ. वालिया ने यह भी कहा कि रिपोर्टों में दिखाए गए आंकड़े ज्यादातर टर्शियरी केयर हॉस्पिटल्स के हैं, जहाँ गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज होता है। इसलिए ये पूरे देश की वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाते, पर यह खतरे की एक गंभीर चेतावनी अवश्य हैं।
एएमआर (AMR) क्या है
Antimicrobials उन दवाओं को कहा जाता है जो बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद और परजीवियों से होने वाले संक्रमणों का इलाज करती हैं।
Antimicrobial Resistance (AMR) तब होती है जब सूक्ष्मजीव (microorganisms) इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बन जाते हैं और दवाएं बेअसर हो जाती हैं।
एएमआर के बढ़ने का मुख्य कारण एंटीबायोटिक्स का गलत और अत्यधिक उपयोग है।
डब्ल्यूएचओ ने एएमआर को दुनिया की शीर्ष 10 सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों में शामिल किया है।
एएमआर का भारत पर बोझ
ICMR की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग सभी प्रमुख एंटीबायोटिक्स पर जीवाणु-प्रतिरोध बढ़ रहा है।
सबसे सामान्य ड्रग-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया हैं :
Escherichia coli (E. coli)
- Klebsiella pneumoniae
- Acinetobacter baumannii
- Pseudomonas aeruginosa
- Staphylococcus aureus
डब्ल्यूएचओ की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार
- 2023 में प्रयोगशाला से पुष्टि किए गए हर 6 जीवाणु संक्रमणों में से 1 संक्रमण एंटीबायोटिक उपचार के प्रति प्रतिरोधी पाया गया।
- 2018 से 2023 के बीच एंटीबायोटिक प्रतिरोध में 5–15% की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई।
- दक्षिण–पूर्व एशिया और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में यह दर सबसे अधिक है — जहाँ हर 3 में से 1 संक्रमण एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी ह
प्रभाव (Effects)
- डब्ल्यूएचओ के अनुसार “सुपरबग्स” अगले 25 वर्षों में लगभग 4 करोड़ लोगों की जान ले सकते हैं।
- 1990 से 2023 के बीच, एएमआर के कारण हर साल औसतन 50 लाख लोगों की मौत हुई।
- भारत में वर्ष 2019 में ही एएमआर-संबंधित संक्रमणों से 3 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई।
वैज्ञानिक विश्लेषण (Meta Analysis)
हर कुछ वर्षों में डॉक्टरों को पता चलता है कि कुछ जीवाणु ऐसे विकसित हो गए हैं जो लगभग सभी एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधक हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने Antimicrobial Resistance (AMR) को दुनिया के 10 सबसे बड़े वैश्विक स्वास्थ्य खतरों में से एक बताया है।
एएमआर के कारण हर साल लाखों मौतें होती हैं — केवल भारत में ही 2019 में 3 लाख से अधिक लोग इससे मारे गए।
ग्राम-निगेटिव बैक्टीरिया में सबसे आम : E. coli और Klebsiella pneumoniae
डब्ल्यूएचओ रिपोर्ट के अनुसार रक्त संक्रमण (bloodstream infections) में पाए जाने वाले ग्राम-निगेटिव बैक्टीरिया में E. coli और Klebsiella pneumoniae सबसे आम हैं। ये गंभीर संक्रमण पैदा करते हैं, जो सेप्सिस (sepsis), अंगों की विफलता (organ failure) और मृत्यु तक का कारण बन सकते हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि K. pneumoniae के कई स्ट्रेन अब थर्ड-जेनरेशन सेफालोस्पोरिन्स जैसी दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधी हो चुके हैं। अफ्रीकी क्षेत्रों में इन बैक्टीरिया में 70% तक प्रतिरोध पाया गया है।
भारत, चीन और पाकिस्तान से संबंधित आंकड़ों में पाया गया कि 41% संक्रमण रक्त प्रवाह (bloodstream) से जुड़े थे, जबकि 42% संक्रमण मूत्र मार्ग (urinary tract) से जुड़े थे।
डॉ. वालिया ने कहा, “भारत लगातार डब्ल्यूएचओ के GLASS सर्विलांस कार्यक्रम में योगदान देता आ रहा है। हमारे परीक्षण और प्रयोगशालाएं पहले से कहीं अधिक सक्षम हुई हैं, लेकिन अब भी जमीनी स्तर पर बहुत सुधार की आवश्यकता है।”
एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग
यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग जारी रहा, तो भविष्य में सामान्य संक्रमणों का इलाज करना भी कठिन हो जाएगा। एएमआर का खतरा अब वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक मौन महामारी (Silent Pandemic) बनता जा रहा है।
