1950 जैसा बड़ा भूकंप फिर आने की आशंका? पूर्वी हिमालय और इंडो-बर्मा रेंज के बीच गहराता तनाव

By- Jyoti Rawat
वैज्ञानिकों ने हाल ही में भारत के पूर्वोत्तर हिस्से (विशेषकर असम और अरुणाचल प्रदेश) में जमीन के नीचे होने वाली हलचलों पर एक महत्वपूर्ण शोध किया है। जमीन के नीचे दो विशाल प्लेटों के टकराने और घूमने के कारण अरुणाचल और असम की सीमा पर स्थित ‘मिशमी पहाड़ियां’ एक ऐसे दबाव केंद्र में बदल गई हैं, जहाँ भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना बनी रहती है।इसे आसान भाषा में समझने के लिए हम इसे कुछ मुख्य बिंदुओं में बाँट सकते हैं:
- इस शोध का मुख्य विषय क्या है?
वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि 1950 में असम में आया विनाशकारी भूकंप (जिसकी तीव्रता 8.6 थी) क्यों आया था और क्या भविष्य में भी ऐसे बड़े भूकंप आ सकते हैं?
यह पूरा क्षेत्र दो मुख्य हिस्सों के मिलन पर टिका है:
पूर्वी हिमालय (Eastern Himalayas): यहाँ जमीन के नीचे की हलचलें लगभग 40 किमी की गहराई तक सीमित हैं।
इंडो–बर्मा रेंज (Indo-Burma Range – IBR): यहाँ हलचलें 200 किमी की गहराई तक जाती हैं, क्योंकि यहाँ भारतीय प्लेट (जमीन की परत) गहराई में धंस रही है।
- ‘भूकंपीय अंतर’ (Seismic Gap) और भविष्य का खतरा
शोध में एक चिंताजनक बात सामने आई है जिसे ‘सीस्मिक गैप‘ कहते हैं। इसका मतलब है कि 1950 के महान भूकंप के बाद से ऊपरी असम और अरुणाचल की मिशमी पहाड़ियों के बीच के इलाके में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है।
जब लंबे समय तक भूकंप नहीं आता, तो जमीन के नीचे ‘तनाव’ (Stress) जमा होता रहता है।
यह तनाव भविष्य में किसी बड़े भूकंप का संकेत हो सकता है।
- वैज्ञानिकों ने क्या नया खोजा?
देहरादून के ‘वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान’ के वैज्ञानिकों ने अरुणाचल की लोहित और सियांग घाटियों में विशेष स्टेशन लगाए ताकि छोटे-से-छोटे भूकंपों को भी रिकॉर्ड किया जा सके। उनकी खोज के मुख्य परिणाम ये हैं:
जमीन का मुड़ना और घूमना: इस क्षेत्र में भारत की कठोर प्लेट एशिया की प्लेट से टकरा रही है, जिससे जमीन न केवल दब रही है बल्कि घड़ी की सुई की दिशा में (Clockwise) घूम भी रही है।
गहराई का अंतर: इंडो-बर्मा रेंज में भूकंप काफी गहराई में आते हैं, जबकि पूर्वी हिमालय (टिडिंग-ट्यूटिंग क्षेत्र) में भूकंप ऊपरी सतह के करीब आते हैं, जो ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं।
तनाव का विभाजन: इस क्षेत्र की बनावट इतनी जटिल है कि जमीन के नीचे का दबाव अलग-अलग दिशाओं में बंट जाता है, जिससे यहाँ का भूगोल बहुत सक्रिय और संवेदनशील बन जाता है।
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यह आम आदमी के लिए क्यों जरूरी है?
अत्यधिक सक्रिय क्षेत्र: अरुणाचल और असम का यह सीमावर्ती इलाका ‘ज़ोन-5′ में आता है, जो भूकंप के लिहाज़ से भारत का सबसे खतरनाक इलाका है।
सतर्कता: यह शोध हमें बताता है कि इस क्षेत्र की जमीन के नीचे भारी ऊर्जा जमा हो रही है। यह जानकारी भविष्य में सुरक्षित बुनियादी ढांचे (सड़क, पुल, मकान) बनाने और आपदा प्रबंधन की तैयारी में मदद करती है।
