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आशा भोंसले: सुरों की ‘फिनिक्स’ और वर्सटैलिटी की आधुनिक परिभाषा

Asha Bhosle sang her first film song for the Marathi film Maazhe Baal. The music was by Datta Davjekar, who also introduced her sister Lata Mangeshkar to Hindi films in 1947 as an adult singer.

–उषा रावत –

भारतीय संगीत जगत में जब भी ‘बहुमुखी प्रतिभा’ शब्द का जिक्र होगा, आशा भोंसले का नाम सबसे ऊपर चमकेगा। लेकिन उन्हें केवल लता मंगेशकर की छोटी बहन या एक महान गायिका के रूप में देखना उनके साथ अन्याय होगा। आशा जी वास्तव में संगीत की वह ‘फिनिक्स’ हैं, जिन्होंने हर दशक में खुद को राख से दोबारा पैदा किया और समय की मांग के अनुसार अपनी आवाज को ढाला।

 ‘सेकंड चॉइस’ से ‘सॉवरेन’ बनने का सफर

शुरुआती दौर में आशा जी को वे गाने मिलते थे जिन्हें लता दीदी या गीता दत्त ने मना कर दिया होता था। आमतौर पर ये गाने ‘वैम्प’ या ‘कैबरे’ डांसरों पर फिल्माए जाते थे। लेकिन यहीं से आशा जी का ‘नया एंगल’ शुरू होता है। उन्होंने इन गानों को केवल गाया नहीं, बल्कि उनमें ‘आवाज़ का अभिनय’ (Voice Acting) जोड़ा। ‘पिया तू अब तो आजा’ से लेकर ‘दम मारो दम’ तक, उन्होंने सांसों के उतार-चढ़ाव और बारीकियों से यह साबित कर दिया कि एक गायिका केवल सुर नहीं, बल्कि पूरा चरित्र पैदा कर सकती है।

तकनीक और समय के साथ कदमताल

जहाँ उनके दौर के कई कलाकार नए वाद्ययंत्रों और इलेक्ट्रॉनिक संगीत के आने से पिछड़ गए, वहीं आशा जी ने उसे गले लगाया।90 के दशक का जादू: जब संगीत बदल रहा था, तब 60 की उम्र पार कर चुकी आशा जी ने ‘रंगीला’ में ‘तन्हां तन्हां’ और ‘रंगीला रे’ गाकर पूरी युवा पीढ़ी को अपना दीवाना बना लिया। इंडी-पॉप और आर.डी. बर्मन: आर.डी. बर्मन के साथ उनके प्रयोगों ने भारतीय संगीत को ‘वेस्टर्न बीट्स’ के साथ ऐसा जोड़ा कि आज भी रीमिक्स के दौर में उनके ओरिजिनल गाने सबसे ज्यादा सुने जाते हैं।

 शास्त्रीय और पाश्चात्य का अनूठा सेतु

लोग उन्हें ‘कैबरे’ और ‘पेपी’ गानों के लिए जानते हैं, लेकिन ‘उमराव जान’ की गजलें (दिल चीज क्या है, इन आँखों की मस्ती के) उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट थीं। खय्याम साहब ने उनकी आवाज को दो सुर नीचे उतरवाया और दुनिया ने एक ऐसी ‘गजल गायिका’ को देखा जिसने नजाकत की नई परिभाषा लिखी। यह उनके व्यक्तित्व का वह हिस्सा है जो बताता है कि वह एक कुशल शिल्पकार हैं, जिन्हें अपनी आवाज के हर कोने पर नियंत्रण है।

संगीत से परे: एक उद्यमी और जीवंत व्यक्तित्व

आशा भोंसले आज केवल एक गायिका नहीं, एक ‘ब्रांड’ हैं। उनके रेस्टोरेंट चेन ‘आशा’ज’ पूरी दुनिया (दुबई से लेकर ब्रिटेन तक) में मशहूर हैं। 90 की उम्र में भी सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता, कुकिंग के प्रति उनका प्रेम और उनकी हाजिरजवाबी यह दर्शाती है कि उम्र केवल एक संख्या है।

भारतीय संगीत की वहआशा

आशा भोंसले का जीवन हमें सिखाता है कि प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, खुद के बीते हुए कल से होनी चाहिए। उन्होंने कभी लता जी की परछाई में छिपने की कोशिश नहीं की, बल्कि अपनी एक अलग धूप पैदा की। आज के दौर के सिंगर्स के लिए वह एक केस स्टडी हैं कि कैसे संगीत के बदलते व्याकरण के बीच अपनी मौलिकता बनाए रखते हुए ‘ट्रेंडी’ रहा जा सकता है। वह भारतीय संगीत की वह ‘आशा’ हैं, जिसकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती।

 

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