ज्योतिर्मठ में महर्षि अरविन्द की 153वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई

ज्योतिर्मठ, 20 अगस्त (कपरूवाण)। धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ज्योतिर्मठ में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, महायोगी, कवि, आधुनिक ऋषि और ‘सारा जीवन ही योग है’ का उद्घोष करने वाले आध्यात्मिक गुरु महर्षि श्रीअरविन्द की 153वीं जयंती पर्व पर भव्य आयोजन हुआ।
श्रीअरविन्द अध्ययन केंद्र के तत्वावधान में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने कहा कि “श्रीअरविन्द भारत बोध के नायक हैं। वे भारतीय संस्कृति, समाज और ऋषि परंपरा को आत्मसात करने का स्वर्णिम सोपान हैं।”
महर्षि और श्रीमाँ के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद उन्होंने कहा कि हिमालय में महर्षि का संदेश विशेषकर युवाओं तक पहुँचना चाहिए ताकि वे आधुनिकता की आंधी में अपनी जड़ों से कट न जाएँ।
राजकीय महाविद्यालय जोशीमठ की प्राचार्य प्रो. प्रीति कुमारी ने कहा कि 1892 में आईसीएस की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद श्रीअरविन्द ने औपनिवेशिक शासन की नौकरी त्यागकर राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता संग्राम का कठिन मार्ग चुना, जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
स्वामी समृद्ध पुरी महाराज ने कहा कि श्रीअरविन्द के नाम के साथ जुड़ा ‘महर्षि’ विशेषण ही उनकी महानता को सिद्ध करता है।
प्रधानाचार्य शंभू प्रसाद चमोला ने कहा कि अपने चिंतन और लेखन से उन्होंने उस समय देशभक्ति का ज्वार उत्पन्न किया जब स्वतंत्रता की मशाल मंद पड़ रही थी।
पूर्व ईओ भगवती प्रसाद कपरूवाण ने कहा कि श्रीअरविन्द के जीवन सूत्र राजनीति, समाज, शिक्षा और प्रशासन सभी क्षेत्रों में मार्गदर्शन कर सकते हैं, बशर्ते लोग उनके विचारों का गंभीर अध्ययन करें।
श्रीअरविन्द अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष एवं कवि अरविन्द पंत ने कहा कि धीरे-धीरे ही सही, किंतु वसंत की तरह श्रीअरविन्द के विचारों की सुवास जनमानस तक पहुँच रही है।
केंद्र के संस्थापक सदस्य डॉ. चरणसिंह केदारखंडी ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में महर्षि श्रीअरविन्द का योगदान’ विषय पर बीज व्याख्यान देते हुए कहा कि योग, अध्यात्म, राष्ट्रबोध और मानव एकता पर उनके विचार नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने ‘वेद रहस्य’, ‘गीता प्रबंध’, ‘ईश उपनिषद’, ‘सावित्री’, ‘बंदे मातरम्’ और ‘योग के पत्र’ से उद्धरण प्रस्तुत कर समझाया कि श्रीअरविन्द को पढ़कर न केवल “भारत क्या है” का बोध होता है बल्कि यह भी दिशा मिलती है कि “भारत क्या हो सकता है।”
कार्यक्रम का संचालन केंद्र के कोषाध्यक्ष प्रकाश चंद पंवार और युवा समन्वयक कैलाश भट्ट ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर श्रीअरविन्द जन्मोत्सव 2025 की भाषण, निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
भाषण प्रतियोगिता :
प्रथम – अंशिका रौतेला (जे.पी. विद्या मंदिर, विष्णुपुरम)
द्वितीय – ऋषभ राणा (सरस्वती विद्या मंदिर, ज्योतिर्मठ)
तृतीय – सिद्धिका (केन्द्रीय विद्यालय, सुनील) व प्रतिष्ठा चौहान (जे.पी. विद्या मंदिर) संयुक्त रूप से
सांत्वना – कविता पंखोली (ज्योति विद्यालय)
निबंध प्रतियोगिता :
प्रथम – मानस सती (जे.पी. विद्या मंदिर, विष्णुपुरम)
द्वितीय – मयंक कुँवर (ज्योति विद्यालय)
तृतीय – आयुषी पांडे (ज्योति विद्यालय)
सांत्वना – अंशिका (जे.पी. विद्या मंदिर)
चित्रकला प्रतियोगिता (जूनियर वर्ग) :
प्रथम – भूमिका (सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज)
द्वितीय – सार्थक नेगी (जे.पी. विद्या मंदिर)
तृतीय – आयुषी नौटियाल (ज्योति विद्यालय)
सांत्वना – आराध्या (जे.पी. विद्या मंदिर)
अन्य सभी प्रतिभागियों को भी मेडल और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
महावीर सिंह फर्स्वाण ‘श्रद्धालु’, केंद्र के उपाध्यक्ष ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
ज्योतिर्मठ के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भगत सिंह राणा ‘हिमाद’ ने श्रीअरविन्द पर आधारित अपनी कविता का सस्वर पाठ कर वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।
इस अवसर पर संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य दर्वेश्वर थपलियाल, डॉ. राजेन्द्र सिंह, शिक्षिका कमला भट्ट, अनीता सती, विजया ध्यानी, ममता भट्ट, शिवांगी ध्यानी, सुलेखा चौहान, बीकेटीसी कर्मचारी संघ अध्यक्ष बिजेंद्र बिष्ट, गोपीचंद्र उनियाल सहित नगर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
