पुस्तक समीक्षा: उत्तराखण्ड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास
Authored by veteran journalist Jai Singh Rawat, this comprehensive work chronicles Uttarakhand’s evolution from its 2000 formation to its 2025 silver jubilee. Spanning five detailed sections, it navigates the state’s historical struggles, the intensity of the statehood movement, and the complex political-economic landscape post-formation. Rawat offers a fearless analysis of leadership shifts, migration crises, and administrative scandals while celebrating developmental milestones. It is an essential, research-driven resource for understanding Uttarakhand’s past, present, and future.

समीक्षक: रियर एडमिरल (से नि )ओम प्रकाश सिंह राणा, एवीएसएम, वीएसएम
नवेम्बर 2025 में उत्तराखण्ड ने अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण किए हैं। इस रजत जयंती अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार श्री जय सिंह रावत द्वारा रचित “उत्तराखण्ड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” प्रदेश के संघर्ष, विकास और भविष्य की चुनौतियों का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ बनकर उभरी है। 22 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा विमोचित यह कृति केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के मानस का दर्पण है।
लेखक का परिचय और दृष्टिकोण

हिमालयी सरोकारों, संस्कृति और पत्रकारिता के विशेषज्ञ श्री जय सिंह रावत की यह नवीं पुस्तक है। नेशनल बुक ट्रस्ट से पूर्व में प्रकाशित उनकी कृतियों की तरह ही, इस पुस्तक में भी गहन शोध और निष्पक्षता का समावेश है। लेखक ने वर्ष 2000 से पूर्व की जटिल परिस्थितियों से लेकर वर्तमान तक की विकास यात्रा का अत्यंत साहसपूर्ण विवरण प्रस्तुत किया है।
पुस्तक की संरचना: पाँच अध्यायों में सिमटा इतिहास
लेखक ने संपूर्ण विषयवस्तु को पाँच तार्किक भागों में विभाजित किया है, जो पाठक को समय की धारा के साथ बहा ले जाते हैं:
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प्रथम एवं द्वितीय भाग (नींव और संघर्ष): यहाँ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, टिहरी रियासत का विलय, ब्रिटिश एवं गोरखा शासन से लेकर पृथक राज्य आंदोलन की उस ज्वाला का वर्णन है, जिसमें खटीमा और मसूरी जैसे बलिदान शामिल हैं। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख इसे विधिक रूप से भी समृद्ध बनाता है।
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तृतीय भाग (संसद से सड़क तक): यह खंड राज्य गठन की प्रशासनिक और विधायी प्रक्रिया पर केंद्रित है। लाल किले की प्राचीर से हुई घोषणा और संसद में हुई बहसों का विवरण ऐतिहासिक महत्व रखता है।
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चतुर्थ एवं पंचम भाग (विकास और चुनौतियाँ): यह पुस्तक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें वर्ष 2000 से 2025 तक के राजनीतिक उतार-चढ़ाव, नेतृत्व परिवर्तन, गैरसैंण राजधानी का प्रश्न, पलायन की त्रासदी और एनएच-74 जैसे घोटालों का निर्भीक विश्लेषण है। लेखक ने कोविड काल की अव्यवस्थाओं और वर्तमान सरकार के नए प्रयोगों को भी समान स्थान दिया है।
विशिष्टता: बेबाक विश्लेषण और प्रामाणिकता
इस पुस्तक की सबसे बड़ी शक्ति इसकी निष्पक्षता है। लेखक ने जहाँ विकास की योजनाओं की सराहना की है, वहीं लोकायुक्त की अनुपस्थिति, शराब पर टिकी राजस्व नीति, भू-कानून की आवश्यकता और बढ़ते कर्ज जैसे संवेदनशील मुद्दों पर तीखे सवाल भी उठाए हैं।
“यह पुस्तक राज्य के भूत, वर्तमान और भविष्य के संपूर्ण ‘इको-सिस्टम’ को एक ही छत के नीचे ले आती है।”
संग्रहणीय तत्व
पुस्तक में सम्मिलित दुर्लभ चित्र और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज इसे एक संदर्भ ग्रंथ (Reference Book) की श्रेणी में खड़ा करते हैं। यह शोधार्थियों, राजनीतिज्ञों और नीति निर्धारकों के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है।
अनुशंसा
“उत्तराखण्ड राज्य का नवीन राजनीतिक इतिहास” केवल सूचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक उत्तराखण्डवासी को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। यह पुस्तक हमें बताती है कि हमने क्या पाया और हम अपनी जन-आकांक्षाओं से कहाँ चूक गए।
मैं श्री जय सिंह रावत को इस शोधपरक और जनहितकारी कृति के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। प्रत्येक जागरूक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए, यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
प्रकाशकः उत्तराखण्ड हिमालय
वितरक: धाद प्रकाशन
लेखक: जयसिंह रावत
मूल्य: मात्र 550.00 रुपये
mobile- 9412324999
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