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मुख्यमंत्री घोषणाओं की समीक्षा, योजनाएं समय पर पूरी करने के निर्देश

देहरादून, 16 मार्च। मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय सभागार में मुख्यमंत्री घोषणाओं तथा मुख्यमंत्री की 10-10 कार्य आधारित घोषणाओं के अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे कार्यों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया और अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत योजनाओं और परियोजनाओं पर तेजी से कार्रवाई करते हुए उन्हें तय समयसीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी योजना अथवा परियोजना को किसी कारणवश पूरा करना संभव नहीं है और उसे समाप्त किया जाना है तो उसका प्रस्ताव 15 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री घोषणा प्रकोष्ठ को भेजा जाए। निर्धारित समय में प्रस्ताव न मिलने की स्थिति में यह माना जाएगा कि संबंधित विभाग उस परियोजना को पूरा करने के लिए उत्तरदायी होगा।
बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि जिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है, उन मामलों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायकों और जिलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थिति स्पष्ट की जाए। इसी प्रकार अंतर-विभागीय समन्वय से जुड़े मामलों को भी आपसी तालमेल से शीघ्र सुलझाने के निर्देश दिए गए, ताकि परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिन योजनाओं के लिए भूमि और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकती हैं, उन पर तत्काल कार्य शुरू किया जाए। वहीं जो परियोजनाएं व्यवहारिक नहीं हैं, उनके विलोपन का प्रस्ताव समय से प्रस्तुत किया जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री की 10-10 कार्य आधारित घोषणाओं के अंतर्गत आने वाले कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग को निर्देशित करते हुए उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण तथा अन्य निर्माण कार्यों से संबंधित जिन योजनाओं को शीघ्र शुरू किया जा सकता है, उनके लिए तुरंत शासनादेश जारी किए जाएं। वहीं जो कार्य व्यवहारिक नहीं हैं, उनके विलोपन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए।
पेयजल योजनाओं के संबंध में उन्होंने निर्देश दिया कि अगले 20 दिनों के भीतर यह स्पष्ट कर लिया जाए कि कौन-कौन से कार्य क्रियान्वित किए जा सकते हैं और किन योजनाओं को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। जिन मामलों में साइट सिलेक्शन कमेटी की रिपोर्ट आवश्यक है, वहां उसे जल्द से जल्द संलग्न करने के निर्देश भी दिए गए।
विद्यालय शिक्षा विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए जहां सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है, वहां नियमों के अनुसार निजी या वन भूमि के विकल्पों की संभावनाएं भी तलाश की जाएं।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि जिन जिलों में राज्य संपत्ति विभाग या लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए गेस्ट हाउस निर्माण के प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किए जाएं। जिन परियोजनाओं का काम केवल नामकरण तय न होने के कारण लंबित है, उनमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विभागों और जिला प्रशासन से समन्वय कर शीघ्र निर्णय लिया जाए। आवश्यकता पड़ने पर नामकरण में संशोधन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जाए।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव सचिन कुर्वे, रविनाथ रामन, चंद्रेश कुमार यादव, एस.एन. पांडेय, वी. षणमुगम, एस.ए. अदांकी, विनोद कुमार सुमन, युगल किशोर पंत, डॉ. आर. राजेश कुमार, रणवीर सिंह, अहमद इकबाल, मुख्य वन संरक्षक रंजन मिश्र सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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