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टीएमयू में एनडीएलआई की इन्नोवेटिव लर्निंग प्रैक्टिसेज़ पर ऑनलाइन वर्कशॉप

 

तीर्थकर महावीर यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी के नॉलेज रिसोर्स सेंटर और
आईआईसी की ओर से ऑनलाइन कार्यशाला में एनडीएलआई क्लब, आईआईटी
खड़गपुर के वरिष्ठ प्रबन्धक श्री पार्थसेन गुप्ता ने की शिरकत

 

मुरादाबाद,  2 नवंबर  । एनडीएलआई क्लब, आईआईटी खड़गपुर के वरिष्ठ प्रबन्धक श्री पार्थसेन गुप्ता ने कहा, भारतीय नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इण्डिया शिक्षण संसाधनों का एक आभासी भण्डार है। इसमें विभिन्न विषयों पर अलग-अलग शैक्षिक स्तर की लगभग 40 भाषाओं में करीब 11 करोड़ की शिक्षण सामग्री एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इस सामग्री को कोई भी किसी भी स्थान से प्रयोग कर सकता हैै, जिसमें प्रतिदिन शिक्षण सामग्री का अपडेट होती रहती है। श्री गुप्ता ने एनडीएलआई के उद्देश्य, भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने एनडीएलआई के विभिन्न प्रारूपों का विस्तृत और सजीव उदाहरण देते हुए, विभिन्न पाठ्यक्रमों के विषय, पाठ और संबन्धित शब्दावली खोजना, एनडीएलआई क्लब का बनाना और उसमें किसी कार्यक्रम को पंजीकृत करने के बार में विस्तार से चर्चा की। संस्था को एनडीएलआई में पंजीकृत करने के सभी बिन्दुओं पर उदाहरण के साथ चर्चा की।

 

श्री पार्थसेन तीर्थकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की सेंट्रल लाइब्रेरी के नॉलेज रिसोर्स सेंटर और आईआईसी के संयुक्त तत्वाधान में द नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया क्लबः ए गेटवे टू इन्नोवेटिव लर्निंग प्रैक्टिसेज़ पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि ऑनलाइन बोल रहे थे। संचालन टीएमयू की मुख्य पुस्तकालयाध्यक्षा डॉ. विनीता जैन ने किया। वर्कशॉप में सीसीएसआईटी से डॉ रूपल गुुप्ता, एग्रीकल्चर कॉलेज से डॉ कुसुम फासवान,लॉ कॉलेज से डॉ. डॉलचन्द औंर नर्सिंग कॉलेज से प्रोफंेसर जितेन्द्र शेखावत के संग-संग यूनिवर्सिटी के दीगर कॉलेजों से चार-चार स्टुडेंट्स ने वर्चुअली भाग लिया। वर्कशॉप में लाइब्रेरी की ओर से उप पुस्तकालयध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, डॉ. आलोक कुमार गुप्ता, श्री महेश सिंह, श्री पंकज कुमार आदि भी शामिल रहे।

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डीएम चमोली ने बद्रीनाथ में मास्टर प्लान के कार्यों का किया निरीक्षण

बद्रीनाथ /ज्योतिर्मठ, 01नवंबर (कपरूवाण) । जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत संचालित कार्यो का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों व कार्यदायी संस्थाओं को संचालित निर्माण कार्यो में तेजी लाने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया कि रिवरफ्रंट के कार्यो में तेजी लाए। तीर्थ पुरोहित आवास निर्माण कार्यो को इसी वर्ष पूर्ण किया जाए। मास्टर प्लान के अंतर्गत जितने भी कार्य अभी तक पूर्ण कर लिए गए है, उनको तत्काल हैंडओवर किया जाए। सिविक एमिनिटी सेंटर और टीआईसी निर्माण कार्यो को जल्द से जल्द पूर्ण करें।

जिलाधिकारी ने बदरीनाथ नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी को मास्टर प्लान के तहत स्थापित स्ट्रीट लाइट एवं अन्य विद्युत व्यवस्था पर होने वाले व्यय भार का आंकलन प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, हास्पिटल एक्सटेंशन, सिविक एमीनिटी सेंटर, एराइवल प्लाजा, लूप रोड, मंदिर सौन्दर्यीकरण, शेषनेत्र व बदरीश झील आदि निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। पीआईयू के अधिकारियों ने मास्टर प्लान के तहत संचालित कार्यो की प्रगति के बारे में जानकारी दी।
निरीक्षण के दौरान नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित सहित पीआईयू और तहसील प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे।

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केदारनाथ उप चुनाव के लिए कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की सूचि जारी 

देहरादून,  नवंबर। उत्तराखंड  कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा की संस्तुति पर प्रदेश कांग्रेस  प्रभारी कुमारी शैलजा द्वारा केदारनाथ के उपचुनाव को मद्येनजर रखते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी के 40 वरिष्ठ नेतागणों को स्टार प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्रदेश कांग्रेस कमेेटी के उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि सभी स्टार प्रचारक शीघ्रताशीघ्र अपना कार्यक्रम बनाकर पार्टी प्रत्याशी को बिजय बनाने में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेंगे ।

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गंगोत्री के कपाट 2 नवंबर को  और यमुनोत्री के कपाट रविवार 3 नवंबर को बन्द होंगे

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उत्तरकाशी, 01 नवंबर। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा का वर्तमान सत्र अब संपन्न होने जा रहा है। परंपरानुसार गंगोत्री मंदिर के कपाट शनिवार 2 नवंबर को  और यमुनोत्री मंदिर के कपाट रविवार 3 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इन दोनों धामों में  दीपोत्सव के आयोजन के साथ ही कपाट बंद करने से पूर्व की विशेष पूजा-अर्चनाओं का क्रम जारी है।

धार्मिक परम्परानुसार  अन्नकूट पर्व पर 2 नवनम्बर को गंगोत्री मंदिर के कपाट अपराह्न 12:14 मिनट पर बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने पर गंगोत्री धाम से गंगा जी की उत्सव मूर्ति को डोली में बिठाकर मुखवा गाँव लाया जायेगा। जहाँ गंगा जी की उत्सव प्रतिमा गंगा मंदिर में शीतकाल में विराजमान रहेंगी। श्रद्धालुजन शीतकाल में मुखवा के गंगा मंदिर में दर्शन-पूजन कर सकेंगे।

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यमुनोत्री मंदिर के कपाट भी  3 नवंबर को भैयादूज के पर्व पर अपराह्न 12:05 बजे बंद किए जाएंगे। शीतकाल में  यमुना जी की उत्सव मूर्ति खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर में विराजमान रहेंगी। जहां पर शीतकाल के दौरान श्रद्धालुजन यमुना जी के दर्शन व पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

गंगोत्री मंदिर समिति और यमुनोत्री मंदिर समिति द्वारा कपाटबंदी को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर में  विशैष सजावट करने के साथ ही मुखवा और खरसाली स्थित मंदिरों को भी सजाया-संवारा गया है।  प्रशासन और पुलिस विभाग के द्वारा भी कपाटबंदी को लेकर सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित कर लिए गए हैं।

इस यात्राकाल में आज सांय तक जिले में अवस्थित इन दोनों धामों में 1521752 तीर्थयात्रियों का आगमन हुआ है। जिनमे से यमुनोत्री धाम में आने वाले 710210 और गंगोत्री धाम में आने वाले 811542 तीर्थयात्री शामिल हैं। आज यमुनोत्री धाम में 1510 और गंगोत्री धाम में 1726 श्रद्धालुजन पहुँचे।

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रायगढ़ दुर्ग : मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्‍थापित राजधानी

  • रायगढ़ दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर स्‍थल के लिए “भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य” शीर्षक के तहत नामित 12 किलों में से एक है
  • इन 12 नामित किलों में से रायगढ़ मराठा वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है
  •  और पहाड़ी पर स्थित यह दुर्ग राजधानी का बेहतरीन प्रतीक है
  • गुजरात के केवड़िया में इस वर्ष के राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह की पृष्ठभूमि की थीम रायगढ़ दुर्ग है
  • छत्रपति शिवाजी महाराज के असाधारण पराक्रमवीरतापूर्ण कार्यों और नवोन्‍मेषी युद्ध तकनीकों की कहानियां प्रदर्शित करने के लिए केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड स्थल पर रायगढ़ दुर्ग की प्रतिकृति बनाई गई है
  • ब्रिटिश इतिहासकार ग्रांट डफ ने रायगढ़ और जिब्राल्टर की चट्टान के बीच समानताएं दर्शाते हुए रायगढ़ को पूर्व का जिब्राल्टर करार दिया

 

-दुर्गराज रायगढ़-

महाराष्ट्र की घाटियों के ऊपर अवस्थित रायगढ़ दुर्ग अपने भीतर छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल की प्रतिध्‍वनियां समेटे हुए है। कभी उनके समृद्ध मराठा साम्राज्य की राजधानी रहा यह पहाड़ी दुर्ग अपने भीतर शौर्य, नवाचार और वीरता की अनंत गाथाएं संजोए हुए है। रायगढ़ का कंकड़-कंकड़ शिवाजी महाराज के अदम्‍य साहस और दूरदर्शी रणनीति को प्रतिध्‍वनित करता है, जिनके नेतृत्व ने इस दुर्ग को शक्ति का प्रतीक बना दिया। आज भी यह दुर्ग पीढ़ियों को इस साम्राज्य के इतिहास को आकार देने वाले असाधारण कार्यों की याद दिलाते हुए प्रेरित करना बदस्‍तूर जारी रखे हुए है।

 

“सभासद बखर” (प्राचीन पत्र) दर्शाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने रायगढ़ दुर्ग का चयन मराठा साम्राज्य की राजधानी के रूप में किस प्रकार किया। इसमें उल्लेख किया गया है, “छत्रपति शिवाजी महाराज ने पहाड़ी या रायरी के सामर्थ्‍य का अवलोकन किया, जिसमें खड़ी ढलान है और यह इस क्षेत्र के सभी पर्वतों और पहाड़ियों में सबसे ऊंचाई पर है । इस चट्टान की बेजोड़ और अखंड प्रकृति उसका अपार सामर्थ्‍य है। दौलताबाद का किला भी अच्छा दुर्ग है, हालांकि, यह रायगढ़ जितना अच्छा नहीं है, क्योंकि यह ज्‍यादा ऊंचा और बेहतर है, इसलिए यह राजधानी और राजा के लिए सिंहासन के रूप में सबसे उपयुक्त है।”

काल और गांधारी नदियों की घाटियों से घिरा रायगढ़, आस-पास की पहाड़ियों से जुड़े बिना एक अलग-थलग पर्वतमाला के रूप में खड़ा है। इसकी अभेद्य प्रकृति, खड़ी चट्टानों और 1500-फुट ऊंची ढलानों जैसी प्राकृतिक भौगोलिक विशेषताओं की बदौलत है, जिसे नवोन्‍मेषी सैन्य रक्षा रणनीतियां बल प्रदान करती हैं।

मराठा काल के ब्रिटिश इतिहासकार ग्रांट डफ ने रायगढ़ और जिब्राल्टर की चट्टान के बीच समानताएं बताई हैं। उन्होंने रायगढ़ को पूर्व का जिब्राल्टर तक कह दिया है।

रायगढ़ दुर्ग यूनेस्को विश्व धरोहर स्‍थल के लिए “भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य” शीर्षक के तहत नामित 12 किलों में से एक है। इन 12 नामित किलों में से रायगढ़ मराठा वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है और पहाड़ी पर स्थित यह दुर्ग राजधानी का बेहतरीन प्रतीक है, जो दुर्ग के भीतर की संरचनाओं की सबसे विकसित टाइपोलॉजी के साथ पहाड़ी की भौगोलिक स्थिति के साथ बखूबी एकीकृत है।

गुजरात के केवड़िया में इस वर्ष राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह की पृष्ठभूमि की थीम रायगढ़ दुर्ग है। छत्रपति शिवाजी महाराज के असाधारण शौर्य, वीरतापूर्ण कार्यों और नवोन्‍मेषी युद्ध तकनीकों की गाथाएं प्रदर्शित करने के लिए केवड़िया में राष्ट्रीय एकता दिवस परेड स्थल पर रायगढ़ दुर्ग की प्रतिकृति बनाई गई है

रायगढ़ दुर्ग का इतिहास

मराठा सेना ने 1653 ई. में मोरे को हराकर रायगढ़ (तब रायरी के नाम से विख्‍यात) पर अधिपत्‍य जमा लिया था। इस दुर्ग को राजधानी योग्य बनाने के लिए शिवाजी महाराज ने दुर्ग के पुनर्निर्माण का जिम्‍मा हिरोजी इंदुलकर को सौंपा। इसके बाद, 6 जून, 1674 ई. को रायगढ़ चौकी पर शिवाजी महाराज का भव्य राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया गया, जिसके दौरान उन्‍होंने “छत्रपति” की उपाधि प्राप्‍त की। यह दुर्ग छत्रपति शिवाजी महाराज की दूसरी राजधानी के रूप में रहा और इसने मराठा साम्राज्य के प्रशासन और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

रायगढ़ दुर्ग महाराष्ट्र के गौरवशाली अतीत की मौन यादगार है और इसे दुर्गराज (किलों का राजा) कहा जाता है। इसके विभिन्न स्थलों ने इसे ‘शिव तीर्थ’ की श्रद्धा प्रदान की है। यह दुर्ग शिवभक्तों के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल का दर्जा प्राप्त कर चुका है, क्योंकि हजारों लोग केवल इसके धरोहर स्‍थल होने और रक्षा की दृष्टि से  स्‍थापत्‍य का उत्‍तम नमूना होने की वजह से ही इस दुर्ग में नहीं आते, बल्कि वीरता, शौर्य, प्रशासनिक कौशल, परोपकार और देशभक्ति के लिए विख्‍यात अपने आदर्श छत्रपति शिवाजी महाराज का स्‍थान होने के कारण इस दुर्ग की ओर खिंचे चले आते हैं। शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की वर्षगांठ ईसाई और हिंदू कैलेंडर के आधार पर बहुत उत्साह के साथ मनाई जाती है, जिसमें महाराष्ट्र के कोने-कोने से आने वाले लोगों की भारी भीड़ जुटती है। इसी प्रकार, शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि भी बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है।

शिवाजी महाराज ने सत्रहवीं शताब्दी (1674 ई.) में इस स्‍थान पर अपनी राजधानी स्थापित की थी। शिवाजी महाराज ने यह दुर्ग चंद्रराव मोरे से 1656 ई. में छीना था। व्‍यापक आकलन के बाद और इसकी रणनीतिक स्थिति और दुर्गमता को देखते हुए इसे हिंदवी स्वराज की राजधानी के लिए सबसे उपयुक्त माना गया। इस पहाड़ी की चोटी पर केवल पहाड़ी के एक तरफ से ही पहुंचा जा सकता है। शिवाजी महाराज ने 1680 ई. में अपनी मृत्यु होने तक छह साल तक रायगढ़ दुर्ग से हिंदवी स्वराज पर शासन किया था। रायगढ़ दुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि है।

रायगढ़ दुर्ग शानदार ढंग से डिजाइन किए गए अपने द्वारों, दुर्ग की दीवारों और भव्य स्मारकों के लिए उल्लेखनीय है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि शिवाजी महाराज की समाधि , नक्कारखाना, शिरकाई देवी मंदिर, भगवान शिव को समर्पित मंदिर -जगदीश्वर मंदिर के अतिरिक्‍त दुर्ग के भीतर स्थित अधिकांश संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण अवस्‍था में हैं, जिनमें राजसदर, शाही परिसर, रनिवास, बाजारपेठ, मनोर, वडेश्वर मंदिर, खूबलढ़ा बुरुज, मशीद मोर्चा, नाणे दरवाजा शामिल हैं,

शाही परिसर: शाही परिसर जिसमें रनिवास, राजसदर, नक्कारखाना, मेणा दरवाजा और पालकी दरवाजा शामिल हैं, पूरी तरह किलाबंद है और केवल तीन प्रवेश द्वारों के माध्यम से इस तक पहुंचा जा सकता है: नक्कारखाना, मेणा दरवाजा और पालकी दरवाजा। इस किलाबंद परिसर को आम तौर पर बल्ले किल्‍ला (दुर्ग) के रूप में जाना जाता है। बल्ले किल्‍ला से सटी तीन खूबसूरत मीनारे  हैं। इनमें से एक उत्तर में स्थित है, जबकि अन्य दो मीनारें किलेबंदी की दीवार के पूर्व में स्थित हैं। ये तीन मंजिला मीनारें (मनोर) बेहद अलंकृत रूप से डिजाइन की गई हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि मूल रूप से इनका उपयोग आनंद मंडप (या प्‍लैशर पेवेलियन) के रूप में किया जाता था। शौचालय में जल निकासी की उचित व्‍यवस्‍था काबिले गौर है। एक भूमिगत तहखाना (खलबत खाना) पूर्व में स्थित है, जिसका उपयोग संभवतः गुप्त बैठकों, व्यक्तिगत पूजा-अर्चना और खजाने के रूप में भी किया जाता था।

राजसदर: इस स्‍थान पर शिवाजी महाराज रोजमर्रा के मामलों के संबंध में इंसाफ करने और गणमान्य व्यक्तियों और दूतों का स्वागत करने के लिए अपना दरबार लगाते थे। यह एक आयताकार संरचना है, जिसका मुख पूर्व की ओर है। यहां तक पूर्व की ओर से एक शानदार प्रवेश द्वार के माध्यम से पहुंचा जा सकता है जिसे सामान्‍यत: नक्कारखाना के रूप में जाना जाता है। यह प्रवेश द्वार शाही सिंहासन के सामने एक शानदार तीन मंजिला संरचना है। इसकी सबसे ऊपरी मंजिल ईंटों से बनी है, वहीं इसकी निचली मंजिलें पत्थर के ब्लॉकों से बनी हैं। ऐसा माना जाता है कि नक्कारखाना में शाही बैंड बजाया जाता था। आश्चर्यजनक ध्वनिक गुणों के साथ यह वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नक्कारखाना और शाही सिंहासन के बीच की दूरी लगभग 65 मीटर है, फिर भी दोनों छोर से हल्की फुसफुसाहट भी स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है। राजसदर शिवाजी महाराज के सुख, दुख, क्रोध, जीत, प्रशासनिक कौशल और अत्यधिक उदारता का मूक गवाह है।

मुख्य मंच पर एक अष्टकोणीय मेघदंबरी (अलंकृत छत्र) है, जिस पर छत्रपति शिवाजी महाराज की बैठी हुई प्रतिमा सिंहासन के मूल स्थान पर स्‍थापित  है। यह दर्ज है कि हीरे और सोने से जड़ा शाही सिंहासन लगभग 1000 किलोग्राम वजन वाले सोने के आठ स्तंभों पर टिका हुआ था। इस पर शिवाजी महाराज का शाही प्रतीक भी अंकित था। सिंहासन के ऊपर छत्र को कीमती पत्थरों और मोतियों की मालाओं से सजाया गया था।

होलीचा माल: यह नक्कारखाना के बाहर स्थित है। यह एक विस्तृत खुला मैदान है जिसका उपयोग संभवतः वार्षिक होली उत्सव के लिए किया जाता था। होलीचा माल की पश्चिमी परिधि पर, दुर्ग की अधि‍ष्‍ठातृ देवी शिरकाई भवानी को समर्पित एक छोटा सा मंदिर है। ऐसा माना जाता है कि अधि‍ष्‍ठातृ देवी मूल रूप से होलीचा माल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक ऊंचे पत्थर के चबूतरे पर आसीन थीं, जिन्‍हें बाद में उनके वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया। होलीचा माल के उत्तर में, मजबूती से बनाई गई संरचनात्मक इकाइयों की विशाल और समानांतर पंक्ति है, जिसे आमतौर पर बाजार पेठ के रूप में जाना जाता है। इस परिसर की प्रत्येक इकाई में सामने एक बरामदा और पीछे की ओर दो कमरे हैं। चबूतरा और दीवारें सेमी-ड्रेस्‍ड बेसाल्ट पत्थर के ब्लॉक और अनगढ़े पत्थरों से निर्मित हैं, जिसमें चूने का उपयोग गारे के रूप में किया गया है।

जगदीश्वर मंदिर: इस आयताकार मंदिर का मुख पूर्व की ओर है,इसके सामने मंडप और पिछले हिस्‍से में गर्भगृह है। मंदिर में कम ऊंचाई वाले प्रवेश द्वार से दाखिल हो सकते हैं। गर्भगृह में शिवलिंग स्थित है जिसकी आज भी पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर की आंतरिक दीवारों पर कोई नक्काशी नहीं है। हालांकि, प्रस्‍तावित संरचना सुरुचिपूर्ण नक्काशीदार कोष्ठकों से मंडित है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि: मंदिर के पास,  छत्रपति शिवाजी महाराज की समाधि जगदीश्वर मंदिर के पूर्वी प्रवेश द्वार के ठीक सामने स्थित है। मूल रूप से, यह समाधि केवल कम ऊंचाई वाला एक अष्टकोणीय मंच था। लेकिन, बीसवीं सदी की शुरुआत में न केवल इस मंच की ऊंचाई बढ़ाई गई, बल्कि उसी स्थान पर एक छत्र भी बनाया गया।

पहाड़ी की तलहटी में, रायगढ़वाड़ी गांव के पास चित्त दरवाज़ा स्थित है। इसे स्थानीय रूप से जीत दरवाज़ा के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 70-80 मीटर पैदल चलने के बाद खूबलढ़ा बुरुज स्थित है। यह खूबलढ़ा बुरुज रणनीतिक रूप से स्थित है जहां से दुर्ग के करीब आने वाले किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा कर्मियों द्वारा आसानी से देखा जा सकता था।

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सोने की लगातार बढ़ती चमक

सतीश सिंह
मार्च 2019 से मार्च 2024 के दौरान सोने की कीमत में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।  मौजूदा परिदृश्य में यह दिसंबर तक 80 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकता है।  एक जनवरी 2024 को 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 63,352 रुपये थी, जो 79,710 रुपये के स्तर पर है।  सोने की कीमत में निरंतर वृद्धि होने के कारण सितंबर में वैश्विक बाजार में सोने का औसत दैनिक कारोबार 18 लाख करोड़ रुपये हो गया था, जो अप्रैल 2024 की तुलना में 13 प्रतिशत कम है, पर 2023 के औसत 13. 6 लाख करोड़ रुपये से 32. 51 प्रतिशत अधिक है।

वैश्विक आर्थिक माहौल के नरम रहने, कुछ देशों में मंदी की आशंका, लंबे समय से भू-राजनीतिक संकट कायम रहने, अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा 18 सितंबर को नीतिगत दरों में 0.50 आधार अंकों की कटौती करने आदि के कारण निवेशकों का भरोसा डॉलर पर से उठ रहा है और लोग सोने में निवेश करना बेहतर समझ रहे हैं।  भारत में लंबे समय से नीतिगत दरों में बदलाव नहीं किया गया है, जिससे बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थानों में जमा पर ब्याज दर कम है।  तो, निवेशक अधिक प्रतिफल के लिए सोने में निवेश कर रहे हैं।

कीमत बढ़ने से इसके प्रतिफल में भी तेजी आयी है।  निवेशकों को एक सप्ताह में 0. 2 प्रतिशत, एक महीने में 0. 4 प्रतिशत, 2024 में 21 प्रतिशत, एक साल में 30 प्रतिशत और तीन सालों में 62 प्रतिशत का प्रतिफल मिला है।  भारतीय मानक ब्यूरो ने 14, 18, 22, 23 और 24 कैरेट से बने आभूषणों का 2022 से हॉलमार्किंग कर रखा है।  आगामी जनवरी से केंद्र सरकार आभूषण निर्माण में इस्तेमाल होने वाली हॉलमार्किंग को अनिवार्य करने जा रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।  हॉलमार्किंग को लेकर बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।

हॉलमार्क अनिवार्य होने से आभूषणों की शुद्धता सुनिश्चित करना संभव हो सकेगा।  इससे यह भी पता चल सकेगा कि पहले और आभूषण बनने के बाद सोने की गुणवत्ता कितनी प्रभावित हुई है, जिससे निवेशकों को बेहतर प्रतिफल मिलने में मदद मिलेगी।  वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, स्विट्जरलैंड ने मई 2024 में दुनिया में सबसे अधिक 2,461 करोड़ रुपये का सोना खरीदा, जबकि चीन ने 2,109 करोड़ रुपये का।  भारत 722 करोड़ रुपये की खरीद के साथ तीसरे स्थान पर रहा।  बीते पांच वित्त वर्षों में भारत ने अपने सोने की जमा में लगभग 204 टन की बढ़ोतरी की है।  मार्च 2019 में 618. 2 टन सोना भारतीय रिजर्व बैंक में जमा था, जो 31 मार्च 2024 को 33 प्रतिशत बढ़कर 822. 1 टन हो गया।  इसमें से 408. 3 टन देश में और 413. 8 टन विदेश में जमा था।

सोने के भंडार के मामले में अमेरिका 8,133. 46 टन के साथ दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि जर्मनी 3,352. 65 टन सोना के साथ दूसरे स्थान पर।  इटली 2,451. 84 टन के साथ तीसरे स्थान पर है।  फिर फ्रांस, रूस, चीन, स्विट्जरलैंड, जापान, भारत और नीदरलैंड जैसे देशों का स्थान है, जो वैश्विक स्तर पर क्रमशः पांचवें, छठवें, सातवें, आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर हैं।  यह एक स्थापित और जगजाहिर तथ्य है कि सोने का महत्व अतुलनीय है।  यदि किसी देश की मुद्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर होती है, तो सोने का भंडार उस देश की क्रय शक्ति और आर्थिक स्थिरता को बनाये रखने में प्रमुखता से मदद करता है।

वर्ष 1991 में जब भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में थी और उसके पास आयात करने के लिए पर्याप्त मात्रा में डॉलर नहीं थे, तो भारत ने सोने को गिरवी रखकर पैसे जुटाये थे और एक गंभीर आर्थिक संकट से बाहर निकलने में सफल रहा था।  यदि किसी देश के पास पर्याप्त सोने का भंडार है, तो उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत माना जाता है।  इससे यह भी पता चलता है कि वह देश अपनी अर्थव्यवस्था प्रबंधन अच्छी तरह से कर रहा है।  दूसरे देश और वैश्विक वित्तीय संस्थान भी ऐसे देश पर ज्यादा भरोसा करते हैं।  इस तरह, सोने का भंडार किसी भी देश की मुद्रा की कीमत का समर्थन करने के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करता है।

भारत में सोने का महत्व आदिकाल से बना हुआ है और मौजूदा परिप्रेक्ष्य और आने वाले दिनों में भी इसकी मांग में कमी आने के आसार नहीं हैं।  भारतीय रिजर्व बैंक और दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा अधिक खरीद करने के कारण भी सोने की कीमत में इजाफा हुआ है।  देश में सोने की खरीद-फरोख्त और सोने की हॉलमार्किंग करने के कारण निवेशकों का सोने में निवेश करने के प्रति भरोसा बढ़ रहा है, जिसके कारण भी सोने की कीमत में वृद्धि हो रही है।  निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि सोना देश के वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में निवेशकों को आकर्षक प्रतिफल दे रहा है एवं वैश्विक स्तर पर प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्था के नरम रहने, डॉलर में कमजोरी आने, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक संकट के बने रहने, महंगाई से पूरी तरह से राहत नहीं मिलने, सोने की मांग लगातार बढ़ने आदि कारकों के कारण हाल-फिलहाल में सोने की कीमत कम नहीं होने वाली है।

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PENSION AND JOB OPPORTUNITIES FOR EX-SERVICEMEN

 

 

The Government is providing the adequate pension to the Ex-Servicemen (ESM) under One Rank One Pension (OROP) and the revision of the OROP is being carried out every five years. Further, Various Re-settlement/Skill Development Training Courses, Employment and Self-Employment Schemes are being run by the Government to provide job opportunities to the Ex-Servicemen in Government Organisations, Public Sector Undertaking, Corporate Houses, Private Sector, Central Para-Military Forces etc. based on their requisition for employment of ESM.

This information was given by Raksha Rajya Mantri Shri Sanjay Seth in a written reply to Shri Thiru D M Kathir Anand in the Lok Sabha.

The total population of ex-servicemen in the country; State/UT-wise details are given below:

Census Data of ESMs as on 31.12.2023
Sl. No. States/UTs Army Navy Air Force Total
1. Andhra Pradesh 63,574 6,665 7,673 77,912
2. Arunachal Pradesh 980 5 1 986
3. Assam 38,316 914 2,732 41,962
4. Bihar 100,849 15,746 16,931 133,526
5. Chhattisgarh 6,746 334 411 7,491
6. Goa 1,113 1,030 202 2,345
7. Gujarat 27,315 1,141 5,019 33,475
8. Haryana 154,153 9,258 12,226 175,637
9. Himachal Pradesh 121,637 4,343 2,596 128,576
10. Jharkhand 25,680 1,666 2,747 30,093
11. Karnataka 78,579 3,089 12,335 94,003
12. Kerala 143,296 14,506 23,734 181,536
13. Madhya Pradesh 53,344 1,566 2,118 57,028
14. Maharashtra 167,788 15,533 13,166 196,487
15. Manipur 8,397 150 197 8,744
16. Meghalaya 2,830 56 86 2,972
17. Mizoram 5,394 51 61 5,506
18. Nagaland 3,221 45 24 3,290
19. Odisha 40,067 4,383 7,887 52,337
20. Punjab 335,328 9,767 14,369 359,464
21. Rajasthan 193,825 8,264 7,434 209,523
22. Sikkim 1,000 63 12 1,075
23. Tamil Nadu 104,533 4,015 11,975 120,523
24. Telangana 19,455 1,532 7,213 28,200
25. Tripura 2,357 43 128 2,528
26. Uttar Pradesh 349,880 29,534 41,731 421,145
27. Uttarakhand 132,576 3,470 3,315 139,361
28. West Bengal 83,542 5,906 14,745 104,193
29. Andaman & Nicobar (UT) 803 178 100 1,081
30. Chandigarh 6,189 458 2,513 9,160
31. Delhi (UT) 46,831 5,748 10,766 63,345
32. Jammu & Kashmir (UT) 74,940 789 895 76,624
33. Leh and Ladakh (UT) 6,313 11 30 6,354
34. Pondicherry (UT) 1,864 134 471 2,469
  Total 2,402,715 150,393 225,843 2,77,8951

The Government organises the Job Fairs for Ex-Servicemen across Pan-India in collaboration with the Confederation of Indian Industry (CII) and the Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry (FICCI) and with the support of all the three Service Headquarters. It offers a direct interface between the Employer and the prospective candidate that includes on the spot skill test, interview and employment by the Corporate Sector.

Further, there is a reservation of 14.5% vacancies in Group ‘C’ and 24.5% vacancies in Group ‘D’ posts for Ex-Servicemen in Central Public Sector Undertakings (CPSUs) and Public Sector Banks. This includes 4.5 % vacancies for Disabled Ex-Servicemen & Dependents of Service personnel killed in action. However, the onus of filling up vacancies lies with recruitment agencies of respective Departments, Banks and PSUs.

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सीपीएम के सम्मेलन का दूसरा दिन,पार्टी की राजनैतिक ,सांगठनिक ,भविष्य की कार्यनीति पर चर्चा ।
सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किये ।
देहरादून 23 दिसम्बर।
सीपीएम का आठवां राज्य सम्मेलन प्रतिनिधि सत्र का उदघाटन करते हुऐ पार्टी के केन्द्रीय कमेटी सदस्य एवं राज्य प्रर्वेक्षक कामरेड बिजू कृष्णनन ने वर्तमान राजनैतिक स्थितियों का सामना करने के लिऐ पार्टी को वैचारिक समझ को बढ़ाते हुऐ जनमुद्दों उठाते हुऐअपनी पार्टी की जनपक्षीय दृष्टिकोण को जनता के मध्य लेकर जाना होगा ।उन्होंने कहा है कि हालांकि पार्टी ने उत्तराखण्ड में जल,जंगल,जमीन के मुद्दों को लेकर अनेक संघर्ष किये जिन्हें और अधिक बिस्तार एवं तेजी करने की आवश्यकता है ।उन्होंने डबल इन्जन सरकार के रहते राज्य में महिलाओं पर हिंसा, दलितों पर अत्याचार तथा अल्पसंख्यक पर हमले तेज होने पर गहरी चिन्ता प्रकट करते ,भाजपा की साम्प्रदायिक एवं विभाजनकारी नीतियों के खिलाफ व्यापक संघर्ष चलाने पर बल दिया तथा कहा उनकी पार्टी ने इन मुद्दों सतत संघर्ष किया जिसके चलते डबल इन्जन सरकार को कई बार बैकफुट आना पड़ा ।उन्होंने कहा है कि पार्टी अपने जनसंगठनों का तेजी से बिस्तार कर जनता के व्यापक हिस्से तक पहुंचना होगा।
सम्मेलन में राज्य सचिव राजेन्द्र सिंह नेगी ने पार्टी कि राजनैतिक, सांगठनिक ,कार्य रिपोर्ट तथा भविष्य की कार्ययोजना पेश कि जिसपर आज और कल प्रतिनिधि चर्चा कर पास करेंगे ।
सम्मेलन के सांगठनिक सत्र में विचार व्यक्त करते हुये पोलिट व्यूरो सदस्य पूर्व सांसद कामरेड तपनसेन ने मजबूत पार्टी के लिऐ वैचारिक स्तर बढा़ने पर जोर दिया ,उन्होंने कहा हालांकि उत्तराखण्ड पार्टी ने कई बुनियादी पर हस्तक्षेप कर जनता के व्यापक हिस्से को रिलीफ पहुंचाई किन्तु इसे पार्टी एवं जनसंगठनों के बिस्तार के लिऐ उपयोग करने कि आवश्यकता है ।उन्होंने कहा पार्टी के हस्तक्षेपों से देशव्यापी किसान ,मजदूर तथा अनेकों आन्दोलनों ने पिछले लोकसभा चुनावों बीजेपी की बढ़त पर रोक लगाई तथा उसे अन्य के सहारे सरकार चलाने के लिऐ मजबूर किया है ,किन्तु मोदी सरकार की कोरपेरेटपरस्त तथा साम्प्रदायिक नीतियां जनता की एकता लगातार कमजोर करने के षड़यंत्रकारी कार्य में लगि हुई है ।जिसके खिलाफ निरन्तर संघर्ष करने कि आवश्यकता ,क्योंकि पूंजीवाद वर्तमान में घोर संकट के दौर में गुजर रहा है परिणामस्वरूप वह सत्ता के माध्यम से हरेक हथकण्डों को अपना रहा है ।उन्होने आशा व्यक्त कि कि सम्मेलन निश्चित तौर पर पिछली कमियों को दूर कर बृहद पार्टी के निर्माण कि ओर आगे बढ़ेगा ।

सम्मेलन ने साम्प्रदायिकता के खिलाफ ,श्रम कानूनों में बदलाव के विरोध में, महिलाओं के मुद्दों पर प्रस्ताव ,दलित समाज की समस्याओं पर प्रस्ताव, नई शिक्षा नीति के खिलाफ प्रस्ताव, बेरोजगारी के खिलाफ प्रस्ताव,नीजिकरण एवं मौद्रिकरण के खिलाफ प्रस्ताव ,बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रस्ताव पारित किये गये ।सम्मेलन में पार्टी जिला कमेटी चमोली की ओर से अतिथियों एवं प्रतिनिधियों को स्मृति चिन्ह दिये गये ।सम्मेलन में छात्र नौजवानों एवं संस्कृति कर्मियों ने जनगीत प्रस्तुत किये ।
सम्मेलन कि अध्यक्षता कामरेड सुरेन्द्र सिंह सजवाण, इन्दु नौडियाल ,मोहन सिंह रावत,राजाराम सेमवाल के चार सदस्यीय अध्यक्ष मण्डल ने की । स्टियरिंग कमेटी में राजेन्द्र सिंह नेगी ,गंगाधर नौटियाल ,महेन्द्र जखमोला,राजेन्द्र पुरोहित, भूपालसिंंह रावत शामिल रहे ।
सम्मेलन सीपिआई के राज्य महामंत्री जगदीश कुलियाल ,सिपिआई एम एल के महामंत्री इन्देश मैखुरी ने शुभकामनाये दि तथा आशा व्यक्त कि सम्मेलन वाममोर्चे एकता को आगे बढाने का कार्य करेगा । सम्मेलन में सचिव द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से जिलो से आये प्रतिनिधि चर्चा कर अपने महत्वपूर्ण सुझाव देंगे ।

सम्मेलन में प्रमुख रूप से पार्टी के नेतागण शामिल हैं जिनमें भूपालसिंह रावत ,शिवप्रसाद देवली, मदन मिश्रा,राजेन्द्र नेगी, लेखराज ,नितिन मलेठा ,अनन्त आकाश ,वसीम, कमरूद्दीन,मनमोहनसिंह ,राजाराम सेमवाल ,भगवान सिंह राणा ,शम्भू ममगाई ,बिरेन्द्र गोस्वामी, हिमान्शु चौहान, माला गुरूंग, विजय भट्ट,कमलेश गौड़, हिमान्शु चौहान, नरेन्द्र रावत,युसुफ तिवारी, आर पी जोशी, एन एस पंवार, दययन्ति नेगी आदि प्रमुख थे । सम्मेलन में राज्यभर के 175 से भी पार्टी के चुने हुये प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं ।सम्मेलन दो दिन तक चर्चा कर भविष्य की कार्यनीति तय करेगी ।

सम्मेलन में जिला चमोली पौड़ी, रूद्रप्रयाग ,देहरादून ,हरिद्वार, टिहरी ,उत्तरकाशी ,चम्पावत ,अल्मोड़ा ,बागेश्वर ,पिथौरागढ़, नैनीताल तथा जनपद उधमसिंहनगर के प्रतिनिधि हिस्सेदारी कर रहे हैं ।
सम्मेलन ने कर्णप्रयाग व्यापार मण्डल का आभार व्यक्त करते हुऐ उनके सहयोग के लिऐ धन्यवाद दिया ।

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*अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंड सम्मेलन विशेष-चतुर्थ सत्र*

*कोदा झिंगोरा उगाएंगे, उत्तराखंड को आगे बढ़ाएंगे*

*कृषि मंत्री ने कहा-2027 तक प्रदेश का कृषि उत्पादन दुगना करना लक्ष्य*

अंतरराष्ट्रीय प्रवासी उत्तराखंड सम्मेलन के चतुर्थ सत्र में कृषि व ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन के दौरान एक नारा खूब लगता था-कोदा, झिंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड बनाएंगे। अब बदली हुई स्थिति में नारा बदल गया है। नया नारा है-कोदा झिंगोरा उगाएंगे, उत्तराखंड को आगे बढ़ाएंगे।

चतुर्थ सत्र में अपने संबोधन में जोशी ने कहा कि जहां तक जैविक खेती का सवाल है, आज करीब 40 फीसदी तक हमारी खेती जैविक है। इस साल हम इसे 50 फीसदी तक ले जाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पिछले चार वर्षों से हमें जैविक खेती में प्रथम पुरस्कार मिल रहा है। प्रधानमंत्री का आभार प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होेंने मिलेट्स को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि मिलेट्स के लिए उत्तराखंड में बेहद उपयोगी स्थिति मौजूद है। उन्होंने कहा कि हम कृषि क्षेत्र में नई तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। 2027 तक हम अपना उत्पादन दुगना करने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बागवानी के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, उपलब्धियों के बारे में भी विस्तार से बात की।

सचिव दीपेद्र कुमार चौधरी ने कहा कि राज्य में छह एरोमा वैली प्लांट डेवलप किए जा रहे हैं। एरोमा पार्क काशीपुर में 40 एकड़ भूमि पर इत्र से संबंधित प्रोसेस यूनिट को एक जगह पर लाने का निर्णय महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि एरोमा वैली पालिसी प्रारूप तैयार है, जिसे दो-तीन महीने में अनुमोदन प्राप्त हो सकता है। उन्होेंने बताया कि कीवी के उत्पादन को मिशन मोड में लेकर कार्य किया जाएगा।

*काश्तकारों ने बताई सफलता की कहानी*

काश्तकार बलबीर सिंह कांबोज ने बताया कि वह 18 एकड़ भूमि पर फूलों की खेती करते हैं। यहां की जलवायु अच्छी है। इस व्यवसाय के लिए सारी स्थितियां अनुकूल हैं। उन्होंन कहा कि प्लास्टिक के फूलों को सीमित करना चाहिए। प्राइवेट कंपनी चला रहे चंद्रमणि कुमार ने बताया कि उनकी कंपनी ने 18 राज्यों में 40 हाइड्रोपोनिक फार्म बनाए हैं। युगांडा में भी काम कर रहे है।

मधुमक्खी पालन व्यवसाय कर रहे अतर सिंह कैंत्यूरा ने कहा कि हमारे जंगल मधुमक्खी पालन के लिए उपयुक्त हैं। उत्तराखंड में बहुत पहले से इस संबंध में काम किया जा रहा है। जौजीकोट में देश का पहला मधुमक्खी बाॅक्स बना था।

नैनीताल की आरोही संस्था के पंकज तिवारी ने कहा कि विकास में संतुलन जरूरी है। उन्होंने मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मिश्रित खेती उत्तराखंड के लिए अच्छी है, क्योंकि पहाड़ काफी असिंचित खेती है। मृदा का स्वास्थ्य वैसा ही रखना है, जैसे हम अपने स्वास्थ्य को रखते हैं।

एक प्राइवेट कंपनी संचालित कर रहे मनमोहन भारद्वाज ने कहा कि कलस्टर मे काम किया जाना ज्यादा लाभदायी है। उन्होंने बताया कि उनके स्तर पर 200 बीघा जमीन पर काम किया गया है। चतुर्थ सत्र में मेहमानों का स्वागत ग्राम्य विकास आयुक्त अनुराधा पाॅल ने किया। सत्र का संचालन आर्गनिक बोर्ड के एमडी विनय कुमार ने किया। इस मौके पर प्रवासी उत्तराखंडियों और मेहमानों का सम्मान भी किया गया।

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रेलवे ने त्योहारी सीजन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए बढ़ाये उपाय

यदि आपको रेलवे परिसर में कोई संदिग्ध वस्तु दिखाई देती है, तो कृपया निर्दिष्ट हेल्पलाइन का उपयोग करके रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को सूचित करें। जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही है, देश भर में रोशनी, खुशी और यात्रा में भी वृद्धि हो रही है। इसे देखते हुए आरपीएफ ने लाखों यात्रियों के लिए सुरक्षित और निर्बाध ट्रेन यात्रा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय लागू किए हैं।

इस बार त्योहारों के मौसम में सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, आरपीएफ ने रेलवे नेटवर्क पर आग के खतरों को कम करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया है। रेलवे में विभिन्न हितधारकों के सहयोग के साथ, आरपीएफ के जागरूकता अभियान में छोटी पत्रिका के ज़रिए जानकारी साझा करना, आकर्षक पोस्टर लगाना, आकर्षक नुक्कड़ नाटक (नुक्कड़ नाटक) करना और सार्वजनिक घोषणाएं प्रसारित करना शामिल है। सभी यात्रियों तक पहुंचने के लिए सोशल, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी सक्रिय किया जा रहा है। किसी भी आग के जोखिम को रोकने के लिए, पोर्टेबल स्टोव (सिगड़ी) का उपयोग करने वाले विक्रेताओं और फेरीवालों की निगरानी के साथ-साथ निरंतर सामान निरीक्षण और पार्सल जांच 15 अक्टूबर 2024 से जारी है।

अब तक, इस सक्रिय अभियान के कारण 56 व्यक्तियों पर खतरनाक, ज्वलनशील वस्तुएं ले जाने के लिए रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, ट्रेनों में धूम्रपान करने के लिए 550 लोगों को दंडित किया गया है और 2,414 व्यक्तियों पर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (सीओटीपीए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आरपीएफ के महानिदेशक श्री मनोज यादव ने कहा, “दिवाली और छठ खुशी और एकजुटता के त्योहार हैं और हमारे यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा, “हम यात्रियों से सतर्क रहने और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए हमारे कर्मियों के साथ सहयोग करने का आग्रह करते हैं।”

दुर्घटनाओं और अपराधों को रोकने के मकसद से आरपीएफ ने रेल में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक व्यापक सुरक्षा सलाह जारी की है-

  • ट्रेनों या स्टेशनों पर किसी भी पटाखे, ज्वलनशील वस्तु या संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तुरंत आरपीएफ/जीआरपी कर्मियों या रेलवे अधिकारियों को दें।
  • अपने क़ीमती सामान को अपने पास और निगरानी में रखें।
  • कम सामान के साथ यात्रा करें और अतिरिक्त सुरक्षा के लिए डिजिटल भुगतान चुनें।
  • सुनिश्चित करें कि बच्चों के साथ हमेशा वयस्क रहें।
  • घोषणाओं पर ध्यान दें और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें।

सुरक्षा उपाय पूरी तरह पुख्ता

  • प्रमुख स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ाई गई
  • ट्रेनों और स्टेशनों में आरपीएफ कर्मियों द्वारा गश्त तेज की गई
  • अपराध की प्रभावी रोकथाम के लिए राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के साथ सहयोग
  • सामान और यात्रियों की नियमित जांच
  • यात्री किसी भी सुरक्षा संबंधी चिंता की रिपोर्ट रेल मदद वेब पोर्टल (https://railmadad.indianrailways.gov.in) या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से या 139 हेल्पलाइन नंबर पर डायल कर सकते हैं।
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