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बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही आज चारधाम यात्रा का हुआ समापन

बदरीनाथ धाम के कपाट विधिविधान से शीतकाल हेतु बंद, 16.52 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

प्रकाश कपरुवाण की रिपोर्ट –

बदरीनाथ/ज्योतिर्मठ, 25 नवंबर।विश्व प्रसिद्ध  बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को वैदिक मंत्रोच्चार, विधि-विधान, सेना की गढ़वाल स्काउट्स बटालियन की मधुर बैंड धुनों और “जय बदरीविशाल” के गगनभेदी उद्‌घोषों के बीच अपराह्न 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। तीव्र ठंड के बावजूद 5,000 से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र क्षण के साक्षी बने। इसके साथ ही वर्ष 2024 की चारधाम यात्रा का औपचारिक समापन हो गया। इस वर्ष 16,52,971 श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ धाम में दर्शन किए।

पूजा-अर्चना और कपाट बंद की प्रक्रिया

सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर खोलकर महाभिषेक और भोग अर्पण किया गया। श्रद्धालुओं के दर्शन अपराह्न 1 बजे तक जारी रहे। इसके उपरांत कपाट बंद करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई। लक्ष्मी माता की मूर्ति को गर्भगृह में स्थापित किया गया।

उद्धव,  कुबेर और  गरुड़ जी को गर्भगृह से बाहर लाया गया। सायंकालीन पूजा के बाद परंपरा के अनुसार कुबेर जी, बामणी गांव के लिए रात्रि प्रवास को प्रस्थान कर गए। इस अवसर पर माणा महिला मंडल द्वारा विशेष रूप से बुने गए घृत-कंबल (निर्वाण रूप) को भगवान बदरीविशाल को ओढ़ाया गया।

पांच दिवसीय प्रक्रिया का समापन

21 नवंबर : गणेश मंदिर के कपाट बंद

22 नवंबर : आदि केदारेश्वर और शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद

23 नवंबर : खड्ग-पुस्तक पूजन व वेद ऋचाओं का वाचन विराम

24 नवंबर : माता लक्ष्मी को न्योता

25 नवंबर : मुख्य मंदिर के कपाट शीतकाल हेतु बंद

पूजा-अर्चना धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल, प्रभारी धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी रविंद्र भट्ट और अमित बंदोलिया द्वारा संपन्न की गई।

चारधाम यात्रा ने बनाए नए कीर्तिमान : बीकेटीसी अध्यक्ष

कपाट बंद होने पर बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि

इस वर्ष 50 लाख से अधिक तीर्थयात्री चारधाम पहुंचे।

केवल बदरीनाथ धाम में साढ़े 16 लाख से अधिक श्रद्धालु आए।
उन्होंने बताया कि अब शीतकालीन पूजाएं शुरू होंगी और श्रद्धालुओं को पांडुकेश्वर व ज्योतिर्मठ में दर्शन के लिए आमंत्रित किया।

शीतकालीन प्रवास की व्यवस्था

बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार—

बुधवार प्रातः  उद्धव,  कुबेर , गरुड़ तथा आद्य गुरु शंकराचार्य  की गद्दी पांडुकेश्वर प्रस्थान करेगी।27 नवंबर को शंकराचार्य  की गद्दी श्री नृसिंह मंदिर, ज्योतिर्मठ के लिए प्रस्थान करेगी।

अनेक गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, दंडी स्वामी मुकुंदानंद, बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, विजय कप्रुवाण, सदस्य महेंद्र शर्मा, प्रह्लाद पुष्पवान, देवीप्रसाद देवली, डॉ. विनीत पोस्ती, नीलम पुरी, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, ईओ सुनील पुरोहित, थाना प्रभारी नवनीत भंडारी सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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