Front Page

मुख्यमंत्री धामी का उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

देहरादून, 17 जनवरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान हैं और इन्हें “लोकल से ग्लोबल” स्तर तक पहुंचाने में शेफ समुदाय की भूमिका अहम है। मुख्यमंत्री आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से आयोजित श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से युवा शेफ, होटल व पर्यटन क्षेत्र के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने सभी होटलों के मेन्यू में उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आवास सहित विभिन्न सरकारी आयोजनों में अतिथियों को प्राथमिकता से स्थानीय पारंपरिक भोजन परोसा जा रहा है, ताकि इन व्यंजनों को सम्मान और पहचान मिल सके।

कार्यक्रम के दौरान युवा शेफों ने पारंपरिक भोजन के प्रचार-प्रसार, गुणवत्ता मानकों और करियर संभावनाओं को लेकर सवाल उठाए। शेफों को एक साझा मंच पर लाने के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन विभाग को इस दिशा में समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे, जिससे राज्य के शेफ समुदाय को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजनों की शुद्धता और मानकीकरण के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता से ले रही है। व्यंजनों की प्रमाणिकता बनाए रखने और उनकी मौलिक पहचान को संरक्षित करने के लिए मानक तय किए जा रहे हैं, ताकि उत्तराखंड के स्वाद की विशिष्टता बनी रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन और कौशल विकास विभाग मिलकर युवाओं के लिए फूड स्टार्टअप, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर तैयार कर रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार की ओर बढ़ें।

श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली, पोषक और किसानों की आय बढ़ाने वाली हैं। श्रीअन्न उत्तराखंड के समग्र विकास, रोजगार सृजन और पलायन रोकने का सशक्त माध्यम बन रहा है। उन्होंने बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक है और विश्व उत्पादन में लगभग 38 प्रतिशत योगदान देता है।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शेफ समुदाय से आह्वान किया कि वे अपनी रचनात्मकता के जरिए उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने में सहभागी बनें। उन्होंने विश्वास जताया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार राज्य के पर्यटन, संस्कृति और रोजगार को नई दिशा देंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!