नाज़ुक युद्धविराम के बीच खाड़ी में तनाव बरकरार (देखें वीडियो)
होरमुज़ जलडमरूमध्य और लेबनान हमलों ने बढ़ाई अनिश्चितता
(न्यूयॉर्क टाइम्स के अपडेट पर आधारित पाठकों के लिए विशेष समाचार/फीचर)
Edited by- Usha Rawat
मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिका, ईरान और इज़राइल के बीच हुआ ताज़ा युद्धविराम अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाया है। युद्धविराम लागू होने के एक दिन बाद ही होरमुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति और लेबनान में जारी हमलों को लेकर पैदा हुई उलझन ने इस समझौते की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि तनाव के बावजूद दोनों पक्षों के पास इसे बनाए रखने के ठोस कारण भी मौजूद हैं, क्योंकि युद्धविराम का सकारात्मक असर तुरंत वैश्विक तेल और वित्तीय बाज़ारों पर देखा गया है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद
इस युद्धविराम की सबसे बड़ी परीक्षा होरमुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति को लेकर हो रही है। यह वही संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की शर्तों में इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की थी।
लेकिन ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया कि जलडमरूमध्य “पूरी तरह बंद” है और जहाजों को सुरक्षित मार्ग के लिए ईरानी नौसेना से संपर्क करने को कहा गया है। वैश्विक जहाज निगरानी कंपनी के अनुसार युद्धविराम लागू होने के बाद से कोई भी तेल टैंकर इस मार्ग से नहीं गुजरा है।
यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर गहरी नजर बनाए हुए है।

लेबनान पर हमले बने नया विवाद
युद्धविराम की व्याख्या को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा मतभेद लेबनान को लेकर सामने आया है। ईरान का कहना है कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है, जबकि अमेरिका ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
इज़राइल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बेरूत सहित विभिन्न क्षेत्रों में हुए इन हमलों में कम से कम 182 लोगों की मौत और 800 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इज़राइल पर रॉकेट हमले किए हैं और कहा है कि जब तक लेबनान पर हमले बंद नहीं होते, उनकी कार्रवाई जारी रहेगी।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
इस युद्धविराम को संभव बनाने में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पाकिस्तान का दावा है कि समझौते में लेबनान भी शामिल है, लेकिन व्हाइट हाउस ने इस बात से असहमति जताई है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जल्द ही शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान जाने वाले हैं। उनके साथ राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी मौजूद रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि अमेरिका इस समझौते को सफल बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज कर रहा है।
बाजारों में दिखा सकारात्मक असर
युद्धविराम की घोषणा का असर वैश्विक बाजारों पर तुरंत दिखाई दिया। तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई और शेयर बाजार में तेजी देखी गई।
ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 13.3 प्रतिशत गिरकर 94.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, हालांकि यह अभी भी युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक है। वहीं अमेरिका का प्रमुख शेयर सूचकांक एस एंड पी 500 लगभग 2.5 प्रतिशत बढ़ गया।
यह आर्थिक प्रतिक्रिया बताती है कि युद्धविराम केवल राजनीतिक नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
परमाणु मुद्दा बना नई चिंता
इस संघर्ष का सबसे संवेदनशील पहलू ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। अमेरिका के रक्षा मंत्री ने ईरान से लगभग 970 पाउंड उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार सौंपने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिकी कमांडो बलों को इसे जब्त करने का आदेश भी दिया जा सकता है। यह बयान इस बात का संकेत है कि युद्धविराम के बावजूद परमाणु मुद्दा अभी भी बड़ा विवाद बना रहेगा।
युद्ध का मानवीय असर
इस युद्ध ने भारी जनहानि और विनाश छोड़ा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में ईरान में कम से कम 1701 नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिनमें 254 बच्चे भी शामिल हैं।
लेबनान में इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष में 1500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। खाड़ी देशों में ईरान से जुड़े हमलों में 32 लोगों की जान गई है, जबकि इज़राइल में कम से कम 20 लोगों की मौत दर्ज की गई है।अमेरिका के भी 13 सैनिक इस संघर्ष में मारे गए हैं।
युद्धविराम के बावजूद जारी हमले
युद्धविराम के पहले 24 घंटों के दौरान कई हमलों की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों के अनुसार बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों की दर्जनों घटनाएं हुईं।
ईरान के एक द्वीप पर स्थित तेल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ, हालांकि हमलावरों की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। इन घटनाओं से साफ है कि युद्धविराम बेहद नाज़ुक स्थिति में है और किसी भी समय टूट सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
ईरान ने वार्ता के लिए 10 बिंदुओं का एक ढांचा जारी किया है, जिसे अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि ईरान की सार्वजनिक घोषणाएं और निजी वार्ताओं में कही गई बातें अलग-अलग हैं।
यह स्थिति दर्शाती है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है।
शांति की उम्मीद, पर खतरा बरकरार
मध्य पूर्व का यह युद्ध केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले चुका है। होरमुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति, लेबनान पर जारी हमले और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दे इस संघर्ष को और जटिल बना रहे हैं।
फिलहाल युद्धविराम ने दुनिया को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन घटनाक्रम बता रहे हैं कि यह शांति बेहद नाज़ुक है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहे तो यह समझौता स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम बन सकता है, लेकिन यदि मतभेद बढ़े तो मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े युद्ध की आग में झुलस सकता है।
यह स्थिति केवल मध्य पूर्व के देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शांति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
