अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने उठाए कई सवाल, एडीजी कानून-व्यवस्था को सौंपा ज्ञापन

देहरादून, 30 दिसंबर। अंकिता भंडारी हत्याकांड के विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टीकरण की मांग को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को अपर पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) वी. मुरूगेशन से मुलाकात की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एडीजी को ज्ञापन सौंपते हुए हत्याकांड से जुड़े कई बिंदुओं पर स्पष्ट स्थिति बताने की मांग की।
कांग्रेस ने ज्ञापन में कहा है कि हाल ही में भाजपा के एक पूर्व विधायक की पत्नी द्वारा सोशल मीडिया पर जारी बातचीत में कथित तौर पर “वीआईपी” का नाम सामने आने का दावा किया गया है। इसके बाद पुलिस प्रशासन द्वारा जारी स्पष्टीकरण से कई नई जिज्ञासाएं और संदेह पैदा हुए हैं। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी पर “किसी वीआईपी को विशेष सेवाएं देने” का दबाव होने का उल्लेख उसकी व्हाट्सऐप चैट में भी सामने आया था, इसलिए इस पूरे प्रकरण में तथ्यों को पारदर्शी ढंग से सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में पूछा है कि अंकिता का शव बरामद होने के अगले ही दिन रात में वनंतरा रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाने का आदेश किसने दिया और इस कार्रवाई का उद्देश्य क्या था। साथ ही यह भी पूछा कि क्या इस संबंध में एसआईटी द्वारा बयान दर्ज किए गए और जांच रिपोर्ट में इस पहलू पर क्या तथ्य सामने आए। कांग्रेस ने यह मुद्दा भी उठाया कि क्या जांच एजेंसियों ने मुख्यमंत्री द्वारा रिसॉर्ट ध्वस्तीकरण संबंधी सार्वजनिक बयान का संज्ञान लिया है।
कांग्रेस ने सीबीआई जांच पर अदालत की टिप्पणी के बाद भी सरकार द्वारा इस जांच की मांग का विरोध किए जाने पर आपत्ति जताई है। इसके साथ ही अंकिता के पिता द्वारा पटवारी स्तर पर कथित दबाव और धमकी की शिकायतों की जांच स्थिति पर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। कांग्रेस का कहना है कि आरोपियों के पक्ष में बयान दिलाने के दबाव संबंधी गंभीर आरोपों पर अब तक ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ज्ञापन में भाजपा विधायक रेनू बिष्ट की रिसॉर्ट ध्वस्तीकरण में कथित भूमिका सहित “साक्ष्यों के नष्ट होने की आशंका” पर भी जांच एजेंसियों का रुख सार्वजनिक करने की मांग की गई है। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस द्वारा बार-बार “सबूत उपलब्ध कराने” की अपील संदेह को बढ़ाती है, जबकि सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों द्वारा सबूत नष्ट किए जाने के आरोपों की पारदर्शी जांच आवश्यक है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि इस हत्याकांड से जुड़े कई प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं। उन्होंने मांग की कि एसआईटी रिपोर्ट को इन सवालों के संदर्भ में सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता वास्तविक स्थिति से अवगत हो सके और कानून-व्यवस्था पर उनका विश्वास कायम रहे।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री राजेंद्र शाह, कर्नल रामरतन नेगी, वीरेन्द्र पोखरियाल, सुरेंद्र रांगड़, अभिनव थापर, नीरज त्यागी, कमल रावत, विजय पाल रावत, डॉ. प्रतिमा सिंह, गरिमा दसौनी, राजेश चमोली, डॉ. प्रदीप जोशी, महेंद्र सिंह नेगी, मधुसूदन सुन्द्रियाल, बब्बन सती, टीटू त्यागी, विजय गुसाईं, सुलेमान अली, अनिल नेगी, राजेंद्र दानू, यशपाल चौहान सहित कई नेता शामिल रहे।
