कैंसर की जरूरी दवाओं पर कीमत नियंत्रण से मरीजों को राहत
As on 9.3.2026, ceiling prices of 131 anti-cancer drugs are effective resulting in reduction of around 21% in the ceiling prices from the ceiling prices fixed under NLEM, 2015 and annual savings of around ₹294 crore to patients. All manufacturers have to sell their products within the ceiling price (plus applicable Goods and Service Tax) fixed by NPPA. Paclitaxel Injection 30mg/5ml and 100mg/16.7ml are scheduled formulations and accordingly, NPPA has fixed its ceiling price. The present applicable ceiling price is ₹219.19 per ml effective from 01.04.2025. All manufacturers have to sell their products within the ceiling price (plus applicable Goods and Service Tax) fixed by NPPA. Instances of overcharging are dealt with as per the provisions of DPCO, 2013
केंद्र सरकार ने कहा , 131 एंटी-कैंसर दवाओं के दाम औसतन 21% तक घटे
नई दिल्ली, 13 मार्च। केंद्र सरकार के अनुसार, 9 मार्च 2026 तक 131 एंटी-कैंसर दवाओं की अधिकतम कीमतें प्रभावी हैं, जिनसे राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) 2015 के तहत तय कीमतों की तुलना में औसतन लगभग 21 प्रतिशत तक कमी आई है। इससे मरीजों को हर साल करीब 294 करोड़ रुपये की बचत हो रही है।
लोकसभा में लिखित उत्तर में रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने बताया कि दवाओं की कीमतें औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 (DPCO 2013) के प्रावधानों के तहत नियंत्रित की जाती हैं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) डीपीसीओ की अनुसूची-1 में शामिल दवाओं की अधिकतम कीमत तय करता है। यह सूची स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची पर आधारित होती है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि डीपीसीओ 2013 के मौजूदा प्रावधानों के तहत अनुसूचित दवाओं की अधिकतम कीमत बाजार के आंकड़ों के आधार पर तय की जाती है। कीमत निर्धारण के दौरान दवा की लागत और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के बीच के अंतर को आधार नहीं बनाया जाता। एक बार कीमत तय हो जाने के बाद सभी कंपनियों को अपने उत्पाद एनपीपीए द्वारा निर्धारित सीमा मूल्य तथा लागू जीएसटी के भीतर ही बेचने होते हैं।
पैक्लिटैक्सेल इंजेक्शन की कीमत भी नियंत्रित
सरकार ने बताया कि पैक्लिटैक्सेल इंजेक्शन 30 मि.ग्रा./5 मि.ली. और 100 मि.ग्रा./16.7 मि.ली. अनुसूचित फॉर्मूलेशन हैं और एनपीपीए ने इनके लिए भी सीमा मूल्य तय किया है। वर्तमान में इसकी लागू सीमा कीमत 1 अप्रैल 2025 से 219.19 रुपये प्रति मि.ली. है। इस दवा को भी सभी निर्माता निर्धारित सीमा मूल्य और लागू जीएसटी के भीतर ही बेचने के लिए बाध्य हैं। अधिक वसूली के मामलों में डीपीसीओ 2013 के तहत कार्रवाई की जाती है।
नई कैंसर दवाओं की खुदरा कीमतें भी तय
सरकार के अनुसार, एनपीपीए नई दवाओं की खुदरा कीमत भी तय करता है। 9 मार्च 2026 तक एंटी-कैंसर श्रेणी में 58 खुदरा कीमतें तय की जा चुकी हैं। इनमें 31 एंटी-कैंसर दवाएं, 26 एंटी-नियोप्लास्टिक दवाएं और एक इम्यूनो-सप्रेसिव दवा शामिल है। ये खुदरा कीमतें संबंधित आवेदक निर्माता और विपणनकर्ता पर लागू होती हैं, जिन्हें इन्हीं दरों के भीतर दवा बेचनी होती है।
गैर-अनुसूचित दवाओं पर भी निगरानी
सरकार ने कहा कि गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं के मामले में भी कंपनियां किसी दवा का एमआरपी पिछले 12 महीनों की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक नहीं बढ़ा सकतीं। इसके अलावा, 2019 में जनहित में 42 चयनित गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन सीमित किया गया था। इस फैसले से 500 से अधिक ब्रांडों की कैंसर दवाओं की कीमतों में औसतन करीब 50 प्रतिशत तक कमी आई।
गरीब मरीजों के लिए कई योजनाओं से उपचार सुलभ
सरकार ने यह भी बताया कि कैंसर उपचार को गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सुलभ बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकारी अस्पतालों में गरीबों को मुफ्त या अत्यधिक रियायती इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत कैंसर का उपचार कवर किया गया है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के माध्यम से सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनमें कैंसर की दवाएं भी शामिल हैं। वहीं कुछ अस्पतालों और संस्थानों में अमृत (AMRIT) फार्मेसी स्टोर स्थापित किए गए हैं, जहां कैंसर की दवाएं एमआरपी की तुलना में काफी कम कीमत पर मिलती हैं।
सरकार ने यह भी कहा कि कैंसर रोधी दवाओं को सस्ता बनाने के लिए इन पर लगने वाले शुल्कों का भी समय-समय पर युक्तिकरण किया जाता रहा है।
