फोरेंसिक तकनीक से मजबूत हो रही आपराधिक जांच व्यवस्था
नई दिल्ली, 18 मार्च। देश में आपराधिक जांच को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बनाने के लिए केंद्र सरकार फोरेंसिक विज्ञान और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा दे रही है। गृह मंत्रालय द्वारा पुलिस स्टेशनों में एनएफआईएस (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) लागू करने के लिए आईसीजेएस 2.0 परियोजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसके अंतर्गत फिंगरप्रिंट एनरोलमेंट डिवाइस सहित आवश्यक हार्डवेयर की खरीद के लिए धनराशि आवंटित की गई है।
सरकार के अनुसार, पुलिस स्टेशनों में एनएफआईएस का पूर्ण क्रियान्वयन राज्यों द्वारा खरीद प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा। उंगलियों के निशान अदालत में सबसे विश्वसनीय साक्ष्यों में माने जाते हैं और यह प्रणाली वास्तविक समय में उनकी पहचान और सत्यापन की सुविधा देती है। इससे अपराधियों और उनके आपराधिक इतिहास का पता लगाना आसान हो गया है।
अगस्त 2022 में शुरू हुए एनएफआईएस के माध्यम से अब तक 8,831 से अधिक संदिग्ध फिंगरप्रिंट की पहचान की जा चुकी है, जिससे कई अंतरराज्यीय और पुराने लंबित मामलों को सुलझाने में मदद मिली है। वर्तमान में इस डेटाबेस में हर महीने लगभग 90 हजार नए फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड जोड़े जा रहे हैं और कुल डेटा 1.26 करोड़ तक पहुंच चुका है। इससे जांच अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से आरोपपत्र दाखिल करने और दोषसिद्धि दर बढ़ाने में सहायता मिल रही है।
फोरेंसिक अवसंरचना का विस्तार
राष्ट्रीय फोरेंसिक अवसंरचना संवर्धन योजना (एनएफआईईएस) के तहत देश में फोरेंसिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क भी मजबूत किया जा रहा है। फिलहाल भोपाल, चंडीगढ़, दिल्ली, हैदराबाद, कामरूप, कोलकाता और पुणे में 7 केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं। इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में नई प्रयोगशालाओं की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
साइबर अपराध जांच के लिए प्रशिक्षण
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के तहत ‘साइट्रेन’ नामक ऑनलाइन प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुलिस और न्यायिक अधिकारियों को साइबर अपराध जांच, फोरेंसिक और अभियोजन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 31 जनवरी 2026 तक 1.51 लाख से अधिक अधिकारियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 1.42 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।
राष्ट्रीय फोरेंसिक डेटा केंद्र को मंजूरी
महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय फोरेंसिक डेटा केंद्र की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इस केंद्र के माध्यम से डीएनए और अन्य जैविक साक्ष्यों सहित फोरेंसिक डेटा का व्यवस्थित संग्रह और प्रबंधन किया जाएगा, जिससे साक्ष्य प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
यह जानकारी गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
