राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती पर नागनाथ पोखरी महाविद्यालय में रंगारंग कार्यक्रम

छात्रों ने प्रस्तुत किए लोकगीत, नृत्य और कविताएं – विजेताओं को किया गया सम्मानित
पोखरी, 9 नवम्बर (राणा)। उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस (रजत जयंती) समारोह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नागनाथ पोखरी में बड़ी धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नंद किशोर चमोला ने किया, जिन्होंने आरंभ में समारोह की रूपरेखा प्रस्तुत की।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे मुख्य अतिथि नगर पंचायत पोखरी के अध्यक्ष सोहनलाल, प्राचार्य डॉ. रीठा शर्मा, मुख्य शास्ता डॉ. संजीव कुमार जुयाल और सांस्कृतिक समिति के सदस्यों ने संयुक्त रूप से संपन्न किया। इस अवसर पर पुरातन छात्र प्रकोष्ठ के सदस्य, अभिभावक संघ के अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत छात्रा आँचल की गणेश वंदना से हुई। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड की लोक कला, नृत्य और गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। लक्ष्मी, सृष्टि, कशिश, विभूति, मानसी, हिमानी और दीपा सहित कई छात्राओं ने एकल और सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किए।
लोकगीतों में “बारहमासा”, “पावन मेरो उत्तराखण्ड” और “ठंडो रे ठंडो मेरा पहाड़े की हवा” जैसे गीतों ने समारोह को पूरी तरह उत्तराखंडी रंग में रंग दिया।
छात्र संघ अध्यक्ष आकाश चमोला ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि उत्तराखंड का विकास तभी संभव है जब युवा अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से विनम्रता और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने की अपील की।
पुरातन छात्र प्रकोष्ठ के सदस्य सूरज खत्री ने राज्य आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों के योगदान को नमन किया।
डॉ. संजीव कुमार जुयाल ने राज्य आंदोलन के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डालते हुए जनकवि गिर्दा की कविताओं के माध्यम से राज्य की अस्मिता और गौरव की भावना को उजागर किया।
प्राचार्य डॉ. रीठा शर्मा ने अपने संबोधन में राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन और विकास की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाने और उनकी समस्याओं के समाधान के प्रयास निरंतर जारी हैं।
मुख्य अतिथि सोहनलाल ने कहा कि युवाओं को राज्य निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने महाविद्यालय के विकास में हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
समारोह के अंत में विभिन्न प्रतियोगिताओं — निबंध लेखन, स्वरचित कविता वाचन, वाद-विवाद, पोस्टर, स्लोगन और ऐपण — के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं और स्थानीय गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
