अनूठा रहा प्रथम गांव माणा का ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’
संस्कृति, परंपरा और देशभक्ति के अद्भुत संगम की स्मृतियां लंबे समय तक रहेंगी जीवंत

–महिपाल गुसाईं-
बद्रीनाथ, 28 अक्टूबर। देश के प्रथम गाँव माणा में हाल ही में सम्पन्न हुआ दो दिवसीय “देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव” सीमांत क्षेत्र की ऊर्जा, उत्साह और जीवंतता को नए आयाम देकर गया। भारतीय सेना और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आयोजन अपनी तरह का पहला प्रयास था, जिसमें धर्म, अध्यात्म, पर्यटन, संस्कृति, श्रम, कौशल, उद्यमशीलता और विकास — सबका समन्वित प्रतिबिंब एक ही मंच पर दिखाई दिया।

शीत ऋतु की दस्तक के बावजूद स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और गणमान्य अतिथियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने पूरे क्षेत्र को उत्सवमय बना दिया। सेना की मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता और उत्तर भारत क्षेत्र के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डी.जी. मिश्रा सहित अनेक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।
इस पहल के माध्यम से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “वाइब्रेंट विलेज योजना” को जमीनी स्वरूप देने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया है। केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों का उद्देश्य यही है कि सीमांत गांवों का जीवन ठहराव से नहीं, बल्कि उल्लास, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण हो — और इस महोत्सव ने इस भावना को साकार किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महोत्सव के समापन अवसर पर बद्रीनाथ धाम पहुंचकर अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। सीमांत क्षेत्र के लोगों के साथ उनका आत्मीय संवाद और अपनत्व भरा व्यवहार आयोजन को नई ऊँचाई तक ले गया। श्री धामी ने कहा कि स्थानीय जनता, प्रशासन और भारतीय सेना के समन्वय से यह आयोजन अत्यंत सफल रहा, जिसने सीमांत पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान की है।
मुख्यमंत्री ने बदरीनाथ मास्टर प्लान के अंतर्गत निर्मित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा सहित अन्य परियोजनाओं का भी स्थलीय निरीक्षण किया। बामणी गांव की महिलाओं द्वारा शॉल भेंट किए जाने पर वे भावुक हुए और इसे “मातृशक्ति का आशीर्वाद” बताया।
“नो योर आर्मी” प्रदर्शनी भी इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। सेना द्वारा प्रदर्शित उपकरणों, मॉडल्स और सुरक्षा प्रणाली की जानकारी ने आम जनता के मन में विश्वास और गर्व का भाव भर दिया। यह प्रदर्शनी सेना और नागरिकों के बीच सहयोग का जीवंत प्रतीक बनी।
स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोकनृत्य और गीतों ने दर्शकों का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत करते हुए कहा कि “गढ़वाली लोक संस्कृति की ये झलकियाँ देवभूमि के असली गौरव को उजागर करती हैं।” स्थानीय कलाकारों और बैंड की प्रस्तुति ने भी दर्शकों की खूब सराहना पाई।
स्थानीय शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों में पारंपरिक बुनाई, लकड़ी के हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, स्थानीय व्यंजन और सांस्कृतिक धरोहर की झलक देखने को मिली। पर्यटकों ने इन उत्पादों को उत्साहपूर्वक खरीदा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल वाइब्रेंट विलेज योजना के उद्देश्यों को मजबूती प्रदान करते हुए महिलाओं और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता के नए अवसर खोलती है।
उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन विकास, रोजगार सृजन, रिवर्स पलायन और आर्थिक सशक्तिकरण का सेतु बनेगा। जब चारधाम यात्रा अपने उत्तरार्द्ध में पहुँच चुकी है और अब केवल बदरीनाथ धाम के कपाट खुले हैं, ऐसे में यह आयोजन स्वाभाविक रूप से तीर्थयात्रा के अंतिम चरण को नई ऊँचाई देता है।
सीएम धामी का प्रतिभागी महिलाओं से उनके स्टॉल पर आत्मीयता से मिलना यह दर्शाता है कि वे केवल औपचारिक नेता नहीं, बल्कि अपने जनमानस से गहराई से जुड़े हुए हैं।
वर्तमान में केवल बदरीनाथ धाम की यात्रा चल रही है और प्रतिदिन बड़ी संख्या में तीर्थयात्री तथा पर्यटक माणा गांव का भी रुख कर रहे हैं। वाइब्रेंट विलेज योजना ने इस सीमांत क्षेत्र को पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दी है।
भारतीय सेना और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव केवल सीमांत का उत्सव नहीं था, बल्कि यह जनता और सेना के बीच विश्वास, संस्कृति और विकास का साझा पर्व बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सक्रिय भागीदारी ने इसमें चार चाँद लगा दिए।
निस्संदेह, यह आयोजन आने वाले वर्षों तक सीमांत के लोगों की स्मृतियों में “अद्भुत संगम” के रूप में अंकित रहेगा।
