धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

एक हजार किलोमीटर नंगे पांव: माँ कालिंका मायाधार देवी की यादगार देवरा रथ यात्रा सम्पन्न

प्रकाश कपरुवाण की रिपोर्ट –
ज्योतिर्मठ, 22 फरवरी। भर्की गांव की माँ कालिंका मायाधार देवी की देवरा रथ यात्रा रविवार को ध्याणी भत्ता और न्यूतेर विदाई के साथ विधिवत रूप से सम्पन्न हो गई। 181 दिनों में लगभग एक हजार किलोमीटर की यह नंगे पांव पदयात्रा पंचनाम देवता चौक से होते हुए बनातोली में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची। इस अवसर पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि दूर-दराज से आई सैकड़ों ध्याणियों, तीन गांवों के न्यूतेर और हजारों श्रद्धालुओं ने देवी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
करीब 35 वर्षों बाद आयोजित इस देवरा रथ यात्रा में भर्की, भेटा, पिलखी, आरोसी और ग्वाणा गांव के युवाओं तथा महिला मंगल दलों की एकजुटता और टीम भावना विशेष रूप से देखने को मिली। माँ कालिंका मायाधार देवी 20 जुलाई 2025 को गर्भगृह से बाहर निकली थीं। इसके बाद गांव में परंपरागत धार्मिक कार्यक्रमों के निर्वहन के उपरांत देवी की डोली लगभग नौ माह तक जोशीमठ और दशोली प्रखंड के दूरस्थ गांवों व देवालयों तक पहुंची, जहां देव भेंट और ध्याणी मिलन के कार्यक्रम हुए।
देवरा रथ यात्रा के दौरान देवरी, धारी और देवताओं के पश्वाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। बीहड़ और दुर्गम मार्गों से नंगे पांव प्रतिदिन नए गांवों तक पहुंचना नई पीढ़ी के युवाओं के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन देवी के प्रति अटूट आस्था और बुजुर्गों के मार्गदर्शन से यह यात्रा बिना किसी बाधा के सम्पन्न हुई। इस दौरान 98 गांवों में 181 ध्याणियों ने ध्याणी भत्ता दिया, जबकि 435 लोगों ने सूप्पा अर्पित किया।
यात्रा के दौरान देवी की डोली जोशीमठ और दशोली के विभिन्न गांवों के साथ श्री बद्रीनाथ धाम, रुद्रनाथ, माता अनसूया देवी मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, सिद्धपीठ लाता नंदा देवी, रैणी काली, माणा घन्याल, बसुधारा, डुमक बजीर देवता, नृसिंह-नवदुर्गा मंदिर ज्योतिर्मठ, चंडिका मंदिर रविग्राम सहित मंडल घाटी, सलूड़ डुंग्रा कुंजो मैकोट, उर्गम और नीती-माणा घाटी के गांवों तक पहुंची। तय समयानुसार देवी की डोली अपने मूल गांव भर्की के पंचनाम चौक पहुंची, जहां बनातोली पहुंचने से पूर्व सभी मान्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया गया।
परंपरा के अनुसार देवरा रथ यात्रा से पहले गणेश पेत्तू रखा गया, जो गांव में सुख-समृद्धि की कामना के साथ यात्रा के संकल्प का प्रतीक है। ज्योतिष गणना के बाद निकले शुभ मुहूर्त में माँ कालिंका और मायाधार देवी गर्भगृह से बाहर निकलकर पंचनाम देवता मंदिर पहुंचीं, जहां प्राण प्रतिष्ठा के बाद रथ डोली को सुसज्जित किया गया। इसके साथ ही देवी-देवताओं के मुखौटे भी बाहर निकले और यात्रा के दौरान प्रत्येक प्रवास स्थल पर मुखौटा नृत्य हुआ।
न्यूतेर आगमन से पूर्व आयोजित ध्याणी भत्ता में लगभग 800 ध्याणी और सूप्पा देने वाले लोग विशेष रूप से शामिल हुए। इनके लिए अलग स्थान पर भोजन प्रसाद और विदाई की व्यवस्था की गई, जबकि हजारों अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी विभिन्न स्थानों पर प्रसाद की व्यवस्था रही। न्यूतेर के रूप में थैंग के जाख देवता, उर्गम के घंटाकर्ण देवता और पल्ला गांव के पल्ला पावे-भूमियाल देवता गाजे-बाजे, छड़ी-कटार और निशाण के साथ पहुंचे।
10 जुलाई 2025 से 22 फरवरी 2026 तक चली इस देवरा रथ यात्रा के सफल आयोजन में मेला समिति के अध्यक्ष हर्षबर्धन फर्शवाण, सचिव रघुबीर सिंह चौहान, कोषाध्यक्ष नंदा सिंह नेगी, उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह रावत सहित पुजारियों, आचार्यों, विभिन्न देवताओं के पश्वाओं, जागर वेताओं, धारी दल और ढोल-दमाऊ वादकों का अहम योगदान रहा। महिला मंगल दल भर्की, भेटा, पिलखी और आरोसी की महिलाओं ने भी समिति द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियों का कुशलता से निर्वहन किया।

भर्की के पूर्व प्रधान दुलब सिंह रावत सहित गांव के वरिष्ठ नागरिक, युवक और महिला मंगल दलों के प्रतिनिधि आगंतुक अतिथियों के स्वागत-सत्कार में जुटे रहे। सामाजिक संस्था जनदेश के सचिव लक्ष्मण नेगी ने जोशीमठ और दशोली के 98 गांवों द्वारा देवरा यात्रा को मिले सम्मान के लिए सभी ग्रामवासियों, ध्याणियों और भक्तजनों के प्रति मेला समिति की ओर से आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!