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Claude AI के डर से IT शेयर गिरे ?

 

BY- MILIND KHANDEKAR

शेयर बाज़ार में पिछले हफ़्ते IT कंपनियों के शेयरों की क़ीमत डेढ़ लाख करोड़ रुपये से गिर गई. इसका बड़ा कारण बनी अमरीकी AI कंपनी Anthropic. इस कंपनी में क़रीब ढाई हज़ार कर्मचारी है जबकि भारत की 5 बड़ी IT कंपनियों में 15 लाख कर्मचारी. शेयर बाज़ार में इनकी क़ीमत क़रीब 26 लाख करोड़ रुपये है. Anthropic अभी शेयर बाज़ार में लिस्ट नहीं है, फिर भी इसकी क़ीमत इन भारतीय कंपनियों के बराबर आँकी जाती रही है. इसका एक प्रोडक्ट Claude Co Work पिछले हफ़्ते दुनिया भर के बाज़ार में टेक्नोलॉजी और IT कंपनियों में गिरावट का कारण बना.

Claude Co Work क्या है?

Claude वैसा ही AI Chat bot है जैसा ChatGPT या Gemini. इसे Anthropic ने बनाया है. पिछले महीने भर में उसने Claude Code और Claude Co Work लांच किया. इसमें फर्क समझिए कि Chat bot आपके सवालों के जवाब दे सकता था. उसने कोड लिखा या कोई रिपोर्ट का सार समझाया तब भी आपको कॉपी पेस्ट करके अपने सिस्टम में लाना पड़ता था जबकि Co work आपके सिस्टम का हिस्सा है. Chat bot अगर कोई फ्री लांस करने वाला व्यक्ति है तो Co Work को आपका जूनियर कर्मचारी की तरह पेश किया जा रहा है. Co Wok में 12 तरह के Plug in हैं जो तरह-तरह के काम कर सकता है जैसे सॉफ़्टवेयर कोडिंग, लीगल, अकाउंटिंग, मार्केटिंग.

Claude Co work के कारण अमेरिका के बाज़ार में सॉफ़्टवेयर कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई ख़ासकर Software as service ( Saas) कंपनियों में . Saas को ऐसे समझें कि पहले सॉफ़्टवेयर जैसे MS office आपके कम्प्यूटर में CD से लोड होता था, अब इंटरनेट के ज़रिए कनेक्ट होता है. निवेशकों में डर बैठ गया कि Co Work इनका धंधा चौपट कर देगा. AI खुद ही सॉफ़्टवेयर बना सकता है और मेंटेनेंस भी. भारत की IT कंपनियाँ इस सीढ़ी में एक कदम नीचे है. उनका मुख्य काम दूसरी कंपनियों के सॉफ़्टवेयर मेंटेनेंस का है . भारतीय कंपनियाँ इस काम के लिए लोग लगाती है. जितने घंटे काम किया उसके हिसाब से बिल बनता है. Claude Co Work जैसे AI के कारण अब घंटों का काम मिनटों में हो सकता है. लोगों की ज़रूरत कम हो जाएगी तो इस कारण IT कंपनियों के सामने अस्तित्व का संकट है. इसे नाम दिया गया है SaaS-pocalypse या सास पॉकलिप्स.

हमने पहले भी घोड़े की चर्चा की थी. सौ साल पहले घोड़े गाड़ी चलाते थे, मोटर कार आने से घोड़े ज़िंदा तो रहे लेकिन बेकार हो गए वही बात Saas के बारे में कही जा रही है. भारतीय IT कंपनियों के साथ तो दिक़्क़त ये भी है कि उनके पास घोड़े ( सॉफ़्टवेयर) भी नहीं हैं , उनका ज़्यादातर पैसा घोड़े के अस्तबल ( सॉफ़्टवेयर मेंटेनेंस) सँभालने से बनता है तो अगर घोड़े के पास काम नहीं रहा तो अस्तबल का काम भी कम हो जाएगा.

लोग की ज़रूरत कम हो सकती है जैसे कि हमने पहले बताया था कि इस साल मात्र 17 शुद्ध भर्ती हुई है इन बड़ी कंपनियों में . संकट अब नौकरियों का नहीं बिज़नेस का है, हालाँकि जानकारों का मानना है कि भारतीय IT कंपनियाँ धीरे-धीरे इस बदलाव को मैनेज कर लेंगी. उनके ग्राहकों को AI लागू करने के लिए किसी कंसल्टेंसी सर्विस की ज़रूरत तो पड़ेगी ही.

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