धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

दसजूला पट्टी का आराध्य रावल देवता 6 माह की बन्याथ यात्रा पर निकला

गौचर, 14 दिसंबर ( गुसाईं) । दसजूला क्षेत्र के आराध्य  रावल देवता वृहस्पतिवार से 6 माह की बन्याथ यात्रा के लिए निकल गया है। इस बन्याथ यात्रा में चमोली तथा रुद्रप्रयाग जनपदों के दर्जनों गाँव भाग ले रहे हैं। आयोजन में रुद्रप्रयाग जिले के विकास खण्ड अगस्त्यमुनि के बिजराकोट, रावलधार, बौरा, टुखिंडा, बुरांशी, जाखेडा, गैर, अमोला पुडियास तथा देवरादी के अलावा चमोली जिले के पोखरी विकास खण्ड के बडेथ, डांग, इज़्ज़र तथा भान्वाडी आदि गांवों के शमिल  हैं।

पूर्व की परंपरा के अनुसार 22 नवंबर को रावल देवता को गर्भ गृह से बाहर बाहर निकाला गया। इसके पश्चात तीन दिवसीय  पूजा पाठ के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 8 ब्राह्मणों की अगुवाई में किया गया। 24 नवम्बर की रात्रि 10 बजे से शक्ति मंत्रों द्वारा ब्रह्म बंधन तथा शक्ति शाँचरण किया गया। जिसके पश्चात ब्रह्म गुरु के द्वारा ब्रह्म एरवालों (देव पाश्व) को सौंपा गया। 25 नवम्बर सुबह 9 बजे देवता ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और अपनी बनातोली होते हुए सारी गाँव स्तिथ झालीमठ में माँ झाली मंदिर में हवन कुण्ड खोला गया।

यहाँ पर नरोत्तम प्रसाद ड़िमरी की अगुवाई में 3 दिवसीय पूजा पाठ और हवन किया गया। 28 नवंबर देवता रानों गाँव स्थित रावलजाड़ मंदिर गए। 29 नवम्बर को बड़ेथ स्थित अपना शक्ति कुंड खोला गया जहाँ पर एक दिवसीय पूजा पाठ के बाद देवता ने यहीं से अपने बानी गावों की यात्रा प्रारंभ की जो की 8 दिसंबर तक चली

9 दिसम्बर को देवता ने पूरब दिशा से यात्रा प्रारंभ की और  सभी बानी गावों के लोगों ने देवता को विदाई दी। देवता से 6 महीने बाद वापस अपने गाँव लोटने का वचन लेकर देवता को विदा किया।

इसके पश्चात देवता ने अपनी बन्याथ यात्रा के पहले गाँव कुमेरियाडांग (कुटुम्ब नगर) यहाँ ध्यूका, सेरा और कुमेरियाँ डांग।
10 को देवता सेरु, अमकोंडा होते हुए थपलगाँव पहुँचा यहाँ पर देवता का पंचायती विश्राम हुआ। 11 को महड़ गाँव स्थित माँ चण्डिका व शिव मंदिर में देवी के बन्नातोली और ध्यूके दिखाकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। इसके बाद देवता इसी दिन क्यूडी मालांस पहुँचा यहाँ पर ध्यूके छाँटने के बाद देवता ने रात्रि विश्राम किया। 12 को तलगाड़ गाँव पहुँचा । 13 दिसम्बर को सुबह सभी धियांडियों व भग्तजनों को माथम व मौजाद करने के पश्चात आगर कुखंण्डी, मौजाद के बाद देवता 14 दिसम्बर को बांजी गांव में मौजाद व माथम देने के पश्चात बेंजी( ब्रह्म कोटी) जग्गी काण्डई के लोगों ने रावल देवता को अगले पड़ावों के लिए विदा किया। इस तरह से दशजूला क्षेत्र के लोगों के आराध्य रावल देवता की 6 माह के लिए बन्याथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है।

धर्म/संस्कृति/ चारधाम यात्रा

दसजूला पट्टी का आराध्य रावल देवता 6 माह की बन्याथ यात्रा पर निकला

गौचर, 14 दिसंबर ( गुसाईं) । दसजूला क्षेत्र के आराध्य  रावल देवता वृहस्पतिवार से 6 माह की बन्याथ यात्रा के लिए निकल गया है। इस बन्याथ यात्रा में चमोली तथा रुद्रप्रयाग जनपदों के दर्जनों गाँव भाग ले रहे हैं। आयोजन में रुद्रप्रयाग जिले के विकास खण्ड अगस्त्यमुनि के बिजराकोट, रावलधार, बौरा, टुखिंडा, बुरांशी, जाखेडा, गैर, अमोला पुडियास तथा देवरादी के अलावा चमोली जिले के पोखरी विकास खण्ड के बडेथ, डांग, इज़्ज़र तथा भान्वाडी आदि गांवों के शमिल  हैं।

पूर्व की परंपरा के अनुसार 22 नवंबर को रावल देवता को गर्भ गृह से बाहर बाहर निकाला गया। इसके पश्चात तीन दिवसीय  पूजा पाठ के प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम 8 ब्राह्मणों की अगुवाई में किया गया। 24 नवम्बर की रात्रि 10 बजे से शक्ति मंत्रों द्वारा ब्रह्म बंधन तथा शक्ति शाँचरण किया गया। जिसके पश्चात ब्रह्म गुरु के द्वारा ब्रह्म एरवालों (देव पाश्व) को सौंपा गया। 25 नवम्बर सुबह 9 बजे देवता ने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और अपनी बनातोली होते हुए सारी गाँव स्तिथ झालीमठ में माँ झाली मंदिर में हवन कुण्ड खोला गया।

यहाँ पर नरोत्तम प्रसाद ड़िमरी की अगुवाई में 3 दिवसीय पूजा पाठ और हवन किया गया। 28 नवंबर देवता रानों गाँव स्थित रावलजाड़ मंदिर गए। 29 नवम्बर को बड़ेथ स्थित अपना शक्ति कुंड खोला गया जहाँ पर एक दिवसीय पूजा पाठ के बाद देवता ने यहीं से अपने बानी गावों की यात्रा प्रारंभ की जो की 8 दिसंबर तक चली

9 दिसम्बर को देवता ने पूरब दिशा से यात्रा प्रारंभ की और  सभी बानी गावों के लोगों ने देवता को विदाई दी। देवता से 6 महीने बाद वापस अपने गाँव लोटने का वचन लेकर देवता को विदा किया।

इसके पश्चात देवता ने अपनी बन्याथ यात्रा के पहले गाँव कुमेरियाडांग (कुटुम्ब नगर) यहाँ ध्यूका, सेरा और कुमेरियाँ डांग।
10 को देवता सेरु, अमकोंडा होते हुए थपलगाँव पहुँचा यहाँ पर देवता का पंचायती विश्राम हुआ। 11 को महड़ गाँव स्थित माँ चण्डिका व शिव मंदिर में देवी के बन्नातोली और ध्यूके दिखाकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। इसके बाद देवता इसी दिन क्यूडी मालांस पहुँचा यहाँ पर ध्यूके छाँटने के बाद देवता ने रात्रि विश्राम किया। 12 को तलगाड़ गाँव पहुँचा । 13 दिसम्बर को सुबह सभी धियांडियों व भग्तजनों को माथम व मौजाद करने के पश्चात आगर कुखंण्डी, मौजाद के बाद देवता 14 दिसम्बर को बांजी गांव में मौजाद व माथम देने के पश्चात बेंजी( ब्रह्म कोटी) जग्गी काण्डई के लोगों ने रावल देवता को अगले पड़ावों के लिए विदा किया। इस तरह से दशजूला क्षेत्र के लोगों के आराध्य रावल देवता की 6 माह के लिए बन्याथ यात्रा का शुभारंभ हो गया है।

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