राजस्व सेवाओं में डिजिटल क्रांति: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 6 वेब पोर्टलों का किया शुभारंभ

देहरादून, 10 जनवरी । मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास, देहरादून में राजस्व परिषद द्वारा विकसित राजस्व विभाग के विभागीय कार्यों से संबंधित 6 महत्वपूर्ण वेब पोर्टलों का शुभारंभ किया। इनमें ई–भूलेख (अपडेटेड वर्जन), भू–नक्शा, भूलेख अंश, भू–अनुमति, एग्री लोन तथा ई–वसूली (ई–आरसीएस) पोर्टल शामिल हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से आमजन को अधिकतम सुविधा प्रदान की जा रही है। इन वेब पोर्टलों के शुभारंभ से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी, उनका जीवन सरल होगा और उन्हें सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सरलीकरण, समाधान और त्वरित निस्तारण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत राजस्व से जुड़ी सेवाओं का ऑनलाइन उपलब्ध होना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी और नागरिक घर बैठे ही खतौनी सहित अन्य राजस्व सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि भूमि अभिलेखों से संबंधित सेवाओं में अब खतौनी की सत्यापित प्रति तहसील कार्यालय जाने के बजाय मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान कर प्राप्त की जा सकेगी। साथ ही, प्रदेश में उद्योग एवं कृषि प्रयोजनों हेतु भूमि उपयोग/भूमि कार्य की अनुमति की प्रक्रिया को भी पूर्णतः ऑनलाइन कर दिया गया है। भूमि मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन 6 वेब एप्लीकेशनों के नवीन संस्करण को डिजिटल इंडिया, विकसित भारत और विकसित उत्तराखण्ड के लक्ष्यों के अनुरूप आधुनिक तकनीकों से उन्नत किया गया है। इससे न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुविधा बढ़ेगी, बल्कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को भी बल मिलेगा।
पोर्टलों की प्रमुख विशेषताएँ:
ई–भूलेख पोर्टल:
अब खतौनी की प्रमाणित प्रति ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से घर बैठे प्राप्त की जा सकेगी। पहले इसके लिए तहसील जाना आवश्यक था, जिससे समय और संसाधनों की अतिरिक्त खपत होती थी।
भूलेख अंश पोर्टल:
संयुक्त खातेदारी एवं गोलखातों में दर्ज खातेदारों व सहखातेदारों के पृथक अंश निर्धारण हेतु डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों की फार्मर रजिस्ट्री के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा तथा जाति, लिंग और पहचान संख्या सहित समेकित भू-अभिलेख डाटाबेस विकसित किया जा सकेगा।
भू–अनुमति पोर्टल:
प्रदेश में उद्योग, कृषि, बागवानी प्रयोजनों हेतु भूमि उपयोग एवं भूमि क्रय की अनुमति प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है, विशेषकर हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर जनपदों में।
एग्री लोन पोर्टल:
किसानों को अब अपनी भूमि के सापेक्ष कृषि एवं संबंधित गतिविधियों हेतु बैंक ऋण लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध होगी। ऋण अदायगी के पश्चात बैंक द्वारा एनओसी जारी होते ही चार्ज स्वतः हट जाएगा।
ई–वसूली पोर्टल:
राजस्व वसूली प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल बनाते हुए बैंक एवं संबंधित विभाग अब वसूली प्रकरण ऑनलाइन कलेक्टर को भेज सकेंगे। पूरी वसूली प्रक्रिया की प्रत्येक स्तर पर ट्रैकिंग संभव होगी।
भू–नक्शा पोर्टल:
भूमि मानचित्र (कैडस्ट्रल मैप) को सार्वजनिक डोमेन में निःशुल्क देखने की सुविधा प्रदान की गई है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, सचिव राजस्व श्री एस.एन. पांडेय, सचिव एवं आयुक्त राजस्व परिषद श्रीमती रंजना राजगुरु, अपर सचिव श्री आनंद श्रीवास्तव, स्टाफ ऑफिसर श्रीमती सोनिया पंत, एनआईसी के वरिष्ठ निदेशक (आईटी) श्री मनीष वालिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के सभी जिला मुख्यालयों से जिलाधिकारी, मंडल आयुक्त एवं तहसील स्तर के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
