व्याखान के माध्यम से डा0 कुलश्रेष्ठ एवं डा0 दिनेश प्रताप सिंह याद किये गये

देहरादून, 16 अक्टूबर। दून लाईब्रेरी एवं शोध केंद्र के हाल में गत दिवस डीएवी कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डाक्टर एस के कुलश्रेष्ठ एवं डाक्टर दिनेश प्रताप सिंह की स्मृति में आयोजित व्याख्यान माला के तहत दो ज्वलन्त बिषयों जिनमें ( जलवायु परिवर्तन के दौर में हिमालय) तथा (पहाड़ व नागरिक )पर दून साइंस फोरम तथा दिनेश प्रताप मैमोरियल टस्ट के संयुक्त तत्वाधान में व्याख्यानमाला आयोजित की गयी। जिसके मुख्य वक्ता जाने माने भूर्गभशास्त्री प्रो0 एस पी सती एवं जेएनयू भूगोल विभागाध्यक्ष रहे प्रो0 सच्चिदानन्द सिन्हा थे ।
लगभग तीन घण्टे चले व्याख्यानों की श्रृखंला ने श्रोताओं को एक दिशा देने का कार्य किया । अपने व्याखान में प्रो0 सती ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं प्रमुख रूप से मानव जनित हैँ। प्रकृति के अन्धाधुन्ध दोहन से पहुंच रहे नुकसान तथा इसके दुष्परिणामों के रूप में असमय बर्षात, बाढ़, भूस्खलन की आये दिन हो रही घटनाओं के रूप में देखा जा सकता है ।
प्रो0 सती ने बताया कि जलवायु परिवर्तन आज के युग का महत्वपूर्ण प्रश्न है जिसके परिणामस्वरूप ग्लेशियरों का पिघलना तथा पीछे हटने की घटना तेजी से हो रही है ।उन्होंने बताया है कि हिमालय भूकम्प की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र है । बढ़ते मानव जनित क्रियाकलापों ने जैसे इस क्षेत्र में भीमकाय बांधों की एक लम्बी श्रृंखला खड़ी हो गयी। अनियोजित ढ़ग से आल वेदर रोड़, सड़कों का अनियोजित तरीके से निर्माण हो रहा है। सड़कों, बांधों आदि का मलवा नदी -नालों में डाला जा रहा है। सडको के लिए पेड़ पौधों का विनास किया जा रहा है। सुरंगों के निर्माण में विस्फोटकों का बेतहासा इस्तेमाल हो रहा है। हमारे सामने अनाप सनाप निर्माण के चलते जोशीमठ जैसे ऐतिहासिक शहर की स्थिति सामने है, जो न जाने कब लुप्त हो जाऐगा। इसके साथ ही उत्तराखण्ड के अनेक शहर हैं जो अनियोजित विकास के कारण खतरे की जद्द में हैं ।
जलवायु परिवर्तन के दौर में हिमालय पहाड़ नागरिक बिषय पर बोलते हुऐ जेएनयू भूगोल विभाग पूर्व अध्यक्ष एवं सरकार की विभिन्न समितियों में रहे प्रो0 सच्चिदानन्द सिन्हा ने कहा है कि कारपोरेटपरस्त नीतियों के परिणामस्वरूप वर्तमान व्यवस्था में नागरिक कि भूमिका गौंण होती जा रही है । नव उदारवादी नीतियों ने नागरिक को बाजार का हिस्सा बना दिया है। वह बाजार के रहमो-करम पर है । पहले बाजार उसके जरूरतों के हिसाब हुआ करता था अब बाजार के हिसाब से वह चलने के लिऐ मजबूर हैं । सन् 1991 के बाद अपनाई गई नव उदार नीतियों के बाद वर्तमान में ये नीतियां तेजी लागू कि जा रही है ।
उन्होंने कहा है कि देश में संसद सर्वोच्च है किन्तु संसद को दरकिनार करते हुऐ नई शिक्षा नीति, लेवर ला ,किसान बिल , पर्यावरण, भूमि अधिग्रहण विल,राष्ट्रीय राजमार्ग विल लाकर आम नागरिक के बुनियादी अधिकारों पर हमला किया जा रहा है ।यह तर्क दिया जा रहा है कि वक्त के हिसाब से इन कानूनों कि अतिआवश्यकता है। हकीकत यह है कि इनके माध्यम से सरकार कारपोरेट को फायदा पहुँचाना चाहती है ।
उन्होंने कहा है संविधान को कमजोर किया जा रहा है ,जबकि संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार दिये हैँ ।संविधान के परिणामस्वरूप हाशिऐ पर खड़ा हर नागरिक को आगे आने का मौका मिला तथा महिलाओं आगे बढ़ने का अवसर मिला । संविधान ने हमें वोट का अधिकार दिया तथा इस वोट के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों को चुनने तथा सरकार बनाने का अधिकार दिया किन्तु चुनी हुई सरकार जनता की सेवा करने के बजाय कारपोरेट जगत कि हि सेवा करती आ रही है।
अतिथियों का स्वागत डा अराधना सिंह ने किया उन्होंने कहा ऐसे कार्यक्रम करने की उनकी दिल्ली तमन्ना थी ।डाक्टर कुलश्रेष्ठ के बारे में उनके शिष्य रहे पूर्व निदेशक डाक्टर बिजय वीर सिंह तथा डाक्टर दिनेशप्रतापसिंह के बारे में डाक्टर प्रेम बहुखण्डि ने बिस्तार कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे लोगों को बताया ।
कार्यक्रम का समापन श्रीमती मधुर कुलश्रेष्ठ ने किया। इस कार्यक्रम में रंगकर्मी सतीश धौलाखंडी ने जनगीत की प्रस्तुति की । कार्यक्रम का संयोजन दून सांइस फोरम के श्री विजय भट्ट ने किया ।
(दिवगन्त डाक्टर कुलश्रेष्ठ एवं डाक्टर दिनेश प्रताप सिंह दून साइंस फोरम में सक्रिय रहे हैं । डाक्टर एस एन सचान जो दून सांइस फोरम से जुड़े रहे, कार्यक्रम में अन्य शिक्षाविदों के साथ मौजूद रहे )
