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क्या सचमुच दूसरे ग्रह के लोग अमेरिका के कब्जे में हैं ? ओबामा के बयान की सच्चाई जानें

The article by Jaysingh Rawat debunks a viral misinformation claiming that former US President Barack Obama admitted to extraterrestrial aliens being held in US custody. It traces the confusion to Obama’s recent comments criticizing aggressive ICE immigration raids in Minnesota, where he referred to undocumented immigrants as “aliens in custody” in legal terms. Clips were decontextualized on social media, twisting “aliens” (meaning immigrants) into extraterrestrials.The piece contrasts this with actual UFO/UAP discussions, like the 2021 Pentagon report on unexplained aerial phenomena and David Grusch’s 2023 claims of non-human craft remnants—neither confirmed nor linked to aliens in custody.Obama has acknowledged the statistical likelihood of extraterrestrial life but denied any evidence of alien contact or cover-ups (e.g., at Area 51). The article stresses how digital misinformation conflates immigration politics with UFO speculation, distorting serious issues in both science and society.

 

जयसिंह रावत-
यूएफओ का विषय लंबे समय तक कल्पना, विज्ञान कथा और साजिश सिद्धांतों तक सीमित माना जाता रहा। हालांकि पिछले एक दशक में अमेरिकी सरकार का रवैया कुछ हद तक बदला है। वर्ष 2021 में पेंटागन की एक रिपोर्ट सामने आई, जिसमें 2004 से 2021 के बीच दर्ज 140 से अधिक घटनाओं का उल्लेख था। इन्हें ‘अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना’ यानी यूएपी कहा गया। इन घटनाओं में सैन्य पायलटों द्वारा देखी गई ऐसी उड़न वस्तुओं का जिक्र था, जिनकी गति और व्यवहार मौजूदा तकनीक और भौतिकी के ज्ञात नियमों से मेल नहीं खाते थे।
हालांकि इस रिपोर्ट में भी यह नहीं कहा गया कि ये वस्तुएं किसी अंतरिक्षीय सभ्यता से जुड़ी थीं। रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि इनमें से कई घटनाएं प्राकृतिक कारणों, ड्रोन, विदेशी तकनीक या सेंसर की त्रुटियों से जुड़ी हो सकती हैं। लेकिन कुछ मामलों की पहचान न हो पाने ने रहस्य को और गहरा जरूर किया।
एलियन’ शब्द और प्रवासन का कानूनी अर्थ
विवाद का असली कारण अंतरिक्ष नहीं, बल्कि धरती पर ही मौजूद एक गंभीर राजनीतिक और मानवीय मुद्दा है—प्रवासन। अमेरिकी कानून में ‘इलीगल एलियन’ शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में प्रवेश करते हैं या वहां रहते हैं। यह शब्द दशकों से प्रशासनिक और कानूनी भाषा का हिस्सा रहा है, हालांकि हाल के वर्षों में इसे अमानवीय मानते हुए इसके प्रयोग पर सवाल भी उठे हैं।
इसी संदर्भ में ओबामा ने हाल ही में मिनेसोटा में हुई एक कार्रवाई पर टिप्पणी की थी, जहां संघीय एजेंसियों ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ छापेमारी कर कई लोगों को हिरासत में लिया। ओबामा ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की सामूहिक गिरफ्तारियां और भय का माहौल अधिनायकवादी देशों की याद दिलाता है। उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और कानून के साथ करुणा बरतने की बात कही।
यहीं से भ्रम पैदा हुआ। ओबामा द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘एलियंस इन कस्टडी’ जैसे शब्दों को कुछ लोगों ने जानबूझकर या अज्ञानवश अंतरिक्षीय एलियंस से जोड़ दिया। सोशल मीडिया पर क्लिप्स को संदर्भ से काटकर पेश किया गया और देखते ही देखते यह अफवाह फैल गई कि अमेरिका ने किसी दूसरे ग्रह के जीवों को कैद कर रखा है।

अफवाहों का दौर और डिजिटल युग
यह पहली बार नहीं है जब किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया हो। डिजिटल युग में सूचनाएं जितनी तेजी से फैलती हैं, उतनी ही तेजी से भ्रम भी फैलता है। एल्गोरिद्म आधारित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सनसनीखेज दावों को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि वही ज्यादा क्लिक और व्यूज लाते हैं। ‘एलियंस अमेरिकी हिरासत में’ जैसे वाक्य स्वाभाविक रूप से लोगों की जिज्ञासा को भड़काते हैं, भले ही उनका वास्तविक अर्थ कुछ और हो।
यह भी उल्लेखनीय है कि 2023 में पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश ने कांग्रेस के सामने शपथ लेकर दावा किया था कि अमेरिका के पास ‘गैर-मानवीय’ शिल्पों के अवशेष हैं। इस बयान ने भी काफी हलचल मचाई थी। हालांकि सरकार ने न तो इस दावे की पुष्टि की और न ही उसे पूरी तरह खारिज किया। आज तक कोई ठोस, सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

तथ्य, संभावना और भ्रम के बीच
सभी उपलब्ध तथ्यों और बयानों का विश्लेषण यही संकेत देता है कि बराक ओबामा ने कभी यह स्वीकार नहीं किया कि अंतरिक्ष से आए किसी जीव को अमेरिका ने हिरासत में रखा है। उन्होंने केवल वैज्ञानिक संभावना के तौर पर यह कहा कि ब्रह्मांड में कहीं और जीवन हो सकता है। ‘हिरासत में लिए गए एलियंस’ वाला संदर्भ पूरी तरह से प्रवासन और अवैध प्रवासियों की कानूनी स्थिति से जुड़ा हुआ था।
इस प्रकरण से एक बड़ा सबक भी मिलता है। शब्दों का संदर्भ और अर्थ समझे बिना उन्हें साझा करना न केवल गलत सूचना फैलाता है, बल्कि गंभीर मुद्दों को भी हल्के मनोरंजन में बदल देता है। अंतरिक्षीय जीवन की खोज मानवता के लिए एक रोमांचक वैज्ञानिक प्रश्न है, जबकि प्रवासन एक जटिल मानवीय और राजनीतिक समस्या। दोनों को एक-दूसरे में मिलाकर देखना न तो विज्ञान के साथ न्याय है और न ही समाज के साथ।

(लेखक का 48 सालों का लम्बा पत्रकारिता का अनुभव होने के साथ वह अब तक 9 शोधपूर्ण पुस्तकों का श्रीजन भी कर चुके हैं और इस न्यूज़ पोर्टल के अवैतनिक/मानद सम्पादकीय मंडल के सदस्य भी हैं । फिर भी लेख में व्यक्त विचार या तथ्य उनके निजी हैं – एडमिन)

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