इंसानियत मंच और महिला मंच ने एलिवेटेड रोड के खिलाफ बस्तियों में पदयात्रा शुरू की

उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच ने शुरू किया तीन दिवसीय पदयात्रा का पहला चरण
देहरादून, 27 दिसंबर। प्रस्तावित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड रोड के खिलाफ उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच ने संयुक्त रूप से पदयात्रा शुरू की। पहले चरण में यह पदयात्रा तीन दिन तक रिस्पना किनारे की बस्तियांे में निकाली जाएगी। उसके बाद बिंदाल के किनारे की बस्तियों में भी पदयात्रा निकाली जाएगी।
शनिवार को पदयात्रा की शुरुआत राजीवनगर पुल के पास से की गई। राजीवनगर, भगतसिंह कालोनी और पूरन बस्ती सहित कई बस्तियों से होकर पहले दिन की पदयात्रा संजय कॉलोनी, इंदर रोड के पुल पर समाप्त हुई। गले में एलिवेटेड रोड के विरोध वाले नारे लिखी तख्तियां लटकाए पदयात्री नारे लगाते और जनगीत गाते हुए आगे बढ़े। बड़ी संख्या में बस्तियों के लोग भी पदयात्रा में शामिल हुए। इस दौरान करीब 6 जगहों पर नुक्कड़ सभाएं भी की गई।
नुक्कड़ सभाओं में पदयात्रियों के साथ ही बस्तियों में रहने वाले लोगों ने भी अपनी बात रखी। बस्ती वालों का कहना था कि उन्होंने जिन्दगी भर की कमाई अपने लिए छत बनाने में लगा दी है और अब सरकार उन्हें बेघर करना चाहती है। लोगों का कहना था कि यदि सरकार को एलीवेटेड रोड बनानी है तो पहले उनके रहने की व्यवस्था की जाए। कुछ लोगों का कहना था कि वे किसी भी हालत में अपने घर नहीं छोड़ेगे।
पदयात्रा में शामिल उत्तराखंड इंसानियत मंच और उत्तराखंड महिला मंच के लोगों ने कहा कि यदि सभी मिलकर इस लड़ाई को लड़ें तो बस्तियों को उजड़ने से बचाया जा सकता है। वक्ताओं का कहना था कि सरकार ने इन बस्तियों में बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं दी हैं। लोगों से हाउस टैक्स भी वसूला जा रहा है। लेकिन, आज इन बस्तियों को अवैध कहा जा रहा है। आम लोगों के मन में बस्तियों में रहने वाले लोगों के खिलाफ ऐसी नफरत भर दी गई है कि लोग बस्तियों को उजाड़ने का समर्थन कर रहे हैं। यह इस देश के संविधान और देश की परंपराओं के खिलाफ है।
पदयात्रा के दौरान सतीश धौलाखंडी ने जनगीत गाकर बस्तियां न तोड़े जाने का संदेश दिया। नुक्कड़ सभाओं को हरिओम पाली, कमला पंत, डॉ. रवि चोपड़ा, चंद्रकला, त्रिलोचन भट्ट, तुषार रावत, एसके यादव, प्रशांत राही, सीमा नेगी आदि ने संबोधित किया। इस पदयात्रा में नन्द नन्दन पांडे, मनीष केडियाल, तुषार रावत, हेमलता नेगी, मंजु बलोदी, राधा, सुलोचना गुसाईं, कान्ता आदि मुख्य रूप से शमिल थे। जहां से भी पदयात्रा गुजरी, उन बस्तियों के लोग भी बड़ी संख्या में पदयात्रा में शामिल हुए।
