ब्लॉगस्वास्थ्य

कर्णप्रयाग में मुश्किल प्रसव: डॉक्टर दंपती ने देकर रक्त बचाई महिला की जान

 

 

             डाक्टर दंपत्ति : अपना खून देकर गर्भवती की जान बचायी

 

गोपेश्वर से महिपाल गुसाईं
कर्णप्रयाग के उप जिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सक दंपती डॉ. राजीव शर्मा और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उमा शर्मा ने एक प्रसूता महिला की जान बचाकर मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। बीते शुक्रवार की मध्यरात्रि गंभीर अवस्था में प्रसूता को अस्पताल लाया गया। जांच में पाया गया कि उसकी बच्चेदानी के बाहर की ट्यूब फटने से पेट में लगभग साढ़े चार लीटर रक्त जमा हो गया था और उसका रक्तचाप लगातार गिर रहा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया।
ऑपरेशन के दौरान रक्त की आवश्यकता पड़ी तो पता चला कि प्रसूता का ब्लड ग्रुप डॉ. राजीव शर्मा से मेल खाता है। ऐसे में उन्होंने बिना देर किए अपना एक यूनिट रक्त उपलब्ध कराया। इसी दौरान एसडीआरएफ के जवान लक्ष्मण कंडारी ने भी एक यूनिट रक्त देकर सहयोग किया। मामले की सूचना मिलते ही कर्णप्रयाग के एसडीएम सोहन सिंह रांगड़ अस्पताल पहुंचे और तहसील प्रशासन के वाहन से रुद्रप्रयाग अस्पताल से तीन यूनिट अतिरिक्त रक्त मंगवाया। लगभग पांच घंटे चले ऑपरेशन के बाद महिला की स्थिति स्थिर हो गई।
ऑपरेशन टीम में डॉ. ऋषिका राठौर, डॉ. किरण रावत, फार्मासिस्ट संजय कुमार, मयंक बहुगुणा, प्रेरणा और राजदर्शन सिंह रावत शामिल रहे। डॉ. राजीव शर्मा के अनुसार यह ‘हेटेरोटोपिक प्रेग्नेंसी’ का मामला था, जिसमें ऑपरेशन की सफलता की संभावना सामान्य से कम मानी जाती है, लेकिन समन्वित प्रयास से मरीज की जान बच गई।
डॉ. राजीव शर्मा और डॉ. उमा शर्मा वर्ष 1992 से चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों में सेवाएं दे रहे हैं। उनकी पहली नियुक्ति तत्कालीन कर्णप्रयाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (अब उप जिला अस्पताल) में हुई थी और तब से वे यहीं कार्यरत हैं। राज्य गठन के समय जब डॉक्टरों से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में से किसी एक का विकल्प मांगा गया, तब शर्मा दंपती ने उत्तराखंड में ही सेवा जारी रखने का निर्णय लिया। पदोन्नति और तबादलों के अवसर आने के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक कर्णप्रयाग अस्पताल को ही अपनी कार्यस्थली बनाए रखा। जून 2024 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पांच वर्ष का सेवा-विस्तार मिला है।
कर्णप्रयाग क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के बीच यह घटना बताती है कि सीमित संसाधनों में भी समर्पित प्रयासों से बड़े जोखिम वाले मरीजों का सफल इलाज संभव है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस दंपती की सतत सेवाओं से दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!