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प्रस्तावित रिस्पना-बिंदाल एलिवेटेड ​कॉरिडोर के विरोध में मुख्यमंत्री और विधायकों

 पहले 150 देहरादून व मसूरी नागरिकों द्वारा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को पहले भेजा गया था पत्र

 

देहरादून, 7 फरबरी। दिसंबर 2025 में देहरादून और मसूरी के लगभग 150 नागरिकों द्वारा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भेजा गया संयुक्त पत्र, जिसमें प्रस्तावित ​रिस्पना –बिंदाल एलिवेटेड रोड परियोजना का विरोध किया गया था, अब औपचारिक रूप से राज्य और जिला स्तर पर भी आगे बढ़ाया गया है।

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम ने बताया कि लगभग 150 नागरिकों के हस्ताक्षर युक्त उसी मूल पत्र की प्रतियां उत्तराखंड सरकार, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गई हैं। इसका उद्देश्य इस परियोजना से जुड़े गंभीर पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक, सामाजिक और यातायात संबंधी मुद्दों पर राज्य स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

यह पत्र उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर, उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, लोक निर्माण विभाग उत्तराखंड के सचिव पंकज पांडेय तथा देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल को भी भेजा गया है।

इसके अलावा यह नागरिक अपील निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को भी भेजी गई है, जिनमें कैबिनेट मंत्री एवं मसूरी विधायक गणेश जोशी, देहरादून कैंट विधायक सविता कपूर, रायपुर विधायक उमेश शर्मा ‘काऊ’, राजपुर रोड विधायक खजान दास, धर्मपुर विधायक विनोद चमोली तथा देहरादून नगर निगम के मेयर सौरभ थपलियाल शामिल हैं। इस प्रकार नागरिकों की सामूहिक आपत्तियां और सुझाव कुल 11 जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष औपचारिक रूप से रखे गए हैं।

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया ज्ञापन नहीं है, बल्कि वही नागरिक पत्र है जो पहले केंद्रीय मंत्री को भेजा गया था और अब इसे राज्य स्तर पर भी प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि निर्णय-प्रक्रिया केवल केंद्र तक सीमित न रहे। बीते कई महीनों से देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम के सदस्य सार्वजनिक संवाद, विशेषज्ञ चर्चाओं में भाग लेते रहे हैं और इस परियोजना से जुड़े वैकल्पिक यातायात व परिवहन समाधान भी प्रस्तुत करते रहे हैं।

नागरिकों का कहना है कि​ रिस्पना और बिंदाल जैसी मौसमी नदियों के ऊपर 26 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना भूकंपीय रूप से संवेदनशील देहरादून शहर के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। उन्होंने बाढ़ के खतरे, भूमि धंसाव, भूजल पुनर्भरण में कमी, शहरी तापमान में वृद्धि और वायु गुणवत्ता में गिरावट को लेकर भी चिंता जताई है। नागरिकों ने यह भी इंगित किया है कि यह परियोजना यातायात की समस्या को कम करने के बजाय उसे नए क्षेत्रों में स्थानांतरित कर सकती है।

पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है कि देहरादून को एलिवेटेड रोड की नहीं, बल्कि एक सशक्त सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की आवश्यकता है। नागरिकों ने इलेक्ट्रिक बसों, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के अनुकूल अवसंरचना तथा नदियों के किनारे ब्लू–ग्रीन कॉरिडोर के विकास की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया है कि ये सभी विकल्प देहरादून कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान–2024 के अनुरूप हैं।

देहरादून सिटिज़न्स फ़ोरम के अनुसार, 150 नागरिकों द्वारा किया गया यह सामूहिक प्रयास एक लोकतांत्रिक, तथ्यों पर आधारित और जिम्मेदार नागरिक पहल है, जिसका उद्देश्य शहर के दीर्घकालिक हितों में पारदर्शी और सुरक्षित निर्णय-निर्माण सुनिश्चित करना है।

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