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संगठित सोना तस्करी और अवैध गलन रैकेट का भंडाफोड़, 14.13 करोड़ रुपये से अधिक की बरामदगी

In total, 8286.81 grams of gold valued at ₹13.41 crore, 7350.4 grams of silver valued at ₹19.67 Lakh, and Indian currency amounting to ₹51,74,100 were seized under the provisions of the Customs Act, 1962.

नयी दिल्ली,15 मार्च।  राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने विदेशी मूल के सोने की तस्करी, रेल मार्ग से उसकी ढुलाई, अवैध इकाइयों में गलाकर पहचान मिटाने और फिर घरेलू बाजार में खपाने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा सहित कुल 14.13 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बरामद की गई है। मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई के अनुसार, जब्त सामग्री में 8,286.81 ग्राम सोना शामिल है, जिसकी कीमत लगभग 13.41 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा 7,350.4 ग्राम चांदी, जिसकी कीमत 19.67 लाख रुपये है, तथा 51,74,100 रुपये की भारतीय नकदी भी बरामद की गई। यह पूरी जब्ती सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत की गई है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से शुरू हुई कार्रवाई

विशिष्ट खुफिया सूचना के आधार पर डीआरआई अधिकारियों ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कोलकाता से ट्रेन द्वारा पहुंचे एक यात्री को रोका। उसके पास विदेशी निशानयुक्त सोना मिला, जिसे स्टेशन के बाहर मौजूद एक रिसीवर तक पहुंचाया जाना था। डीआरआई ने मौके पर ही सोना ले जा रहे व्यक्ति और उसे लेने आए व्यक्ति, दोनों को पकड़ लिया।

दिल्ली में अवैध गलन केंद्र का खुलासा

पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर डीआरआई ने दिल्ली में आगे की तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान एक अवैध सोना गलाने की इकाई का पता चला, जहां विदेशी मूल के सोने को गलाकर उसकी पहचान संबंधी निशानियां मिटाई जाती थीं, ताकि उसे स्थानीय बुलियन बाजार में आसानी से खपाया जा सके। इस परिसर से अतिरिक्त सोना, चांदी और नकदी बरामद की गई। इकाई का संचालन कर रहे प्रबंधक को भी हिरासत में ले लिया गया।

कोलकाता तक पहुंची जांच, सरगना गिरफ्तार

जांच का दायरा बढ़ने पर डीआरआई की टीम कोलकाता पहुंची, जहां गिरोह के सरगना का पता एक अन्य अवैध गलन इकाई में लगा। वहां से और अधिक गलाया गया सोना बरामद किया गया। डीआरआई ने सरगना को दो कैरियरों के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में इन लोगों ने स्वीकार किया कि भारत में तस्करी कर लाया गया विदेशी निशानयुक्त सोना उनके पास पहुंचता था, जिसे गलाकर उसकी पहचान मिटाई जाती थी और बाद में रेल मार्ग से दिल्ली भेजकर आगे बाजार में वितरित किया जाना था।

रेल मार्ग से तस्करी का संगठित नेटवर्क उजागर

डीआरआई की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि तस्करी, परिवहन, गलन और अवैध बिक्री की पूरी श्रृंखला पर आधारित एक सुव्यवस्थित नेटवर्क था। गिरोह विदेशी मूल के सोने को पहले भारत में पहुंचाता था, फिर उसकी पहचान समाप्त कर उसे घरेलू बाजार में वैध माल की तरह खपाने की कोशिश करता था।

छह आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

डीआरआई ने इस पूरे रैकेट से जुड़े सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है। एजेंसी का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

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