स्वास्थ्य

इंदौर पेयजल त्रासदी के बाद उत्तराखंड में जल सुरक्षा को लेकर अलर्ट

जल संस्थान और पेयजल निगम से त्वरित कार्रवाई की मांग

 

देहरादून, 5 जनवरी। देश के सबसे साफ और सबसे पहले वाटर प्लस शहर, इंदौर में दूषित पेयजल के सेवन से हुई व्यापक जनहानि को गंभीर चेतावनी मानते हुए सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीज़ फ़ाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल ने उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के मुख्य महाप्रबंधक और निदेशक को एक विस्तृत पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने उत्तराखंड में नल के माध्यम से आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की तुरंत वैज्ञानिक और पारदर्शी गुणवत्ता जांच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।

इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मृत्यु और सैकड़ों लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की घटना का उल्लेख करते हुए पत्र में कहा गया है कि पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में थोड़ी सी भी लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए इंदौर की तर्ज पर घातक साबित हो सकती है। विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और संवेदनशील राज्य में जहाँ बड़ी आबादी नल के पानी पर निर्भर है, ऐसी किसी भी संभावित घटना को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अनूप नौटियाल ने अपने पत्र में यह भी रेखांकित किया कि वर्षा, भूस्खलन, पाइपलाइन क्षति, सीवेज के मिश्रण और जल स्रोतों के प्रदूषण की आशंकाओं के चलते पेयजल की नियमित और मानक आधारित जांच और भी आवश्यक हो जाती है। उन्होंने कहा कि समय रहते निगरानी और जांच न होने की स्थिति में आम नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर जोखिम में पड़ सकता है।

पत्र के माध्यम से तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली, राज्य के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नल से आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की तत्काल गुणवत्ता जांच कराई जाए, जिसमें भौतिक, रासायनिक और जैविक परीक्षण अनिवार्य हों और यह प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। दूसरी, जल स्रोतों, मुख्य और उप-पाइपलाइनों तथा वितरण नेटवर्क की निरंतर तकनीकी निगरानी सुनिश्चित करते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए। तीसरी, पेयजल सुरक्षा को लेकर राज्य-स्तरीय व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, जिसमें जांच रिपोर्ट, आवश्यक सावधानियाँ और टोल-फ्री शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचे।

अनूप नौटियाल ने उम्मीद जताई है कि उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम इस अत्यंत गंभीर विषय पर शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम न केवल संभावित जनहानि को रोकने में सहायक होंगे, बल्कि जल आपूर्ति व्यवस्था और संस्थान के प्रति जनता के विश्वास को भी और सुदृढ़ करेंगे।

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