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डिस्लेक्सिया: सीखने में कठिनाई, समझने में संवेदना

By- Jyoti Rawat

डिस्लेक्सिया एक सामान्य सीखने संबंधी विकार है, जो मुख्य रूप से पढ़ने, लिखने, वर्तनी और कभी-कभी बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह मस्तिष्क के उन हिस्सों से जुड़ा होता है जो भाषा को संसाधित करते हैं। डिस्लेक्सिया वाले व्यक्तियों को ध्वनियों को अक्षरों या शब्दों से जोड़ने में कठिनाई होती है। यह किसी व्यक्ति की बुद्धि या दृष्टि से जुड़ा दोष नहीं है। बुद्धिमान बच्चे और वयस्क भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। विश्व स्तर पर लगभग 7 से 15 प्रतिशत लोग डिस्लेक्सिया से पीड़ित हैं, जबकि भारत में अनुमान है कि तीन करोड़ से अधिक बच्चे इस समस्या से जूझ रहे हैं। यह विकार अक्सर जन्मजात और आनुवंशिक होता है, यानी यह परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी पाया जा सकता है।

डिस्लेक्सिया के प्रमुख कारण
इस विकार के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शोध बताते हैं कि मस्तिष्क के बाएँ गोलार्ध की संरचना और कार्य में अंतर इसका एक प्रमुख कारण है। यही हिस्सा भाषा और पढ़ने से जुड़ा होता है। आनुवंशिक कारण भी अहम हैं — यदि माता-पिता या नजदीकी रिश्तेदार को डिस्लेक्सिया है, तो बच्चे में इसकी संभावना अधिक रहती है। गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क के विकास में रुकावट या न्यूरोलॉजिकल असामान्यताएँ भी इसका कारण बन सकती हैं। इसके अलावा समय से पहले जन्म, कम जन्म वजन या माँ के स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएँ भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

लक्षण और पहचान

  • डिस्लेक्सिया के लक्षण उम्र के अनुसार बदलते हैं।
  • प्रीस्कूल बच्चों में बोलने में देरी, शब्दों का गलत उच्चारण, तुकबंदी समझने में कठिनाई, अक्षरों या संख्याओं को उल्टा देखना या लिखना जैसे लक्षण आम हैं।
  • स्कूल-आयु के बच्चों में पढ़ने की गति धीमी होना, वर्तनी में बार-बार गलतियाँ करना, शब्दों को ध्वनियों में तोड़ने में कठिनाई, और कहानी या अनुच्छेद को सही क्रम में लिखने में परेशानी देखी जाती है।
  • किशोरों और वयस्कों में लंबे वाक्य समझने में कठिनाई, दूसरी भाषा सीखने में दिक्कत, एकाग्रता की कमी और समय प्रबंधन में समस्या जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

हर व्यक्ति में लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए कई बार इसका निदान देर से होता है।

निदान की प्रक्रिया
डिस्लेक्सिया का निदान मनोवैज्ञानिक, न्यूरोलॉजिस्ट या विशेष शिक्षा विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है। इसमें पढ़ने-लिखने की क्षमता, शब्द पहचान, वर्तनी और बुद्धि का मूल्यांकन किया जाता है। ध्वनियों और अक्षरों के बीच संबंध की जांच और पारिवारिक इतिहास का अध्ययन भी इसमें शामिल होता है। पाँच से छह वर्ष की उम्र में इसका प्रारंभिक निदान सबसे प्रभावी माना जाता है।

उपचार और सहायक उपाय
डिस्लेक्सिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर हस्तक्षेप और सही प्रशिक्षण से बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है।
सबसे प्रभावी तरीका विशेष शिक्षण पद्धति है — जैसे फोनिक्स आधारित शिक्षण, जिसमें शब्दों को ध्वनियों में तोड़कर पढ़ने की आदत विकसित की जाती है। मल्टीसेंसरी लर्निंग भी उपयोगी है, जिसमें दृष्टि, श्रवण और स्पर्श के माध्यम से सीखने पर जोर दिया जाता है। ऑर्टन-गिलिंगम जैसी संरचित शिक्षण पद्धतियाँ भी सफल मानी जाती हैं।

भाषा थेरेपी से बोलने और शब्दावली सुधारने में मदद मिलती है। तकनीकी उपकरणों जैसे ऑडियोबुक, टेक्स्ट-टू-स्पीच सॉफ्टवेयर और स्पेल-चेक टूल्स का उपयोग बच्चों को सीखने में सहायक होता है। माता-पिता और शिक्षकों की समझ, धैर्य और प्रोत्साहन बच्चे के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं।

डिस्लेक्सिया के साथ जीवन
डिस्लेक्सिया जीवन की गति को धीमा जरूर करता है, लेकिन यह सफलता में बाधा नहीं बनता। अल्बर्ट आइंस्टीन, थॉमस एडिसन और टॉम क्रूज़ जैसे कई प्रसिद्ध लोग डिस्लेक्सिया से ग्रस्त थे, फिर भी उन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कीं। डिस्लेक्सिया वाले लोग प्रायः रचनात्मकता, समस्या-समाधान और दृश्यात्मक सोच में विशेष रूप से सक्षम होते हैं।

भारत में स्थिति और कानून
भारत में अब डिस्लेक्सिया को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन स्कूलों और शिक्षकों के प्रशिक्षण की अभी भी जरूरत है। सरकार ने राइट्स ऑफ पर्सन्स विथ डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016 के तहत डिस्लेक्सिया को एक विशिष्ट शिक्षण अक्षमता के रूप में मान्यता दी है। इसके अंतर्गत प्रभावित बच्चों को परीक्षा में अतिरिक्त समय, लेखक (scribe) या विशेष सहायता प्रदान की जा सकती है।

बच्चों के लिए उपयोगी सुझाव

  • यदि बच्चे में शुरुआती लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।

  • सकारात्मक दृष्टिकोण रखें और बच्चे को यह समझाएँ कि यह उसकी बुद्धि की कमी नहीं है।

  • डिस्लेक्सिया सहायता समूहों से जुड़ें, जैसे मद्रास डिस्लेक्सिया एसोसिएशन।

  • सीखने में सहायक तकनीकी उपकरणों और ऐप्स का उपयोग करें।


डिस्लेक्सिया कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सीखने का एक अलग तरीका है। सही समय पर पहचान, उचित सहायता और निरंतर प्रोत्साहन से डिस्लेक्सिया से प्रभावित व्यक्ति न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि अपने क्षेत्र में उत्कृष्टता भी प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपको या आपके बच्चे में इसके लक्षण दिखें, तो बाल रोग विशेषज्ञ या विशेष शिक्षा विशेषज्ञ से सलाह लें।

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