तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलोजी में एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंट- चेंलैंजिज़ एंड स्टूअर्ड्शिप पर हुई सीएमई

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  • ख़ास बातें
    प्रो. चिदंबरम, प्रो. अजय, डॉ. सौरभ, डॉ. श्वेता आदि ने दिए व्याख्यान
    प्रो. एनके सिंह, प्रो. रूपा, प्रो. रेहाना और प्रो. गोपाल थे पैनल में शामिल
    सैंपल कलेक्शन फॉर कल्चर एंड देयर डॉक्यूमेंटेशन पर दी गई ट्रेनिंग
    साइंटिफिक सेशन में मेडिकल पीजी के 70 रेजीडेंट्स ने की शिरकत

–श्याम सुन्दर भाटिया
तीर्थंकर महावीर मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, मुरादाबाद के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलोजी की ओर से हुई सीएमई में अतिथि वक्ताओं ने कहा, मेडिकल में एंटीबायोटिक दवा की भूमिका अति महत्वपूर्ण है। इसमें डॉक्टर से लेकर पेशेंट तक को बेहद सतर्क रहना होना। यदि किसी डॉक्टर ने रोगी को अनुपात से ज्यादा या कम दवा लिख दी या किसी रोगी ने डॉक्टर के पर्चे के उल्ट दवा कम या ज्यादा ले ली या मेडिसिन बीच में छोड़ दी तो पेशेंट को जीवन भर पछताना होगा, क्योंकि मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक बीच में छोड़ी गई एंटीबायोटिक दवा जीवन भर रोगी पर काम नहीं करती है। ऐसे में किसी भी रोगी को डॉक्टर के पर्चे के मुताबिक ही मुकम्मल दवा लेनी चाहिए।

सीएमई में अतिथि वक्ताओं- पीडिएट्रिक विभाग के प्रो. एनएस चिदंबरम, मेडिसिन विभाग के प्रो. अजय कुमार, सर्जरी विभाग के डॉ. सौरभ सुमन, माइक्रोबायोलोजी विभाग की डॉ. श्वेता आर शर्मा और बायोमेरियो साउथ एशिया के मेडिकल हेड डॉ. नवजीत सिंह के संबोधन का सार यही रहा। इससे पहले मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके सीएमई का शंखनाद हुआ।

इस मौके पर बतौर अतिथि मेडिकल कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल प्रो. एसके जैन के संग-संग निदेशक अस्पताल प्रशासन श्री अजय गर्ग, निदेशक अस्पताल पीएंडडी श्री विपिन जैन, माइक्रोबायोलोजी के एचओडी प्रो. उमर फारूख, सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एनके सिंह, पीडिएट्रिक विभाग की हेड प्रो. रूपा सिंह, गायनी विभाग की हेड डॉ. रेहाना नज़्ाम, मेडिसिन विभाग के प्रो. गोपाल कृष्ण आदि की गरिमामयी मौजूदगी रही। इस मौके पर अतिथियों को बुके देकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। संचालन डॉ. सना नुदरत ने किया। अंत में अतिथियों को स्मृति-चिन्ह और प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

सीएमई का शुभारम्भ करते हुए माइक्रोबायोलोजी विभाग की डॉ. श्वेता आर. शर्मा ने एंटीबायोटिक के इतिहास पर प्रकाश ड़ाला और बोलीं, एंटीबायोटिक दवा को अमली जामा पहनाना मेडिकल के किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है बल्कि पूरी मेडिकल कम्यूनिटी को एक दूसरे का सहयोग करना होगा। इससे न केवल मेडिकल पेशे की साख़ में इजाफा होगा बल्कि पेशेंट पर एंटीबायोटिक दवा भी असरकारी होगी। इसके लिए अनिवार्य शर्त यह है, राइट दवा, राइट पेसेंट, राइट डोज, राइट ड्यूरेशन और राइट रूट होना चाहिए।

डॉ. श्वेता बेंच टू बेड साइट ऑफ एंटीबायोटिक पर बोलीं। इनके अलावा मेडिसिन विभाग के प्रो. अजय कुमार एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट प्राब्लम एंड प्रोस्पेक्ट, सर्जरी विभाग के डॉ. सौरभ सुमन रेस्ट्रीक्टिड यूज ऑफ रिजर्व एंटीमाइक्रोबिल्स, बायोमेरियो साउथ एशिया के मेडिकल हेड डॉ. नवजीत सिंह एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंट और पीडिएट्रिक विभाग के प्रो. एनएस चिदंबरम ने रेस्ट्रीक्टिड एंटीबायोटिक यूज इन पीडिएट्रिक आईसीयू पर अपने-अपने व्याख्यान दिए। इन टॉपिक्स पर पैनल डिस्कशन भी हुआ। पैनल डिस्कशन में सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एनके सिंह, पीडिएट्रिक विभाग की हेड प्रो. रूपा, गायनी विभाग की हेड प्रो. रेहाना और मेडिसिन विभाग के प्रो. गोपाल कृष्ण शामिल रहे।

यह जानकारी देते हुए माइक्रोबायोलोजी विभाग की फैकल्टीज़ डॉ. इमरान अहमद और मिसेज श्वेता सचान ने बताया, सीएमई में नर्सिंग और मेडिकल स्टाफ को सैंपल कलेक्शन फॉर कल्चर एंड देयर डॉक्यूमेंटेशन पर ट्रेनिंग भी दी गई, जिसमें प्रो. सुधीर सिंह ने प्रशिक्षुओं को कल्चर के लिए सैंपल कलेक्शन करने के सही तरीके बताए। प्रो. सिंह के अलावा बायोमेरियो के श्री मयंक ने ब्लड सैंपल कलेक्शन की तकनीकी बारीकियां समझाईं। टेªनिंग के दौरान सवाल-जवाब का दौर भी चला। माइका्रेबायोलोजी के एचओडी प्रो. उमर फारूख ने उम्मीद जताई, यह सीएमई न केवल फैकल्टीज़/डॉक्टर्स बल्कि टेक्निकल मेडिकल स्टाफ के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी। प्रो. फारूख ने बताया, ट्रेनिंग करने वाले सभी प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट्स भी वितरित किए गए। सीएमई में चेस्ट एंड टीबी विभाग के एचओडी डॉ. मजहर मकसूद, मेडिसिन विभाग के प्रो. जिगर हरिया, मनोचिकित्सक विभाग की प्रो. प्रेरणा गुप्ता, एन्सथिसिया विभाग के एचओडी प्रो. गुुरदीप सिंह झीते, बायोकेमिस्ट्री विभाग की हेड प्रो. संगीता कपूर के अलावा माइका्रेबायोलोजी विभाग के डॉ. वसुन्धरा शर्मा, डॉ. शिवेन्द्र मोहन आदि भी मौजूद रहे।

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