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उत्तराखंड मेंआपदा प्रभावितों को 72 घंटे में आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री धामी का ऐतिहासिक निर्देश

-by-usha rawat

देहरादून, 21 अगस्त।   आपदा प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत सुनिश्चित करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाते हुए सभी जिला प्रशासनों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आपदा के दौरान किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर 72 घंटे के भीतर मृतक के आश्रितों को अनुग्रह राशि का वितरण अनिवार्य रूप से किया जाए। देरी के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि यदि शिनाख्त या अन्य कारणों से मामूली विलंब हो, तो भी एक सप्ताह के भीतर हर हाल में सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।

इस निर्देश को लागू करने के लिए गुरुवार को सचिव, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास श्री विनोद कुमार सुमन ने सभी जिलाधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित की। बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और आगामी मानसून सीजन की चुनौतियों के लिए राज्य की तैयारियों की समीक्षा की गई, विशेष रूप से भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को ध्यान में रखते हुए।

मुख्यमंत्री धामी के निर्देशों की प्रमुख विशेषताएं

तत्काल आर्थिक राहत: आपदा में मृत्यु के 72 घंटे के भीतर अनुग्रह राशि का वितरण, विशेष परिस्थितियों में अधिकतम एक सप्ताह की समयसीमा।

मानसून की सक्रिय तैयारी: नदियों और नालों के जलस्तर पर सतत निगरानी और मानसून से हुई क्षति का त्वरित आकलन। क्षति की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजी जाए ताकि SDRF और SDMAF योजनाओं के तहत भारत सरकार से अतिरिक्त धनराशि प्राप्त की जा सके।

पर्याप्त राहत कोष: मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि जिलों के पास आपदा राहत, बचाव और पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध है, जिसे समय पर खर्च किया जाए।

निरंतर निगरानी: मुख्यमंत्री स्वयं अतिवृष्टि की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जिलों को मानसून की चुनौतियों से निपटने के लिए लगातार निर्देश दे रहे हैं।

जिलाधिकारियों के साथ रणनीतिक बैठक

वर्चुअल बैठक में श्री विनोद कुमार सुमन ने SDRF, नॉन-SDRF, और SDMAF योजनाओं के तहत व्यय की समीक्षा की, यह सुनिश्चित करते हुए कि जिले प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए सुसज्जित हैं। उन्होंने डेढ़ महीने शेष मानसून सीजन के लिए सतर्कता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्य सलाहकार समिति, आपदा प्रबंधन विभाग के उपाध्यक्ष श्री विनय कुमार रुहेला ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और नदियों के पास साइनेज लगाकर जन जागरूकता बढ़ाने की अनिवार्यता पर जोर दिया।

ग्रामीण स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने के लिए:

दैनिक समीक्षा बैठकें: जिलाधिकारियों को प्रतिदिन आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक करने के निर्देश।

समुदाय की भागीदारी: स्कूल-कॉलेज के छात्रों, व्यापारियों, ग्राम प्रधानों और प्रत्येक गांव के कम से कम 20 लोगों को शामिल करते हुए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जाएं।

हर तहसील में रेस्क्यू वाहन: श्री सुमन ने प्रत्येक तहसील के लिए एक समर्पित रेस्क्यू वाहन खरीदने के निर्देश दिए, जो आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों के लिए उपयोगी होगा। जिलों को प्रत्येक माह की 1, 11 और 21 तारीख को अनिवार्य रूप से बैठक कर इसका कार्यवृत्त USDMA के साथ साझा करने को कहा गया।

भारत सरकार की टीम का दौरा

श्री सुमन ने बताया कि भारत सरकार की सात सदस्यीय टीम जल्द ही अतिवृष्टि और आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए राज्य का दौरा करेगी। जिलाधिकारियों को पहले से ही सभी तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि क्षति की वास्तविक स्थिति प्रस्तुत की जा सके, जिसके आधार पर भारत सरकार से क्षतिपूर्ति के लिए धनराशि प्राप्त होगी।

टिहरी बांध जल रिलीज पर विशेष ध्यान

टिहरी बांध से पानी छोड़े जाने के मद्देनजर, श्री सुमन ने टिहरी के जिलाधिकारी को देहरादून और हरिद्वार जिलों को समय पर सूचित करने के निर्देश दिए। साथ ही, देहरादून और हरिद्वार को गंगा नदी के जलस्तर पर सतत निगरानी रखने और आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठाने के लिए कहा गया।

USDMA का जन सुरक्षा के प्रति संकल्प

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) प्रत्येक नागरिक को समय पर अलर्ट और सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री सुमन ने मानसून अवधि में अब तक हुई जनहानि, पशुहानि और संपत्ति की क्षति की जानकारी ली और राहत राशि वितरण में किसी भी देरी को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से भेजे गए अलर्ट्स को जिला स्तर पर बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्रसारित करने की प्रक्रिया की समीक्षा की, जिसमें प्रत्येक गांव के प्रधान, सरपंच और कम से कम 20 लोग शामिल हों।

मजबूत प्रतिक्रिया के लिए अतिरिक्त उपाय

श्री आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (प्रशासन), ने आपदा संबंधी सूचनाओं को हर समय अपडेट रखने और भारत सरकार या गृह मंत्रालय की मांग पर तुरंत उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। जिलों को अतिरिक्त धनराशि के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा गया।डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (क्रियान्वयन), ने धराली आपदा से सबक लेते हुए नदियों के किनारे संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करने और अलर्ट तंत्र विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने अप्रयुक्त हेलीपैडों का ऑडिट करने का सुझाव दिया ताकि आपात स्थिति में उन्हें तुरंत सक्रिय किया जा सके।

एकजुट आपदा प्रबंधन दृष्टिकोण

बैठक में श्री आनंद स्वरूप, डीआईजी श्री राजकुमार नेगी, डॉ. पूजा राणा, श्री रोहित कुमार, श्री हेमंत बिष्ट, डॉ. वेदिका पंत, और श्रीमती तंद्रीला सरकार जैसे प्रमुख अधिकारियों की उपस्थिति ने राज्य के आपदा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने के लिए एक समन्वित प्रयास को दर्शाया। मुख्यमंत्री धामी के दूरदर्शी नेतृत्व और सक्रिय उपायों के साथ, उत्तराखण्ड आपदा प्रबंधन में नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिसमें नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण सर्वोपरि है।

 

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