जाड़ों की पहली बारिश से बढ़ी ठंड, मुरझाती फसलों को मिली संजीवनी
गौचर, 23 जनवरी (गुसाईं)। लंबे अंतराल के बाद क्षेत्र में जाड़ों के मौसम की पहली बारिश होने से जहां ठंड का प्रकोप बढ़ गया है, वहीं मुरझाती फसलों को संजीवनी मिल गई है। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे से शुरू हुई बारिश ने लंबे समय से सूखे जैसे हालात झेल रहे क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत दी है।
आमतौर पर नवंबर माह से ही जाड़ों के मौसम की शुरुआत हो जाती है। पूर्व वर्षों में नवंबर के दौरान ऊँचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और निचले इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिलती रही है। समय पर बारिश होने से फसलों और पेड़-पौधों को भरपूर लाभ मिलता था। लेकिन पिछले कई वर्षों से जाड़ों की बारिश का चक्र बिगड़ने से न केवल मौसम संबंधी बीमारियों में इजाफा हुआ है, बल्कि फसलों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ा है। इससे काश्तकारों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही थीं।
स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि बारिश की आस में लोग देवी-देवताओं की शरण लेने को मजबूर हो गए थे। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुरूप शुक्रवार को शुरू हुई बारिश से जहां क्षेत्र में ठिठुरन बढ़ी है, वहीं सूखने के कगार पर पहुंच चुकी फसलों और पेड़-पौधों को नया जीवन मिला है। इससे काश्तकारों के चेहरों पर रौनक लौटती दिखाई दे रही है।
हालांकि बारिश की गति फिलहाल धीमी है, इसलिए तुरंत बड़े लाभ की संभावना कम है, लेकिन जिस प्रकार से बारिश का सिलसिला लगातार जारी है, उससे उम्मीद की जा रही है कि फसलों को पर्याप्त पानी मिल जाएगा। बारिश न होने के कारण जनवरी माह में ही फरवरी जैसी गर्माहट का अहसास होने लगा था। इसके चलते सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही थी और अस्पतालों की ओपीडी भी बढ़ गई थी।
उम्मीद जताई जा रही है कि जाड़ों के मौसम की इस पहली बारिश से क्षेत्रवासियों को कई तरह की राहत मिलेगी। लंबे समय तक बारिश न होने से कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन गए थे, जिनसे अब धीरे-धीरे निजात मिलने की संभावना है।
