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भावनात्मक क्षण: 50 साल बाद मिले 1975 पासआउट बैच के वीर सैन्य अधिकारी भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में

THE OFFICERS OF THIS COURSE ACHIEVED LOT OF HIGHER RANKS, 13 OFFICERS BECAME LIEUTENANT GENERALS, 25 MAJOR GENERALS AND MORE THAN 50 BRIGADIERS. 2 LIEUTENANT GENERALS, SANJIV MADHOK AND RAJAN BAKSHI BECAME ARMY COMMANDERS. 56 OFFICERS OF THIS COURSE LEFT FOR HEAVENLY ABODE. DURING THE CEREMONY 25 OFFICERS OF THIS COURSE HAVE ALSO PLEDGED TO DONATE THEIR EYES. THE EVENT WAS ATTENDED BY 330 OFFICERS AND LADIES INCLUDING 9 LIEUTENANT GENERALS, 12 MAJOR GENERALS AND 23 BRIGADIERS.

देहरादून, 22 दिसंबर । पांच दशक बीत जाने के बाद, जब 1975 में पासआउट हुए आईएमए के 56/57 रेगुलर एवं 40 टेक्निकल कोर्स के साथी अधिकारी एक-दूसरे से मिले, तो पुरानी यादें ताजा हो उठीं – कड़े प्रशिक्षण के दिन, हंसी-मजाक, दोस्ती की वो अटूट डोर जो समय की धूल में भी नहीं मिटी।गले मिलते, हाथ थामते, पुरानी कहानियां सुनाते – ये क्षण किसी भी शब्द से परे थे। सफेद बाल, झुर्रियां और रिटायर्ड यूनिफॉर्म में भी वो जज्बा वैसा ही, वो जोश वैसा ही। कई साथी पहली बार इतने वर्षों बाद मिल रहे थे, तो भावुकता स्वाभाविक थी।

भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 21 से 23 दिसंबर 2025 तक 56/57 रेगुलर कोर्स तथा 40 टेक्निकल कोर्स की स्वर्ण जयंती धूमधाम और गरिमा के साथ मनाई गई। यह कोर्स 21 दिसंबर 1975 को पास आउट हुआ था और ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह आईएमए का पहला ऐसा कोर्स था जिसमें सभी कैडेट स्नातक स्तर के थे।

पांच दशकों की गौरवशाली सेवा में इस कोर्स के अधिकारियों ने राष्ट्र की रक्षा में अतुलनीय योगदान दिया है। उन्होंने श्रीलंका में ऑपरेशन पवन, कारगिल युद्ध में ऑपरेशन विजय, कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियान, उत्तर-पूर्व में ऑपरेशन रक्षक एवं राइनो, सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन पराक्रम तथा ऑपरेशन फाल्कन जैसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इन अभियानों में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए।

इस कोर्स से निकले अधिकारियों ने सेना में उच्च पदों पर पहुंचकर गौरव बढ़ाया है। इनमें 13 लेफ्टिनेंट जनरल, 25 मेजर जनरल और 50 से अधिक ब्रिगेडियर शामिल हैं। लेफ्टिनेंट जनरल संजीव माधोक तथा लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी जैसे अधिकारी सेना कमांडर के पद तक पहुंचे। देश सेवा में इस कोर्स के 56 बहादुर अधिकारियों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।

समारोह के दौरान इस कोर्स से जुड़े 25 अधिकारियों ने नेत्रदान का संकल्प लेकर समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

समारोह की शुरुआत स्वर्ण जयंती रात्रि भोज से हुई, जिसमें आईएमए के कमांडेंट एवं डिप्टी कमांडेंट ने शिरकत की। 22 दिसंबर को आईएमए के वॉर मेमोरियल पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर कोर्स के मुख्य समन्वयक ब्रिगेडियर पी.पी.एस. पाहवा (वीएसएम), कमांडर विजय भारद्वाज तथा ग्रुप कैप्टन एम.एन. सक्सेना ने पुष्पांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में 9 लेफ्टिनेंट जनरल, 12 मेजर जनरल तथा 23 ब्रिगेडियर सहित कुल 330 अधिकारियों एवं उनकी पत्नियों ने भाग लिया। समारोह का सफल आयोजन भारतीय सैन्य अकादमी के पूर्ण सहयोग से संभव हुआ।

यह आयोजन न केवल पांच दशकों की सेवा को याद करने का अवसर था, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।

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