स्वतंत्रता केवल राजनीतिक हैसियत या अधिकार नहीं है
स्वतंत्रता अपनी अस्मिता को पहचानने की पहल करने को भी कहते हैं

–गोविंद प्रसाद बहुगुणा-
स्वतंत्रता केवल राजनीतिक हैसियत या अधिकार नहीं है बल्कि आत्मानुशासन भी है I स्वयं को और दूसरे को भी मानसिक गुलामी से मुक्त करना भी स्वतंत्रता का बोधक तत्त्व है I अष्टावक्र गीता के १८वें प्रकरण में स्वतंत्रता की परिभाषा बड़े ही व्यापक अर्थ में की गई है ,देखिये
स्वातन्त्रयात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्या लभते परम्।
स्वतन्त्र्यानिर्वृतिं गच्छेत स्वातन्त्रयात् परम् पदम्।।५० II -स्वतंत्रता से ही सुख मिलता है- यहाँ स्वतंत्रता का अभिप्राय मनुष्य की उस मानसिक स्थिति से अभिप्रेत है, जिसमें वह राग द्वेष से स्वयं को मुक्त रखता है , तभी तो वह स्वतंत्र रह सकता है अन्यथा मोह के बंधन में जकड़े रहने अथवा किसी के प्रति जीवन पर्यन्त द्वेष पालते रहने से भी आदमी एक प्रकार से जेल में ही बंद रहता है I आत्म ज्ञान भी तभी हो सकता है जब वह स्वयं को मानवीय कमजोरियों -लालसाओं से दूर रख सके I स्वतंत्रता से ही परम पद की प्राप्ति संभव है -सभी महापुरुषों को परम पद तभी मिला जब उन्होंने अपरिग्रह में जीवन बिताया और निर्वाण प्राप्त किया I निर्वाण का मतलब उन्हें त्याग करने में कोई कष्ट का अनुभव नहीं हुआ कोई फ़्रस्ट्रेशन उनमें नहीं था -किसी कमी की चुभन महसूस न करने को ही निर्वाण की स्थिति कहते हैं -मनुष्य को शांति भी तभी मिल सकती है जब वह स्वयं को इच्छाओं और वासनाओं के बंधन से सदैव मुक्त रख सके , उनके पांसे में नहीं फंसे I बंधन मुक्त और उन्मुक्त मन- मस्तिष्क से आत्मिक जागृति पैदा हो सकती है I यही स्वतंत्रता का मूल मन्त्र है लेकिन हम स्वतंत्रता का अर्थ केवल सीमित अर्थों में राजनीतिक हैसियत प्राप्त करने तक की स्थिति को समझते आये हैं I मोटे शब्दों में कहें तो जिन बुराइयों के लिए हम अंग्रेजों को कोसते आये हैं यदि उन्हीं बुराईयों के चंगुल में हम फंस गए तो फिर स्वतंत्रता का क्या मतलब हुआ ? जैसे तत्कालीन शासकों ने हमारी जनता के प्रति षड्यंत्र किया, स्वतंत्रता की आवाज को दबाने की कोशिश की, यदि वही हरकतें हम आज भी अपनी सत्ता को बनाये रखने के लिए करते हैं, तो फिर स्वतत्रता का क्या मतलब हुआ ? I द्वेष रहित होकर सहअस्तित्ववादी समाज की रचना के लिए स्वतंत्रता एक आवश्यक घटक है, तभी सुख- शांति और समृद्धि की स्थिति को प्राप्त किया जा सकता है , वास्तविक रूप में इसी प्रयास को स्वतंत्रता कहते हैं I सच को सच कहने की स्वतंत्रता और साहस में असली स्वातंत्र्य का अनुभव होता है I
सभी भारतीय नागरिकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और शुभ कामनायें
